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उत्तराखंड: आरटीआई कार्यकर्ता की मौत पर परिवार के हत्या का संदेह जताने के बाद एफआईआर दर्ज

उत्तराखंड के आरटीआई कार्यकर्ता चार दिसंबर को हरिद्वार में एक घर में मृत पाए गए थे. मृतक कार्यकर्ता ने 2013 में उत्तराखंड में करोड़ों रुपयों के छात्रवृत्ति घोटाले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय. (फोटो साभार: ट्विटर)

उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय. (फोटो साभार: ट्विटर)

देहरादूनः उत्तराखंड की देहरादून पुलिस ने 46 वर्षीय एक दलित आरटीआई कार्यकर्ता की मौत के संबंध में रविवार को एफआईआर दर्ज की है. पीड़ित परिवार ने कार्यकर्ता की हत्या का आरोप लगाया था. परिवारवालों का आरोप था कि उनकी हत्या को अचानक हुई फायरिंग के तौर पर दिखाया गया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक कार्यकर्ता ने 2013 में उत्तराखंड में करोड़ों रुपयों के अनुसूचित जाति-अनुसूचि जनजाति छात्रवृत्ति वितरण घोटाले को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

पुलिस का कहना है कि मृतक आरटीआई कार्यकर्ता पंकज लांबा सरकारी ठेकेदार भी थे. शुक्रवार को उनके होमटाउन हरिद्वार में गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी. अपने दो सहयोगियों के न्योते पर एक पार्टी से शामिल होने के लिए वह  हरिद्वार गए हुए थे.

पुलिस का कहना है कि वे मृतक के सहयोगियों के उस बयान की भी जांच रहे हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि मृतक ने खुद ही अपनी लाइसेंसी पिस्तौल एक नाबालिग लड़की को दी हुई थी, जो उस घर में अपने तीन नाबालिग भाई-बहनों के साथ रह रही थी. पुलिस के अनुसार, बंदूक देखने के दौरान बच्ची ने गलती से गोली चला दी, जो लांबा की गर्दन में जा लगी.

हरिद्वार के एसएसपी सेंथिल अवूदाई के. राज ने कहा कि लांबा के परिवार की शिकायत पर रविवार सुबह हत्या के आरोप में मामला दर्ज किया गया.

परिवार ने मृतक के एक सहयोगी कासिम, एक नाबालिग तथा अन्य के बयान पर सवाल खड़े किए थे.

उन्होंने कहा, पुलिस निष्पक्ष और पेशेवर तरीके से जांच कर रही है. अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है.

पुलिस का कहना है कि जिस कमरे में गोली चली थी, उस कमरे से पिस्तौल और लांबा की लाइसेंसी राइफल मिली है. इसके साथ ही शराब की बोतलें और खाने का सामान भी मिला है.

रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी का कहना है, लांबा सहित पांच लोग कमरे में मौजूद थे. अन्य लोगों के मुताबिक, लांबा ने अपनी पिस्तौल खाली जानकर लड़की को देखने के लिए दी थी. उन्हें पता नहीं था कि पिस्तौल में एक गोली बची है और जब बच्ची ने ट्रिगर दबाया तो गोली उन्हें जा लगी.

पुलिस का कहना है कि बच्ची ने गोली चलाए जाने की बात को स्वीकार किया है. रिपोर्ट के अनुसार, अन्य लोगों ने बताया कि बच्ची अपने छोटे भाई-बहनों के साथ बीते कुछ महीनों से किराये के उस कमरे में रह रही थी. उनके पिता दिल्ली में काम करते हैं और हर हफ्ते उनसे मिलने आते हैं.

लांबा की पत्नी ज्योति ने दुर्घटनावश गोली चलाए जाने के दावों को खारिज करते हुए पुलिस में दर्ज अपनी शिकायत में कहा कि वह छह दिसंबर को घर पर ही थे जब कासिम और एक अन्य शख्स रात लगभग 11.30 बजे घर आए.

उनके अनुसार, दोनों ने लांबा को एक निर्माण स्थल चलने को कहा था, जहां निर्माण का सामान चोरी हो रहे थे. शुक्रवार की देर रात दो-तीन बजे के बीच अजय मौर्य नाम के एक शख्स ने उन्हें फोन कर बताया कि लांबा को गोली लगी है. लांबा की पत्नी ने आरोप लगाया कि कासिम और अन्य लोगों ने साजिश कर उनके पति की हत्या कर दी.

रिपोर्ट के अनुसार, आरटीआई कार्यकर्ता की बहन प्रिया ने कहा, ‘लड़की द्वारा गोली चलाने और मौके से शराब की बोतलों मिलने के पुलिस के दावे दरअसल उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास है, ताकि मेरा परिवार इस मामले को आगे नहीं ले जा सके. मेरा विश्वास है कि उनकी किसी और जगह हत्या की गई और उनके शव को वहां प्लांट किया गया.’

उन्होंने कहा कि लांबा ने छात्रवृत्ति घोटाले का भंडाफोड़ किया था.

प्रिया ने कहा, ‘मामले की जांच जारी है और इसमें बहुत सारे लोग शामिल हैं. उन्हें अमूमन धमकी भरे फोन आते थे और कुछ साल पहले उन्हें सुरक्षा भी मुहैया कराई गई थी, लेकिन बीते दो से तीन साल में उन्हें कोई पुलिस सुरक्षा नहीं दी गई. वह आमतौर पर अपनी लाइसेंसी पिस्तौल के साथ आते-जाते थे.’

हालांकि पुलिस का कहना है कि पंकज लांबा ने उनकी जान के खतरे को लेकर स्थानीय पुलिस को सूचित नहीं किया था.

बता दें कि उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद एसआईटी की दो टीमें बीते एक साल से छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही है.

इनमें से एक टीम की 11 जिलों में अगुवाई कर रहे आईजी संजय गुंजयाल ने कहा कि 73 एफआईआर दर्ज किए गए हैं और 58 लोगों को गिरफ़्तार किया गया. दूसरी एसआईटी टीम देहरादून और हरिद्वार में अनियमितताओं की जांच कर रही है.