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मुक्केबाज़ विजेंदर सिंह ने कहा, कृषि क़ानून रद्द नहीं हुए तो खेलरत्न अवॉर्ड लौटा दूंगा

पूर्व राष्ट्रीय बॉक्सिंग कोच गुरबक्स सिंह संधू ने भी द्रोणाचार्य पुरस्कार वापस करने की बात कही थी. इसके अलावा पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित कुछ खिलाड़ियों ने भी अपने सम्मान लौटाने की बात कही है. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने नए कृषि क़ानूनों के विरोध में बीते दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण को लौटा दिया है.

बॉक्सर विजेंदर सिंह नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल हुए. (फोटो: पीटीआई)

बॉक्सर विजेंदर सिंह नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर किसान आंदोलन में शामिल हुए. (फोटो: पीटीआई)

सोनीपत: मुक्केबाजी में भारत के पहले ओलंपिक पदक विजेता और कांग्रेस नेता विजेंदर सिंह रविवार को कुंडली सीमा पर कृषि कानून के विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार नए कृषि कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों की मांग स्वीकार नहीं करती है तो वह राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार लौटा देंगे.

उन्होंने नए कानून को ‘काला कानून’ करार दिया. हरियाणा के भिवानी जिले के 35 साल के मुक्केबाज दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसानों के बीच पहुंचे और उनके प्रति एकजुटता दिखाई.

विजेंदर ने किसानों से कहा, ‘अगर सरकार इन काले कानूनों को वापस नहीं लेती है तो मैं उनसे आग्रह करूंगा कि मेरा पुरस्कार वापस ले लें.’

उन्होंने कहा, ‘अब बहुत हो चुका, अगर सरकार किसानों की मांगें नहीं मानती है तो मैंने फैसला किया है कि एकजुटता दिखाते हुए मैं अपना खेल रत्न पुरस्कार लौटा दूंगा.’

इस मुक्केबाज ने कहा, ‘मैं किसानों और सेना से ताल्लुक रखने वाले परिवार से आता हूं, मैं उनकी पीड़ा और मजबूरी समझ सकता हूं. समय आ गया है कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे.’

कांग्रेस के टिकट पर 2019 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके मुक्केबाज ने कहा कि आठ दिसंबर के किसानों के भारत बंद का वह समर्थन करते हैं.

विजेंदर ने 2008 बीजिंग खेलों में कांस्य पदक के रूप में मुक्केबाजी में भारत का पहला ओलंपिक पदक जीता था. इसी साल उन्हें शानदार प्रदर्शन के लिए देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से नवाजा गया था. विजेंदर फिलहाल पेशेवर मुक्केबाज हैं.

उन्होंने कहा, ‘निश्चित तौर पर यह पुरस्कार मेरे लिए काफी मायने रखता है लेकिन हमें उन चीजों के साथ भी खड़ा होना पड़ता है जिनमें हम विश्वास रखते हैं. अगर बातचीत के साथ संकट का समाधान निकल सकता है तो हम सभी को खुशी होगी.’

इससे पहले बीजिंग ओलंपिक के दौरान प्रभारी पूर्व राष्ट्रीय मुक्केबाजी कोच गुरबक्श सिंह संधू ने भी किसानों की मांगों को नहीं मानने की स्थिति में अपना द्रोणाचार्य पुरस्कार लौटाने की बात कही थी.

 

इसके साथ ही विजेंदर और संधू आंदोलनकारी किसानों को अपना समर्थन देने वाले उन कई पूर्व खिलाड़ियों में शामिल हो गए जिन्होंने अपने अवॉर्डों को वापस करने की बात कही थी.

इन खिलाड़ियों में पद्मश्री और अर्जुन अवॉर्ड विजेता पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवॉर्ड से ही सम्मानित हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर शामिल हैं.

इस बीच, पहलवान एवं भाजपा नेता बबीता फोगाट ने कहा कि किसानों के बीच कृषि अध्यादेशों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि समय आने पर कृषि अध्यादेशों का किसानों को फायदा ही मिलेगा.

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों का भला चाहती है इसलिए वार्ता द्वारा समाधान निकाल लिया जाएगा.

बबीता फोगाट ने दावा किया कि किसान आंदोलन के चलते हरियाणा में गठबंधन सरकार पर कोई संकट नहीं है और जो नेता इस्तीफा दे रहे हैं, वे दोगली राजनीति कर रहे हैं.

बता दें कि पंजाबी गायक एवं अभिनेता हरभजन मान ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के साथ एकजुटता दिखाते हुए चार दिसंबर को राज्य सरकार के ‘शिरोमणि पंजाबी’ पुरस्कार को अस्वीकार कर दिया था.

इससे पहले पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के विरोध में तीन दिसंबर को पद्म विभूषण पुरस्कार वापस कर दिया था. बादल को देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान साल 2015 में दिया गया था.

बता दें कि केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानून के खिलाफ पिछले 12 दिनों (26 नवंबर) से दिल्ली की सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों का कहना है कि वे निर्णायक लड़ाई के लिए दिल्ली आए हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा. किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)