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मणिपुर पुलिस ने संस्कृत ‘थोपे जाने’ का विरोध कर रहे डीयू के छात्र नेताओं को गिरफ़्तार किया

मणिपुर स्टूडेंट्स एसोसिएशन दिल्ली ने बीते दिनों मणिपुर के कुछ स्कूलों और कॉलेजों में संस्कृत को एक विषय के रूप में पेश करने के सरकार के हालिया फ़ैसले का विरोध किया था, जिसके बाद एसोसिएशन के कार्यकारी सदस्य और डीयू के दो छात्रों को राज्य पुलिस द्वारा गिरफ़्तार कर लिया गया.

(प्रतीकात्मक तस्वीर: वीकिमीडिया कॉमन्स)

(प्रतीकात्मक तस्वीर: विकीमीडिया कॉमन्स)

मणिपुर स्टूडेंट्स एसोसिएशन दिल्ली (एमएसएडी) के खिलाफ एक और दंडात्मक कार्रवाई करते हुए भाजपा के नेतृत्व वाली मणिपुर सरकार ने पिछले हफ्ते छात्र संगठन के दो कार्यकारी सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए एक पुलिस टीम को भेजा था.

मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह सरकार की यह कार्रवाई दिल्ली में छात्रों के निकाय द्वारा जारी एक सार्वजनिक बयान के बाद हुई, जिसमें पूर्वोत्तर राज्य के कुछ स्कूलों और कॉलेजों में संस्कृत को एक विषय के रूप में पेश करने के सरकार के हालिया फैसले का विरोध किया गया है.

दिल्ली विश्वविद्यालय में सत्यवती कॉलेज में ग्रेजुएशन की पढ़ाई करने वाले दोनों छात्र नेता सिंघजीत थॉकचोम और कैनेडी मोइरांगथेम पर धर्म या जाति के तहत विभिन्न समूहों में घृणा, दुश्मनी या घृणा की भावना को बढ़ावा देने (आईपीसी की धारा 153 ए), अपमान और जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने का खतरा (धारा 504), जनता में भय या अशांति पैदा करने का इरादा जो राज्य के खिलाफ या सार्वजनिक शांति के खिलाफ अपराध का कारण बन सकता है (धारा 505-2) और एक आम इरादे से आपराधिक कृत्य हो सकता है (धारा 35) के तहत मामला दर्ज किया गया है.

मणिपुर की स्थानीय अखबारों के अनुसार, गिरफ्तारियां प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के आधार पर की गई थीं, जो प्रांतीय विश्व हिंदू परिषद, मणिपुर, ऑल मणिपुर धर्म रक्षा समिति, ऑल मणिपुर ब्राह्मण संगठन और धर्म रक्षक द्वारा दायर की गई थी.

एमएसएडी महासचिव सिंघजीत और सचिव कैनेडी की गिरफ्तारी 8 दिसंबर को संयुक्त रूप से दिल्ली पुलिस के साथ की गई. रिमांड ट्रांजिट आदेश के लिए उन्हें अगले दिन पटियाला कोर्ट में पेश किया गया.

10 दिसंबर को राज्य पुलिस सिंघजीत और कैनेडी को इंफाल लेकर गई जहां अगले दिन उन्हें राज्य की राजधानी स्थित एक अदालत में पेश किया गया.

इंफाल वेस्ट के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया क्योंकि वे छात्र थे और 13 दिसंबर से उनकी परीक्षाएं शुरू होने वाली थीं.

इंफाल फ्री प्रेस रिपोर्ट में कहा गया, ‘(छात्रों के) वकील ने (न्यायालय को) में कहा कि उन्हें हिरासत में रखने से उनके करियर बर्बाद हो जाएगा. इसके अलावा यह भी कहा गया कि वे पहली बार अपराधी बनाए गए हैं और उनके फरार होने की संभावना लगभग नहीं है क्योंकि वे वर्तमान में बी.कॉम कार्यक्रम की पढ़ाई कर रहे हैं. अदालत ने 11 दिसंबर को दोनों को 20,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत पर रिहा करने की प्रार्थना स्वीकार की.’

रिपोर्ट में कहा गया, ‘अदालत ने उन्हें इन शर्तों के साथ रिहा कर दिया कि वे अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह को धमकी नहीं देंगे या संपर्क नहीं करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पूछताछ के लिए खुद को उपलब्ध कराएंगे, भविष्य में कोई अपराध न करेंगे, अदालत की अनुमति के बिना मणिपुर राज्य को तब तक नहीं छोड़ेंगे जब तक कि मुकदमा खत्म न हो जाए और गवाह या शिकायतकर्ता को धमकाएंगे नहीं.’

20 नवंबर को एमएसएडी द्वारा जारी किए गए सार्वजनिक बयान और कैनेडी द्वारा हस्ताक्षरित किए गए कहा गया, ‘सरकार संस्कृत को थोपने की कोशिश कर अपनी मूर्खता को उजागर कर रही है जो नफरत, छुआछूत, लिंगवाद, वर्चस्व, अराजकतावाद पर आधारित है क्योंकि हम जानते हैं कि उच्च जाति के हिंदू ब्राह्मण क्या हैं. एमएसएडी इसे मणिपुर के लोगों को अकादमिक रूप से और भाषाई रूप से भारत के मणिपुर के खिलाफ उपनिवेशवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखता है.’

बयान में विशेष रूप से राज्य के सवर्ण हिंदू ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया था.

इंफाल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इसमें आगे कहा गया कि मणिपुर के स्वदेशी लोगों द्वारा बोली जाने वाली 30 से अधिक बोलियां हैं जिनमें से अधिकांश विलुप्त होने की कगार पर हैं और उनके अस्तित्व को बचाए रखने के लिए उपाय किए जाने की आवश्यकता है. इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह सरकार इतनी दृष्टिहीन है कि इस तरह की चीजें देखने में सक्षम नहीं है लेकिन अपने औपनिवेशिक गुरु, उच्च जाति के हिंदू ब्राह्मणों के लिए स्वीकार्य होने के लिए आज्ञाकारी है.

इसमें राज्य के शिक्षा मंत्री को ब्राह्मणों के सामने नतमस्तक करार दिया. एक विशेष समुदाय पर तीखे हमले को लेकर लोगों के एक वर्ग द्वारा व्यक्त की गई नाराजगी के जवाब में एमएसएडी ने 30 नवंबर को एक बयान में अपनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए फिर से बयान दिया और इंफाल पुलिस को सूचित किया.

हालांकि, इसके बाद भी गिरफ्तारी के लिए इंफाल से पुलिस दिल्ली आने से नहीं रुकी.

फरवरी 2019 में नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 पर विचारों को लेकर एमएसएडी के सलाहकार थॉकचोम वेवन को मणिपुर पुलिस और दिल्ली पुलिस की एक संयुक्त टीम ने उनके किराए के अपार्टमेंट से गिरफ्तार कर लिया था.

इस गिरफ्तारी पर राज्य में विरोध शुरू हो गया था. उसे रिमांड ट्रांजिट पर इंफाल ले जाया गया था और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, इंफाल ईस्ट की अदालत के समक्ष पेश किया गया था, जिसने उन्हें जमानत दी थी.