राजनीति

किसान आंदोलन राष्ट्रव्यापी घटना नहीं, सिर्फ़ पंजाब तक सीमित: केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा है कि किसानों का प्रदर्शन सिर्फ़ पंजाब में ही है. पंजाब में भी ऐसे लोग इसमें शामिल हैं, जो अधिकांशत: कांग्रेस कार्यकर्ता हैं.

कैलाश चौधरी. (फोटो साभार: फेसबुक)

कैलाश चौधरी. (फोटो साभार: फेसबुक)

जयपुर: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कहा है कि किसानों द्वारा कि जा रहा प्रदर्शन कोई राष्ट्रव्यापी घटना नहीं और वे सिर्फ पंजाब तक ही सीमित हैं.

चौधरी ने कहा कि कृषि कानून किसानों के लिए लाभकारी है और उम्मीद जताई कि किसानों और सरकार के बीच होने वाली अगली बातचीत में सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आएगा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कैलाश चौधरी ने कहा, ‘किसानों का प्रदर्शन पूरे देश में नहीं हो रहा है. यह सिर्फ पंजाब में ही है. यहां तक कि पंजाब में भी ऐसे लोग इसमें शामिल हैं, जिन्हें हम कह सकते हैं कि उनमें अधिकांशत: कांग्रेस कार्यकर्ता हैं.’

उन्होंने कहा, ‘मैं कहना चाहता हूं कि किसानों के हित में ही निर्णय लिया जाएगा और कल (शनिवार) होने वाली मीटिंग में सकारात्मक परिणाम निकलकर सामने आएंगे.’

हालांकि किसानों और सरकार के बीच अभी भी बातचीत जारी है और कोई निष्कर्ष निकलकर सामने नहीं आया है.

चौधरी ने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्ष ने किसानों को गुमराह करने की कोशिश की है.

राज्य की कांग्रेस सरकार को निशाना बनाते हुए उन्होंने कहा, ‘पूरे प्रदेश में राजस्थान सरकार के खिलाफ गुस्सा है. किसानों और युवाओं से किए गए वादों से सरकार पीछे हट गई है. उन्होंने कहा था कि वे किसानों का पूरा कर्ज माफ कर देंगे और युवाओं को 3500 रुपये का बेरोजगारी भत्ता देंगे, लेकिन वे ऐसा नहीं कर सके.’

केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री ने आगे कहा, ‘इसलिए जनता कांग्रेस सरकार से नाराज है, जबकि वह नरेंद्र मोदी और भाजपा द्वारा किए गए विकास कार्यों पर भरोसा करती है.’

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा पंचायत चुनावों में जिला प्रमुख और प्रधान के अधिकांश पदों पर जीत दर्ज करेगी.

कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर राजग के सदस्य और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल के बयान पर टिप्पणी करते हुए चौधरी ने कहा कि अगर बेनीवाल कृषि कानून को पढ़ते हैं तो वह समझ जाएंगे कि वे किसानों के हित में हैं.

कैलाश चौधरी ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि बेनीवाल के भ्रम की स्थिति एक या दो दिन ठीक दूर हो जाएगी और प्रधानमंत्री जो भी फैसला लेंगे वह किसानों के हित में होगा.

केंद्र सरकार के तीन विवादित कृषि कानूनों को लेकर हो रहे किसानों के प्रदर्शन के बीच कर्नाटक के कृषि मंत्री बीसी पाटिल ने बीते तीन नवंबर को कह दिया था, ‘जो किसान आत्महत्या करते हैं, वे कायर हैं. सिर्फ एक कायर ही जो अपनी पत्नी और बच्चों की देखभाल नहीं कर सकता, आत्महत्या करता है. जब हम पानी में गिर जाते हैं तो हमें तैरना होता है और (उस परिस्थिति से) जीतना होता है.’

बता दें कि नए कृषि कानून के खिलाफ पिछले दस दिनों (26 नवंबर) से दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि वे निर्णायक लड़ाई के लिए दिल्ली आए हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है.

मालूम हो कि केंद्र सरकार की ओर से कृषि से संबंधित तीन विधेयक– किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020, किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020 को बीते 27 सितंबर को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी थी, जिसके विरोध में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं.

किसानों को इस बात का भय है कि सरकार इन अध्यादेशों के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने की स्थापित व्यवस्था को खत्म कर रही है और यदि इसे लागू किया जाता है तो किसानों को व्यापारियों के रहम पर जीना पड़ेगा.

दूसरी ओर केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली मोदी सरकार ने बार-बार इससे इनकार किया है. सरकार इन अध्यादेशों को ‘ऐतिहासिक कृषि सुधार’ का नाम दे रही है. उसका कहना है कि वे कृषि उपजों की बिक्री के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था बना रहे हैं.