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आत्महत्या मामला: महाराष्ट्र पुलिस ने अर्णब गोस्वामी और दो अन्य के ख़िलाफ़ प्रमुख आरोप हटाए

रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी को 2018 में हुए एक इंटीरियर डिज़ाइनर और उनकी मां की आत्महत्या से जुड़े मामले में अलीबाग पुलिस ने बीते नवंबर माह में गिरफ़्तार किया था. इस मामले में अब पुलिस ने 1,914 पेजों की चार्जशीट दाख़िल की है.

अर्णब गोस्वामी (फोटो साभार: ट्विटर)

अर्णब गोस्वामी (फोटो साभार: ट्विटर)

मुंबई: महाराष्ट्र की रायगढ़ पुलिस ने इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक आत्महत्या मामले में शुक्रवार को 1,914 पेजों की चार्जशीट दाखिल की, जिसमें रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्णब गोस्वामी और दो अन्य पर लगे उन आरोपों को हटा लिया है जो इस ओर इशारा कर रहे थे कि तीन आरोपियों ने साजिश के तहत नाइक को आत्महत्या के लिए उकसाया था.

दरअसल अप्रैल 2018 में इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में अर्णब गोस्वामी समेत तीन पर आरोप हैं.

नाइक ने सुसाइड नोट में आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए अर्णब गोस्वामी, आईकास्टएक्स/स्काइमीडिया के फिरोज शेख और स्मार्टवर्क्स के नीतेश शारदा पर आरोप लगाया था.

नाइक ने इनके लिए काम किया था सुसाइड नोट में कहा था कि उन्होंने 5.40 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया था.

इस घटना के बाद रायगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आईपीसी की धारा 34 (समान इरादे से किया गया आपराधिक कृत्य) जोड़ दी थी, जिसके मुताबिक इन तीनों ने साथ मिलकर अन्वय नाइक को कथित तौर पर आत्महत्या करने के लिए उकसाया था. हालांकि, अब रायगढ़ पुलिस की ओर से दर्ज चार्जशीट में यह धारा हटा दी गई है.

हालांकि, चार्जशीट में धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) अभी भी है और इसके साथ धारा 109 (अपराध के लिए उकसाने की सजा) भी जोड़ी गई है.

मामले में आरोपियों से धारा 34 हटाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि जांच कर रहे अधिकारी द्वारा 2019 में मामला बंद करने लिए यह प्रमुख कारकों में से एक था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस द्वारा दाखिल की गई ताजा चार्जशीट में उस संदर्भ को हटा दिया गया है, जिसमें तीनों आरोपियों के जुड़े होने की बात जाहिर की गई थी, जिसकी वजह से अन्वय नाइक के पास आत्महत्या करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा था. पुलिस ने इसमें 50 गवाहों के बयान शामिल किए हैं, जिनमें से नौ गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के सामने लिए गए.

मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर जमील शेख ने कहा, ‘हमारे पास नाइक के कई कर्मचारियों के बयान, बैंक स्टेंटमेंट और ईमेल हैं, जिनसे सिद्ध होता है कि इन तीनों आरोपियों द्वारा पैसे का भुगतान नहीं करने की वजह से उन्हें (नाइक) आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा.

एक अधिकारी ने कहा, नाइक और आरोपियों के बीच हुई बात के हमें कुछ पुख्ता सबूत मिले हैं, जहां उन्होंने कहा कि अगर वे उनके किए हुए काम का भुगतान नहीं करते हैं तो उसके लिए जीना मुश्किल हो जाएगा.’

2019 में मामले की क्लोजर रिपोर्ट में अधिकारी ने कहा है कि नाइक ने आरोपियों के काम को पूरा नहीं किया था और वह इससे संतुष्ट नहीं थे. वर्तमान चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि उनके पास (पुलिस) उनके ग्राहकों के लिए काम करने वालों के बयान हैं, जो यह स्थापित करते हैं कि नाइक ने उनसे जो काम लिया था, उसे पूरा किया था.

इस हफ्ते की शुरुआत में महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा था कि पुलिस जल्द ही मामले में मजबूत चार्जशीट दाखिल करेगी.

वहीं, गोस्वामी ने चार्जशीट और आगे की कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष अंतरिम याचिका दायर की थी. उनकी इस याचिका पर अगले हफ्ते सुनवाई हो सकती है.

बता दें कि अलीबाग पुलिस की एक टीम ने बीते चार नवंबर को अर्णब गोस्वामी को उनके घर से गिरफ्तार किया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी थी.

यह गिरफ्तारी 2018 में एक 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद नाइक की मौत के मामले से जुड़ी है.

गोस्वामी पर उन्हें कथित रूप से आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. 2018 में अलीबाग में अन्वय और कुमुद की मौत आत्महत्या से हुई थी, जिसके बाद मिले एक सुसाइड नोट में अन्वय ने कथित तौर पर अर्णब और दो अन्य लोगों पर उनके 5.40 करोड़ रुपये न देने का आरोप लगाया था, जिसके चलते वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए थे.

अलीबाग पुलिस ने उस समय यह मामला दर्ज किया था, लेकिन 2019 में रायगढ़ पुलिस ने इसे बंद कर दिया था.

इस वर्ष मई में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने आर्किटेक्ट अन्वय नाइक की बेटी अदन्या नाइक की नई शिकायत के आधार पर फिर से जांच का आदेश दिए जाने की घोषणा की थी.