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किसानों ने कृषि क़ानूनों पर सरकार का प्रस्ताव ख़ारिज किया, 14 दिसंबर को भाजपा कार्यालय घेरेंगे

कुल 13 आंदोलनकारी किसान संगठनों को भेजे गए मसौदा प्रस्ताव में सरकार ने कहा कि सितंबर में लागू किए गए नए कृषि क़ानूनों के बारे में उनकी चिंताओं पर वह सभी आवश्यक स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार है, लेकिन सरकार ने क़ानूनों को वापस लेने की किसानों की मुख्य मांग के बारे में कोई ज़िक्र नहीं किया था.

Bathinda: Bharatiya Kisan Union (BKU) activists block NH-15 in support of the nationwide strike, called by farmers to press for repeal of the Centres Agri laws, in Bathinda, Tuesday, Dec. 8, 2020. (PTI Photo)(PTI08-12-2020 000165B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विवादित कानूनों के संबंध में भेजे गए मसौदा प्रस्ताव को कृषि संगठनों ने सर्वसम्मति से खारिज कर दिया है.

क्रांतिकारी किसान संगठन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा, ‘हम सरकार के प्रस्तावों को खारिज करते हैं.’ इसके साथ ही किसान नेताओं ने कहा है कि 12 दिसंबर को वे दिल्ली-जयपुर हाईवे को ब्लॉक करेंगे.

संवाददाता सम्मेलन में किसान नेताओं ने कहा, ‘अगर तीनों कृषि कानून रद्द नहीं किए गए तो हम दिल्ली की सभी सड़कों को एक के बाद एक बंद करेंगे.’

कृषि संगठनों ने कहा कि 14 दिसंबर को किसान भाजपा कार्यालयों का घेराव करेंगे और देश के विभिन्न हिस्सों में कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन किए जाएंगे. देश के विभिन्न हिस्सों के किसानों को दिल्ली बुलाया जा रहा है.

किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा, ‘हम 14 दिसंबर को राज्यों में जिला मुख्यालयों का घेराव करेंगे, दिल्ली-जयपुर राजमार्ग 12 दिसंबर तक बंद करेंगे.’

इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राकांपा नेता शरद पवार समेत पांच विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का अनुरोध किया है.

राष्ट्रीय राजधानी की विभिन्न सीमाओं पर नए कृषि कानूनों को वापस लेने को लेकर हजारों की संख्या में किसानों के विरोध प्रदर्शन के बीच सरकार ने बुधवार को उन्हें ‘लिखित आश्वासन’ देने का प्रस्ताव दिया था कि खरीद के लिए वर्तमान में जारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था जारी रहेगी.

सरकार ने कम से कम सात मुद्दों पर आवश्यक संशोधन का प्रस्ताव भी दिया था, जिसमें से एक मंडी व्यवस्था को कमजोर बनाने की आशंकाओं को दूर करने के बारे में था.

13 आंदोलनकारी किसान संगठनों को भेजे गए मसौदा प्रस्ताव में सरकार ने कहा कि सितंबर में लागू किए गए नए कृषि कानूनों के बारे में उनकी चिंताओं पर वह सभी आवश्यक स्पष्टीकरण देने के लिए तैयार है, लेकिन उसने कानूनों को वापस लेने की आंदोलनकारी किसानों की मुख्य मांग के बारे में कोई जिक्र नहीं किया है.

गृह मंत्री अमित शाह ने बीते मंगलवार की रात किसान संगठनों के 13 नेताओं से मुलाकात के बाद कहा था कि सरकार तीन कृषि कानूनों के संबंध में किसानों द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक मसौदा प्रस्ताव भेजेगी. हालांकि, किसान नेताओं के साथ बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला था, जो इन कानूनों को वापस लेने पर जोर दे रहे हैं.

इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राकांपा नेता शरद पवार समेत पांच विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने का अनुरोध किया है.

सरकार और किसान संगठनों के नेताओं के बीच छठे दौर की वार्ता बुधवार की सुबह प्रस्तावित थी, जिसे रद्द कर दिया गया.

कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल की तरफ से भेजे गए मसौदा प्रस्ताव में कहा गया है कि नए कृषि कानूनों को लेकर किसानों की जो आपत्तियां हैं, उस पर सरकार खुले दिल से विचार करने के लिए तैयार है.

प्रस्ताव में कहा गया था, ‘सरकार ने खुले दिल से और सम्मान के साथ किसानों की चिंताओं का समाधान करने का प्रयास किया है. सरकार किसान संगठनों से अपील करती है कि वे अपना आंदोलन समाप्त करें.’

नए कानूनों के बाद मंडी व्यवस्था कमजोर होने की किसानों की आशंका पर सरकार ने कहा था कि संशोधन किया जा सकता है, जहां राज्य सरकारें मंडियों के बाहर काम करने वाले व्यवसायियों का पंजीकरण कर सकती हैं. राज्य सरकारें भी उन पर कर और उपकर लगा सकती हैं, जैसा वे एपीएमसी (कृषि उत्पाद विपणन समिति) मंडी में करती थीं.

इन चिंताओं पर कि किसानों से ठगी की जा सकती है, क्योंकि पैन कार्ड धारक किसी भी व्यक्ति को एपीएमसी मंडियों के बाहर व्यवसाय करने की इजाजत होगी, इस पर सरकार ने कहा था कि इस तरह की आशंकाओं को खारिज करने के लिए राज्य सरकार को शक्ति दी जा सकती है कि इस तरह के व्यवसायियों का पंजीकरण करे और किसानों के स्थानीय हालात को देखकर नियम बनाए.

विवाद के समाधान के लिए किसानों को दीवानी अदालतों में अपील का अधिकार नहीं मिलने के मुद्दे पर सरकार ने कहा था कि वह दीवानी अदालतों में अपील के लिए संशोधन करने को तैयार है. वर्तमान में विवाद का समाधान एसडीएम के स्तर पर किए जाने का प्रावधान है.

बड़े कॉरपोरेट घरानों के कृषि जमीनों के अधिग्रहण की आशंकाओं पर सरकार ने कहा था कि कानूनों में यह स्पष्ट किया जा चुका है, फिर भी स्पष्टता के लिए यह लिखा जा सकता है कि कोई भी खरीददार कृषि जमीन पर ऋण नहीं ले सकता है, न ही किसानों के लिए ऐसी कोई शर्त रखी जाएगी.

कृषि भूमि को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से जोड़ने पर सरकार ने कहा था कि वर्तमान व्यवस्था स्पष्ट है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे और स्पष्ट किया जा सकता है.

एमएसपी व्यवस्था को रद्द करने और व्यवसाय को निजी कंपनियों को देने की आशंका के बारे में सरकार ने कहा था कि वह लिखित आश्वासन देने के लिए तैयार है कि वर्तमान एमएसपी व्यवस्था जारी रहेगी.

प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक, 2020 को रद्द करने की मांग पर सरकार ने कहा था कि किसानों के लिए वर्तमान में बिजली बिल भुगतान की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा.

एनसीआर के वायु गुणवत्ता प्रबंधन अध्यादेश 2020 को रद्द करने की किसानों की मांग पर सरकार ने कहा था कि वह उपयुक्त समाधान की तलाश के लिए तैयार है.

मसौदा प्रस्ताव 13 कृषक संगठन नेताओं को भेजा गया था, जिनमें बीकेयू (एकता उग्रहण) के जोगिंदर सिंह उग्रहण भी शामिल है. यह संगठन करीब 40 आंदोलनकारी संगठनों में से सबसे बड़े संगठनों में से एक है.

सरकार ने दो नए कृषि कानूनों- कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन एवं सरलीकरण) कानून, 2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार कानून, 2020 में सात संशोधन का प्रस्ताव दिया था. हालांकि इसमें आवश्यक वस्तुएं (संशोधन) कानून, 2020 को लेकर कुछ नहीं कहा गया था.

आंदोलनकारी किसान सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं और इस वजह से दिल्ली की सीमाओं पर यातायात अवरुद्ध रहा. किसानों का प्रदर्शन 26 नवंबर से ‘दिल्ली चलो मार्च’ से शुरू हुआ है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)