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किसान आंदोलन: कनाडा के प्रधानमंत्री ने कहा, उनका देश शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के साथ खड़ा रहेगा

केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में बीते 26 नवंबर से किसानों का प्रदर्शन जारी है. कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने किसान आंदोलन का समर्थन किया था, जिसे भारत ने देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताने के साथ कनाडाई राजदूत को तलब कर इससे दोनों देशों के संबंधों को नुकसान पहुंचने की चेतावनी दी थी.

Canada's Prime Minister Justin Trudeau speaks during a news conference in Ottawa, Ontario, Canada January 9, 2020. REUTERS/Blair Gable

जस्टिन ट्रूडो. (फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 10 दिनों से चल रहे कृषि आंदोलन का कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा समर्थन किए जाने के बाद भारत ने कनाडा के राजदूत का तलब कर दोनों देशों के संबंधों में दरार आने की चेतावनी दी थी.

कनाडाई राजदूत को तलब करने के बाद कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि उनका देश विश्व में कहीं भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा कि वह तनाव को घटाने और संवाद के लिए कदम उठाए जाने से खुश हैं.

बता दें कि भारत ने शुक्रवार को कनाडा के उच्चायुक्त नादिर पटेल को तलब कर लाखों किसानों के प्रदर्शन को लेकर जस्टिन ट्रूडो के बयान पर डिमार्श (आपत्ति-पत्र) जारी किया.

भारत द्वारा कनाडा के राजनयिक को तलब किए जाने और द्विपक्षीय संबंधों में क्षति की चेतावनी के बारे में संवाददाता सम्मेलन में पूछे जाने पर ट्रूडो ने कहा, ‘कनाडा विश्व में कहीं भी शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के अधिकारों के लिए खड़ा रहेगा और हम तनाव को कम करने और संवाद के लिए कदम उठाए जाने से बेहद खुश हैं.’

सूत्रों के अनुसार, कनाडा के उच्चायुक्त नादिर पटेल शुक्रवार को दोपहर 12:30 बजे तक विदेश मंत्रालय में थे. भारत ने उन्हें सूचित किया कि भारतीय किसानों को लेकर कनाडा के प्रधानमंत्री, कुछ कैबिनेट मंत्रियों और सांसदों के बयान हमारे आंतरिक मामलों में दखल है, जो अस्वीकार्य है.

विदेश मंत्रालय ने चेताते हुए कहा, ‘अगर इस तरह के बयान जारी रहे तो इससे भारत और कनाडा के बीच संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा. ट्रूडो और कनाडा के अन्य नेताओं के बयान से कनाडा में हमारे दूतावास और वाणिज्य दूतावास के बाहर लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई, जिससे सुरक्षा का मुद्दा उठा है.’

विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए बयान से पता चला है कि भारत को उम्मीद है कि कनाडा सरकार भारतीय राजनयिकों और अपने नेताओं की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, इन बयानों का एक बड़ा असर ये हुआ कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर अगले हफ्ते कोरोना वायरस को लेकर विदेशी मंत्रियों की हो रही बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे.

यह बैठक कनाडा के विदेश मंत्री फ्रांस्वा फिलिप शैम्पेन द्वारा बुलाई गई है. भारतीय विदेश मंत्री ने आखिरी वर्चुअल बैठक तीन नवंबर को की थी.

ट्रूडो ने बीते 30 नवंबर को फेसबुक लाइव कार्यक्रम के दौरान भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर कहा था, ‘स्थिति चिंताजनक है और हम अपने परिवार और दोस्तों को लेकर बहुत चिंतित हैं. मुझे पता है कि यह आपमें से कई की वास्तविकता है.’

उन्होंने कहा था कि कनाडा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए हमेशा खड़ा है और उन्होंने भारतीय सरकार से संवाद कायम (किसानों से) करने की जरूरत बताई थी.

गुरु नानक देव की वर्षगांठ पर आयोजित इस वर्चुअल मीट में ट्रूडो ने कहा था, ‘आपको याद दिला दूं कि कनाडा हमेशा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की रक्षा करेगा. हम संवाद के महत्व में विश्वास करते हैं और इसलिए हमने हमारी चिंताओं को उजागर करने के लिए प्रत्यक्ष तौर पर कई माध्यमों से भारत सरकार से संपर्क किया है.’

बता दें कि केंद्र सरकार के तीन विवादित कृषि कानूनों के विरोध में बड़ी संख्या में पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली की सीमाओं पर बीते दस दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. यह प्रदर्शन 26 नवंबर को शुरू हुआ था.

मौजूदा समय में किसना नेता अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार से बातचीत कर रहे हैं. हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई समाधान नहीं निकल सका है. इस बीच किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)