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राजस्थान: कोटा के अस्पताल में तीन और नवजातों की जान गई, जांच समिति का गठन

कोटा के जेके लोन अस्पताल में बीते 9-10 दिसंबर को नौ नवजात शिशुओं की मौत हुई थी. शुक्रवार को तीन शिशुओं की मौत के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 12 हो गया है. राज्य सरकार ने इन मौतों की जांच के लिए एक चार सदस्यीय समिति का गठन किया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

कोटा: राजस्थान में कोटा शहर के एक सरकारी अस्पताल में शुक्रवार को तीन और नवजात शिशुओं की मौत हो गई. इसके साथ ही, अस्पताल में पिछले दो दिनों में होने वाली इस तरह की मौतों की संख्या बढ़ कर 12 हो गई. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

कोटा स्थित जेके लोन अस्पताल में बुधवार और बृहस्पतिवार को नौ नवजात शिशुओं की मौत हो गई थी. ये सभी एक से चार दिनों के थे.

अस्पताल के अधीक्षक सुरेश चंद दुलारा ने बताया कि शुक्रवार को तीन और नवजात शिशुओं की मौत हो गई जिनमें से दो, एक दिन के थे और एक अन्य एक महीने का था.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक दुलारा ने ये भी बताया कि नवनिर्मित 12 बेड वाला एनआईसीयू (नवजात गहन देखभाल इकाई) श्रेणी-3 वार्ड में 10 नर्सिंग स्टाफ के साथ शुक्रवार को चालू किया गया.

अधिकारियों ने बताया कि राजस्थान सरकार ने अस्पताल में नवजात बच्चों की मौत की जांच के लिए शुक्रवार को चार सदस्यीय एक समिति का गठन किया.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने बताया कि समिति में चिकित्सा शिक्षा आयुक्त शिवांगी स्वर्णकार और अन्य अधिकारी शामिल हैं, वे जेके लोन अस्पताल का दौरा करेंगे और स्वास्थ्य सुविधा में शिशु मृत्यु के हर मामले की जांच करेंगे.

बैठक में शामिल कोटा के जिला कलेक्टर उज्जवल राठौड़ ने बताया कि अस्पताल में कुछ उपकरण बेकार पड़े थे, लेकिन उनकी संख्या कम है.

राठौड़ ने बैठक के बाद मीडियाकर्मियों को बताया कि इस तरह के उपकरणों को जल्द ही बदल दिया जाएगा.

इस बीच, कोटा-बूंदी से सांसद एवं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कोटा में अपने कार्यालय में जिला प्रशासन और चिकित्सा अधिकारियों की शुक्रवार को बैठक बुलाई, जिसमें उन्होंने नवजात बच्चों की मौत के कारण के बारे में पूछा और अधिकारियों को अस्पताल की स्थिति में सुधार करने का निर्देश दिया.

नवजात बच्चों की मौत पर बिरला ने शोक प्रकट किया और अस्पताल में उचित निगरानी किए जाने पर जोर दिया.

बैठक के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मैंने अस्पताल प्रशासन से बात की है और मामले पर रिपोर्ट मांगी है. जो भी बात सामने आएगी, उन पर मैं राज्य सरकार से चर्चा करूंगा.’

उधर भाजपा ने शिशुओं की मौतों पर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़ ने इस घटना को स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही करार दिया है.

बता दें कि बच्चों की मौत के मामले में यह अस्पताल पिछले साल दिसंबर में सुर्खियों में रहा था. दिसंबर में इस अस्पताल में 100 से अधिक शिशुओं की मौत हुई थी. तब शिशुओं की मौत को लेकर काफी हंगामा हुआ था.

इसके अलावा राजस्थान के ही जोधपुर जिले के डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज में बीते साल दिसंबर के महीने में 146 नवजातों की मौत का मामला सामने आया था.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)