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नगालैंड: राज्यपाल आरएन रवि ने एनएससीएन-आईएम की अलग झंडे और संविधान की मांग को नकारा

अक्टूबर में नगालैंड के सबसे प्रभावशाली नगा संगठन एनएससीएन-आईएम के प्रमुख ने कहा था कि भारत सरकार के साथ चल रही शांति वार्ता में उनका संगठन अलग झंडे और संविधान की मांग पर कोई समझौता नहीं करेगा.

नगा शांति वार्ता में वार्ताकार और नगालैंड के राज्यपाल आरएन रवि. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

नगा शांति वार्ता में वार्ताकार और नगालैंड के राज्यपाल आरएन रवि. (फोटो साभार: सोशल मीडिया)

गुवाहाटी/कोहिमा: नगालैंड के राज्यपाल आरएन रवि ने नगा समूहों के लिए अलग झंडा और अलग संविधान की किसी भी संभावना से साफ इनकार कर दिया है. यह मुद्दा सबसे प्रभावशाली नगा संगठन एनएससीएन-आईएम और सरकार के बीच तकरार का कारण बना हुआ है.

बता दें कि आरएन रवि नगा शांति समझौते के लिए केंद्र सरकार के वार्ताकार भी हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को नगालैंड के 58वें राज्य स्थापना दिवस की संध्या पर अपने भाषण में रवि ने कहा, ‘भारतीय राष्ट्रीय झंडा और संविधान भारत के लोगों का गर्व हैं. भारत सरकार पूरी तरह से स्पष्ट है कि भारत का केवल एक ही राष्ट्रीय झंडा और संविधान है और रहेगा. इसके विपरित बात करने वाला कोई भी निरर्थक झूठ बोल रहा है. वे लोगों को भ्रमित और गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं.’

उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र ने किसी के साथ देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के मुद्दे पर ‘कभी बात नहीं की, न ही कम ज्यादा का समझौता किया.’ उन्होंने कहा, ‘इस महान राष्ट्र को विघटित करने का कोई भी दुस्साहस बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.’

इससे पहले रवि और एनएससीएन-आईएम के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने नगा संगठन को दिल्ली बुलाया था और इंटेलिजेंस ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत का न्योता दिया था.

रिपोर्ट के अनुसार, दरअसल, जहां एनएससीएन-आईएम अलग झंडे और संविधान की अपनी मांग पर कायम है, वहीं नगालैंड के सात अन्य विद्रोही समूहों के संगठन एनएनपीजी और नागरिक समाज ने कहा है कि वे बिना अलग झंडा और संविधान के किसी समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार हैं.

बता दें कि अक्टूबर में द वायर के साथ बातचीत में केंद्र सरकार और नगा समूहों के बीच चल रही शांति वार्ता की प्रक्रिया में हाल ही में आए तनाव के बीच सबसे बड़े नगा संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम-इसाक मुइवाह (एनएससीएन-आईएम) के प्रमुख टी. मुइवाह ने जोर देकर कहा था कि नगा कभी भारतीय संघ का हिस्सा नहीं बनेंगे और न ही वे भारतीय संविधान को स्वीकार करेंगे.

द वायर  को दिए साक्षात्कार में मुइवाह ने साफ किया था कि एनएससीएन-आईएम की अलग नगा झंडे और नगा संविधान की मांग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

इससे पहले एनएससीएन-आईएम ने कहा था कि वार्ताकार आरएन रवि ने बातचीत की प्रक्रिया में उलझन पैदा की जिसके कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंटेलिजेंस ब्यूरो के साथ शांति वार्ता जारी रखने का प्रस्ताव दिया.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, स्थापना दिवस कार्यक्रम में आरएन रवि ने कहा, ‘नगा राजनीतिक मुद्दा नगा लोगों से जुड़ा है. कोई भी एक संगठन पूरे समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का दावा नहीं कर सकता है.’

रवि ने आगे कहा, ‘नगा राजनीतिक मुद्दे में पारंपरिक ग्राम संस्थाएं और आदिवासी संगठन प्राथमिक हिस्सेदार हैं. उन्होंने साफ तौर पर अपना मन बना लिया है. वे बिना किसी और देरी के अंतहीन शांति प्रक्रिया के परिणाम की मांग कर रहे हैं. वे बंदूक संस्कृति का अंत चाहते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘प्राथमिक हितधारकों का सम्मान न करना नगालैंड के लोगों का अपमान करना है. उन्हें डराने या धमकाने का कोई भी प्रयास लोगों के गुस्से और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.’

पिछले महीने नगा शांति वार्ता के बारे में पूछे जाने पर असम सरकार में वरिष्ठ मंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा था कि गृह मंत्री अमित शाह की निगरानी में अधिकारियों की टीम थुलिंगलेंग मुइवाह (एनएससीएन-आईएम के महासचिव) से बातचीत कर रही है.

शर्मा ने कहा था, ‘बातचीत सकारात्मक है और दोनों पक्षों ने महसूस किया है कि उन्हें एक-दूसरे का सहयोग करने की जरूरत है, लेकिन इसके साथ ही हमें किसी नाटकीय परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए. इसमें समय लगेगा और मित्रवत माहौल में चर्चा होगी. नगा शांति वार्ता नहीं टूटेगी.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)