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मिज़ोरम: दल-बदल क़ानून के तहत अयोग्य होने वाले पहले लोकसभा सांसद विधायक के तौर पर भी अयोग्य हुए

मिज़ोरम की सरछिप सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी लालदुहोमा पर आरोप था कि उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जबकि वह ज़ोराम पीपुल्स मूवमेंट नाम के राजनीतिक दल के शीर्ष नेता थे. वह राज्य के पहले ऐसे विधायक बन गए हैं जिन्हें अयोग्य क़रार दिया गया है.

जोराम पीपल्स मूवमेंट के अध्यक्ष लालदुहोमा. (फोटो: फेसबुक/जेडपीएम)

जोराम पीपुल्स मूवमेंट के अध्यक्ष लालदुहोमा. (फोटो: फेसबुक/जेडपीएम)

आइजोल: मिजोरम के निर्दलीय विधायक लालदुहोमा को ‘जोराम पीपुल्स मूवमेंट’ छोड़ने के कारण बीते 27 नवंबर को विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य करार दिया गया.

इससे पहले 1988 में दल-बदल कानून के तहत सांसद के तौर पर उन्हें अयोग्य ठहराया गया था. लालदुहोमा दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने वाले पहले लोकसभा सांसद हैं.

बीते शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष लालरिनलिआना सैलो ने लालदुहोमा को अयोग्य करार दिए जाने की घोषणा करते हुए कहा कि लालदुहोमा 2018 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय विधायक के तौर पर निर्वाचित हुए थे.

उन्होंने कहा कि विधायक ने दल-बदल कानून का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक दल छोड़ दिया और इस कारण विधानसभा की उनकी सदस्यता समाप्त की जाती है.

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सुरक्षा प्रभारी रहे, भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी लालदुहोमा 1984 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर निर्विरोध निर्वाचित हुए थे.

कांग्रेस छोड़ने के बाद लोकसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किए जा चुके लालदुहोमा राज्य के पहले ऐसे विधायक बन गए हैं जिन्हें अयोग्य करार दिया गया है.

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘मामले पर गहन विचार करने और लालदुहोमा एवं आवेदकों के बयान सुनने के बाद यह बात स्पष्ट रूप से सत्यापित हो जाती है कि विधायक जोराम पीपुल्स मूवमेंट (जेडपीएम) में शामिल हुए थे, जिसकी स्वीकारोक्ति उन्होंने पिछले साल सितंबर में एक घोषणा में की थी.’

उन्होंने कहा कि लालदुहोमा ने विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की और जेडपीएम से किनारा कर लिया जिससे उनके इरादे स्पष्ट हो जाते हैं.

प्रदेश में सत्तारूढ़ मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के 12 विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष को आवेदन देकर लालदुहोमा को अयोग्य करार दिए जाने की मांग की थी और आरोप लगाया था कि लालदुहोमा ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा 2 (2) का कथित रूप से उल्लंघन किया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लालदुहमा ने निर्दलीय विधायक के तौर पर अपना पद छोड़ दिया और जेडपीएम के लिए दल-बदल किया जो उनके कार्यों से स्पष्ट रूप से संकेतित था.

उन्होंने कहा, ‘अब इसलिए निष्कर्षों के आधार पर मेरे पास विधायक के खिलाफ संविधान के तहत अपना कर्तव्य निभाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है, जिसे स्वतंत्र रूप से चुना गया था और किसी भी राजनीतिक दल द्वारा स्थापित नहीं किया गया था. विधायक की अयोग्यता की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं को अनुमति दी जाती है और इसलिए मिजोरम विधानसभा के सदस्य होने से लालदुहोमा को अयोग्य घोषित किया गया है.’

सितंबर में 12 एमएनएफ विधायकों ने लालदुहोमा को अयोग्य घोषित करने के लिए याचिका दायर की थी और आरोप लगाया था कि कानून का उल्लंघन करके विधायक नहीं बना जा सकता है.

आरोप था कि उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा था, जबकि वह राजनीतिक दल जेडपीएम के शीर्ष नेता थे और इस दल की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी थे.

याचिका के बाद राज्य विधानसभा ने 8 अक्टूबर को लालदुहोमा को कारण बताओ नोटिस जारी किया और पूछा कि उन्हें अयोग्य क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए. इस मामले को लेकर सुनवाई तीन नवंबर को हुई थी.

अपने जवाब में लालदुहोमा ने कहा कि उन्होंने किसी अन्य पार्टी में दल-बदल नहीं किया, क्योंकि उन्होंने लगातार जेडपीएम के प्रति निष्ठा बनाए रखी और उन्हें एक स्वतंत्र के रूप में विधानसभा चुनाव लड़ना पड़ा, क्योंकि जेडपीएम ने उस समय पंजीकरण प्राप्त नहीं किया था.

उन्होंने यह भी कहा था कि जेडपीएम का गठन 2017 में विभिन्न दलों द्वारा किया गया था और जेडपीएम द्वारा समर्थित सभी उम्मीदवारों ने पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा की कसम खाई थी, एक ही घोषणा पत्र का प्रचार किया और एक प्रतीक का इस्तेमाल किया.

साल 2018 में उन्होंने दो सीटों से चुनाव जीता था. पहला आईजोल वेस्ट-1 और दूसरा सरछिप. सरछिप में उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री लाल थानहावला को हराया था. बाद में उन्होंने आईजोल वेस्ट-1 सीट छोड़ दी थी और सरछिप सीट बरकरार रखी थी.

स्पीकर द्वारा अपनी अयोग्यता की घोषणा करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए लालदुहोमा ने कहा कि उन्होंने अदालत जाने के बारे में कोई फैसला नहीं किया है और उनकी पार्टी का नेतृत्व अंतिम निर्णय करेगा.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सात विभिन्न राजनीतिक दलों ने यह चुनाव लड़ने के लिए जेडपीएम का गठन किया था. जेडपीएम सात सीट जीतकर विधानसभा में प्रमुख विपक्षी दल बना था. लालदुहोमा के अयोग्य होने के बाद 60 सदस्यीय विधानसभा में अब जेडपीएम के सिर्फ छह सदस्य बच गए हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)