भारत

सुप्रीम कोर्ट ने आंगनवाड़ी को लेकर केंद्र और राज्यों को हलफ़नामा दायर करने को कहा

सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर मांग की गई है कि बच्चों और स्तनपान करा रहीं माताओं को भोजन एवं स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए निर्देश दिए जाएं, क्योंकि लॉकडाउन के चलते पूरी आंगनवाड़ी व्यवस्था बंद पड़ी हुई है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बीते शुक्रवार को केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया कि वे कोविड-19 को लेकर आंगनवाड़ी के संबंध में जारी दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन को लेकर हलफनामा दायर करें.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संबंध में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण, आर. सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की पीठ ने कहा, ‘भारत सरकार 11 नवंबर 2020 को जारी दिशानिर्देशों को लागू किए जाने को लेकर विस्तृत हलफनामा दायर करे. राज्य भी भारत सरकार द्वारा 11 नवंबर 2020 को जारी गाइडलाइन के संबंध में अतिरिक्त हलफनामा दायर कर सकते हैं.’

सर्वोच्च न्यायालय एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें मांग की गई है कि बच्चों और स्तनपान करा रहीं माताओं को भोजन एवं स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए निर्देश दिए जाएं, क्योंकि लॉकडाउन के चलते पूरी आंगनवाड़ी व्यवस्था बंद पड़ी हुई है.

वरिष्ठ वकील कोलिन गोन्साल्विस ने भी कोर्ट को बताया कि मार्च से ही आंगनवाड़ी का पूरा सिस्टम बंद पड़ा हुआ है और कोई भोजन मुहैया नहीं कराया जा रहा है. कोर्ट ने वकील की दलीलों का संज्ञान लिया कि छह साल की उम्र तक के छोटे बच्चों को न तो भोजन और न ही शिक्षा मुहैया कराई जा रही है.

इस संबंध में कोर्ट ने केंद्र के साथ-साथ राज्यों को दो हफ्ते के भीतर हलफनामा दायर करने को कहा है.

याचिकाकर्ता ने कहा कि देश में सभी आंगनवाड़ी केंद्रों का कामकाज अचानक से बंद हो गया है और गरीब गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं तथा बच्चों को अधर में छोड़ दिया गया है, इसलिए कोर्ट केंद्र, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश जारी करे कि बच्चों में महामारी के प्रभावों खासकर कुपोषण, अनीमिया इत्यादि का पता लगाने के लिए मॉनिटिरिंग की जाए.

इस मामले को लेकर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि आंगनवाड़ी अच्छे कार्य कर रहे हैं और महामारी में भी बच्चों को भोजन मुहैया करा रहे थे.