भारत

बिहार: कॉन्स्टेबल भर्ती प्रक्रिया से ट्रांसजेंडर समुदाय को बाहर रखने पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए

बिहार हाईकोर्ट ने राज्य में कॉन्स्टेबल पदों के आवेदन के विज्ञापन में थर्ड जेंडर का ज़िक्र न होने को संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए राज्य सरकार को सुधारात्मक कार्रवाई करने और अगले आदेश तक अभ्यर्थियों की अंतिम सूची तय करने की प्रक्रिया स्थगित करने का निर्देश दिया है.

पटना हाईकोर्ट (फोटोः पीटीआई)

पटना हाईकोर्ट (फोटोः पीटीआई)

पटनाः पटना हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि बिहार में चल रही कॉन्स्टेबल भर्ती प्रक्रिया में संविधान के प्रावधान का पालन नहीं किया गया है क्योंकि इसमें ट्रांसजेंडर श्रेणी के लिए आवेदन का कोई प्रावधान नहीं किया गया था.

अदालत ने सोमवार को राज्य सरकार को तुरंत इस मामले को देखने, सुधारात्मक कार्रवाई करने और अगले आदेश तक अभ्यर्थियों की अंतिम सूची तय करने की प्रक्रिया स्थगित करने का निर्देश दिया.

चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस. कुमार की पीठ ने आदेश देते हुए कहा कि आवेदन आमंत्रित कराने के लिए दिया गया विज्ञापन संविधान के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है और इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) कानून, 2019 के तहत आने वाले लोग पद के लिए आवेदन कर सकते हैं या नहीं.

आदेश में कहा गया कि विज्ञापन में योग्यता मानकों में सिर्फ पुरुष और महिला उम्मीदवारों का ही उल्लेख किया गया है और इसमें थर्ड जेंडर का कोई जिक्र नहीं है.

अदालत ने वीरा यादव नाम के शख्स की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.

याचिका में यह कहा गया कि क्या दिव्यांगों की तरह अलग से कोटा के आधार पर ट्रांसजेंडर आवेदकों के लिए भी भर्ती में कोई कोटा तय किया गया है या नही.

अदालत ने इस पर सरकार के वकील की ओर से दी गई सूचना पर संज्ञान लिया कि इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए अलग से कोई आरक्षण नहीं है और उन्हें ओबीसी के तहत प्राप्त आरक्षण ही मिलेगा.

अदालत ने कहा, ‘हमें आरक्षण के संदर्भ में नहीं जाना है लेकिन प्रथमदृष्टया हमें लगता है कि ट्रांसजेंडर समुदाय से जुड़े लोग कॉन्स्टेबल पद के लिए आवेदन देने वाली प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर हैं.’

पीठ ने उम्मीद जताई है कि राज्य भविष्य में इस संदर्भ में उपयुक्त कदम उठाएगा.

अदालत ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि राज्य इस तरह संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाएगा और तुरंत इसका समाधान निकालने की कोशिश करेगा. समान तौर पर राज्य को इस तरह के समुदाय के लोगों तक पहुंच बनाने के लिए अधिक व्यापक रुख अपनाने की जरूरत है ताकि वे इन पदों के लिए आवेदन कर सकें.’

बता दें कि इस मामले में अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होगी.

(समाचार एजेंसी पीटीआई से इनपुट के साथ)