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जेएनयू: नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितता को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखा

जेएनयू के स्कूल ऑफ फिज़िकल साइंसेस के आठ प्रोफेसरों ने 23 नवंबर को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि पिछले महीने सात उम्मीदवारों की नियुक्ति की गई, लेकिन उनमें से किसी के पास अपेक्षित अनुभव या योग्यता नहीं है. उन्होंने उनकी नियुक्ति प्रक्रिया रोकने का आग्रह किया है.

जेनएयू और कुलपति जगदीश कुमार (फोटो: ट्विटर)

जेनएयू और कुलपति जगदीश कुमार (फोटो: ट्विटर)

नई दिल्लीः जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेस के आठ प्रोफेसरों ने बीते 23 नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखकर विभाग में हाल ही में हुई नियुक्ति प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत की. प्रोफेसरों ने शिकायत में विशेष रूप से यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर द्वारा अयोग्य लोगों की भर्ती करने का मामला उठाया है.

उन्होंने राष्ट्रपति कोविंद से आग्रह किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर सभी नियुक्तियों पर फिलहाल रोक लगा दे.

राष्ट्रपति कोविंद यूनिवर्सिटी के विजिटर हैं.

राष्ट्रपति को पत्र लिखने वाले इन आठ प्रोफेसरों में संजय पुरी, एसएसडब्ल्यू मूर्ति, सुभाशीष घोष, शंकर प्रसाद दास, सुबीर कुमार सरकार, ब्रजेश कुमार, सत्यव्रत पटनायक और देबाशीष घोषाल शामिल हैं.

नैतिकता का घोर उल्लंघन

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लिखे पत्र में अक्टूबर में नियुक्ति प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया. इस पत्र की एक कॉपी जेएनयू वाइस चांसलर एम. जगदीश कुमार और चांसलर वीके सारस्वत को भी भेजी गई है.

पिछले महीने सात उम्मीदवारों की भर्ती की गई, लेकिन प्रोफेसरों का आरोप है कि इन सातों उम्मीदवारों में से किसी के पास अपेक्षित अनुभव या योग्यता नहीं है.

पत्र में कहा गया, ‘एक मामले में एक उम्मीदवार को एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए चुना गया, लेकिन उसे चुनाव समिति ने शॉर्टलिस्ट नहीं किया था, जो कि आवश्यक था.’

इन आठ प्रोफेसरों ने राष्ट्रपति कोविंद से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है.

उन्होंने आग्रह किया कि जब तक सभी पहलुओं की जांच नहीं हो जाती और चुनाव प्रक्रिया के नतीजे नहीं आ जाते तब तक इन नियुक्तियों को स्थगित किया जाए.

इस पत्र को राष्ट्रपति को भेजे जाने के दो दिन बाद 25 नवंबर को इसे यूनिवर्सिटी की 290वीं कार्यकारी परिषद की बैठक को भेजा गया.

प्रोफेसरों के मुताबिक, जगदीश कुमार के 2016 में पद्भार संभालने के बाद से यूनिवर्सिटी में नियुक्ति प्रक्रिया का पालन करने में उन्होंने दिक्कतें खड़ी की.

इस साल जनवरी महीने में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़े हथियारबंद लोगों के एक समूह के यूनिवर्सिटी कैंपस में घुसकर डंडों और रॉड से छात्रों की बर्बर पिटाई करने की घटना के बाद यूनिवर्सिटी के छात्रों और शिक्षकों ने कुमार के इस्तीफे की मांग की थी.

ऐसे भी आरोप थे कि कुमार की ही मंजूरी से हिंसा को अंजाम दिया गया.

राजनीति से प्रेरित

इन आठ प्रोफेसर में से एक ने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि यूनिवर्सिटी में वीसी कुमार की गतिविधियां एक बड़ी योजना का हिस्सा थे.

उन्होंने द वायर  को बताया, ‘यह एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसे जेएनयू पर निशाना साधने के लिए कहीं और से नियंत्रित किया जा रहा है. 2016 के राजद्रोह मामले से शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय को बदनाम करने के लिए सरकार के बार-बार के प्रयास इस ओर इशारा करते हैं.’

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय में भर्तियां राजनीति से प्रेरित हैं और सहीं मायनों में विश्वविद्यालय को ऐसे लोगों से भरा जा रहा है जो भाजपा सरकार की जी-हुजूरी करेंगे और सरकार से कोई सवाल नहीं पूछेंगे.

उन्होंने कहा कि चुनाव समिति के विशेषज्ञों में से एक के खिलाफ साहित्यिक चोरी के आरोपों की जांच की जा रही है.

जेएनयू शिक्षक संघ की सचिव मौसमी बसु ने कहा कि बीते कुछ सालों में शिक्षण पदों पर भर्ती किए गए लोगों में अच्छी खासी संख्या एबीवीपी से जुड़े लोगों की है.

उन्होंने कहा कि जगदीश कुमार की गतिविधियां यूनिवर्सिटी की मूलभूत संरचना को बाधित करने की है. बसु ने कहा कि इस समस्या का समाधान होने के बाद शिक्षक संघ एक विस्तृत रिपोर्ट लाने की योजना बना रहा है.

बसु ने कहा, ‘ऐसा पहली बार हुआ है, जब स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज ने अपनी बात रखी है, जो बहुत बड़ी बात है. हम यकीनन इसे और मजबूत तरीके से आगे रखेंगे.’

इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.