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अरुणाचल प्रदेश: पंचायत चुनाव संबंधी मामले को लेकर भीड़ ने सरकारी दफ़्तरों में आग लगाई

कई छात्र संगठनों द्वारा प्रदेश के बाहर के असम राइफल्स के पूर्व कर्मचारियों को पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में शामिल करने का विरोध किया जा रहा है. चांगलांग ज़िले के विजयनगर में ऐसे ही एक पूर्व कर्मी के पंचायत चुनाव का नामांकन पत्र भरने के ख़िलाफ़ एक छात्र संगठन की अगुवाई वाली भीड़ ने सरकारी दफ़्तरों में आग लगा दी और एक थाने में तोड़फोड़ की.

(फोटो साभार: ट्विटर/अरुणाचल टाइम्स)

(फोटो साभार: ट्विटर/अरुणाचल टाइम्स)

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के एक सुदूर गांव में दशकों से रह रहे असम राइफल्स के पूर्व कर्मी द्वारा पंचायत चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने के खिलाफ शुक्रवार को एक छात्र संगठन की अगुवाई वाली एक भीड़ ने सरकारी कार्यालयों में आग लगा दी और एक थाने में तोड़फोड़ की.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि चांगलांग जिले के विजयनगर में यह घटना घटी. इस गांव में असम राइफल्स के पूर्व कर्मी 1960 के दशक के प्रारंभ से रह रहे हैं. ये लोग वैसे तो मूल रूप से राज्य के बाहर के हैं लेकिन वे अब स्थानीय जनसंख्या में बहुसंख्यक हैं.

अनुसूचित जनजाति से आने वाले असम राइफल्स के पूर्व कर्मचारियों को प्रशासन द्वारा पंचायत चुनाव की वोटर लिस्ट में शामिल किया गया है.

कई छात्र संगठनों का विरोध इसी बात को लेकर है. प्रदर्शनकारियों की मांगों में क्षेत्र में रह रहे असम राइफल्स के पूर्व कर्मियों को मिले चुनाव में भाग लेने के अधिकार को रद्द करना और उन्हें तत्काल वापस भेजा जाना शामिल थे.

ऑल अरुणाचल प्रदेश एंटी करप्शन स्टूडेंट्स यूनियन समेत कई छात्र संगठन बीते एक साल से अरुणाचल से बाहर के अनुसूचित जनजाति के लोगों को पंचायत वोटर लिस्ट में शामिल करने के खिलाफ अभियान चला रहे हैं.

पंचायत चुनाव 22 दिसंबर को होने थे लेकिन इस मामले पर कोई फैसला न आने तक उन्हें टाल दिया गया.

एक अधिकारी ने बताया कि योबिन स्टूडेंट्स यूनियन की अगुवाई में शुक्रवार को करीब 400 लोगों ने पुलिस के अतिरिक्त सहायक आयुक्त (विशेष शाखा) के कार्यालयों, डाक घर में आग लगा दी तथा स्थानीय थाने में तोड़फोड़ की.

पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि भीड़ ने नागरिक हेलीपैड को भी नुकसान पहुंचाया. वैसे किसी के हताहत होने की खबर नहीं है.

सिंह ने कहा, ‘वे समीप के गांधीग्राम इलाके से आए. उनके हाथों में दाओस (धारदार हथियार), लाठियां, तीर-धनुष थे. उन्होंने अपनी मांगें तत्काल माने जाने की मांग करते हुए सरकारी संपत्तियों में आग लगा दी.’

सिंह ने कहा, ‘स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है. चांगलांग के पुलिस अधीक्षक मिहिन गांबो की अगुवाई में करीब 30 पुलिसकर्मी क्षेत्र में कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए डेरा डाले हुए हैं तथा और पुलिस बल भेजे जा रहे हैं.’

उन्होंने बताया कि तिराप, चांगलांग और लोंगडिंग क्षेत्र के उपमहानिरीक्षक किमे कामिंग को हेलीकॉप्टर से विजयनगर पहुंचाया गया जबकि पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था) चुखू अपा के नेतृत्व में एक पुलिस दल रास्ते में है.

उन्होंने कहा, ‘ये वरिष्ठ अधिकारी अगले कुछ दिनों तक विजयनगर में डेरा डालेंगे.’

विजयनगर सड़क मार्ग से अन्य क्षेत्रों से नहीं जुड़ा है और वह तीन ओर से म्यामांर से घिरा है. इन क्षेत्रों में 55 फीसदी जनसंख्या असम राइफल्स के सेवानिवृत कर्मियों की है और बाकी लिसू लोग हैं जिन्हें योबिन जनजाति भी कहा जाता है.

 चांगलांग के डिप्टी कमिश्नर देवेश यादव ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है लेकिन सरकारी संपत्ति का नुकसान हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार, चांगलांग प्रशासन को स्थिति को नियंत्रण में लाने और उपद्रवियों को गिरफ्तार करने के लिए असम राइफल्स की मदद लेनी पड़ी, साथ ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी तत्काल विजयनगर भेजा गया.

इस घटना पर आश्चर्य जताते हुए राज्य के गृह मंत्री बामांग फेलिक्स ने कहा, ‘हमने योबिन स्टूडेंट्स यूनियन की मांगें स्वीकार कर ली थीं और उसी के अनुसार चुनाव टाल दिया गया था. जो भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है. आधुनिक समाज में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)