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उत्तर प्रदेशः नए धर्मांतरण विरोधी क़ानून के तहत सातवां मामला दर्ज, दिहाड़ी मज़दूर गिरफ़्तार

मामला बिजनौर का है, जहां एक दिहाड़ी मज़दूर अफ़ज़ल को प्रदेश में लागू हुए नए धर्मांतरण विरोधी क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया है. पुलिस ने अफ़ज़ल पर अपहरण का आरोप भी लगाया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत एक और मामला दर्ज किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बिजनौर पुलिस ने सात दिसंबर को कोतवाली इलाके में घर के पास से एक लड़की को अगवा करने के आरोप में 22 साल के मजदूर अफजल को गिरफ्तार किया था.

पुलिस का कहना है कि उन्होंने लड़की को सकुशल बचा लिया है और मेडिकल जांच शुरू की है.

अफजल पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्‍यादेश, 2020 के अलावा अपहरण का आरोप भी लगाया है.

कोतवाली के एसएचओ का कहना है, ‘हमने दिहाड़ी मजदूर अफजल को गिरफ्तार किया और उन्हें बिजनौर की स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया, जिसके बाद से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. मेडिकल जांच के बाद पीड़ित लड़की अपनी रिश्तेदार के साथ रह रही है. मजिस्ट्रेट के समक्ष लड़की के बयान की जांच होनी बाकी है.’

पुलिस का कहना है कि पीड़िता के पिता भी मजदूर हैं और बिजनौर के ही हैं. वह कुछ समय पहले ही अपने परिवार के साथ चंडीगढ़ चले गए थे. परिवार हाल ही में अपने एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए बिजनौर लौटा था.

एसएचओ का कहना है कि आठ दिसंबर को लड़की के पिता ने अफजल पर अपनी बेटी को अगवा करने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी.

इसके दो दिन बाद पुलिस को बिजनौर में लड़की मिली. अफजल को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया था.

मालूम हो कि राज्य में 29 नवंबर से प्रभावी हुए नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत यह सातवां मामला है.

बीते 24 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020’ को मंजूरी दे दी गई थी. सरकार का कहना है कि इस कानून का मक़सद महिलाओं को सुरक्षा देना है.

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 29 नवंबर को इस अध्यादेश को मंजूरी दे दी थी और इसी दिन पुलिस ने बरेली जिले में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत पहला मामला भी दर्ज किया था.

इस अध्यादेश के तहत शादी के लिए छल-कपट, प्रलोभन या बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराए जाने पर अधिकतम 10 साल के कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है.

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य है, जहां लव जिहाद को लेकर इस तरह का क़ानून लाया गया.