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किसान आंदोलन को देशविरोधी, आतंकी, खालिस्तानी, माओवादियों का समर्थन: गुजरात के उप-मुख्यमंत्री

गुजरात के उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा है कि अगर 50,000 राष्ट्र विरोधी लोग एक साथ आकर अनुच्छेद 370 को निरस्त करने वाले क़ानून को रद्द करने की मांग करते हैं तो क्या हमें संसद से पारित इस अधिनियम को निरस्त करना होगा? अगर 50,000 लोग मांग करते हैं तो क्या हम कश्मीर को पाकिस्तान को दे देंगे?

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल. (फोटो: एएनआई)

गुजरात के उपमुख्यमंत्री नीतिन पटेल. (फोटो: एएनआई)

अहमदाबादः केंद्र सरकार के तीन नए विवादित कृषि कानूनों के विरोध में बीते 26 नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के आंदोलन को गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने खालिस्तानियों और आतंकवादियों को समर्थन बताया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पटेल ने कहा कि अब किसान आंदोलन किसानों का नहीं रहा. इस आंदोलन को राष्ट्रविरोधी तत्वों, आतंकवादियों, खालिस्तानियों, माओवादियों और चीन समर्थित लोगों का समर्थन है.

गुजरात के पंचमहल जिले में किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए नितिन पटेल ने कहा, ‘बातचीत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन बिना किसी चर्चा के कानून को रद्द करने का अड़ियल रुख अख्तियार किया गया है. हम सभी लोकतंत्र में हैं. एक कानून जिसे बहुमत के साथ पारित किया गया और जिसे राष्ट्रपति ने मंजूरी दी. ऐसे में लोकसभा और राज्यसभा की क्या जरूरत है?’

बता दें कि यह किसान सम्मेलन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के बीच किसानों तक पहुंचने का भाजपा के प्रयासों का हिस्सा है.

उन्होंने कहा, ‘अगर 130 करोड़ लोगों में से 50 हजार लोग किसी कानून को रद्द कराने के लिए सड़कों पर आएंगे तो कल अन्य लोग भी आएंगे और सीएए को रद्द करने की मांग करेंगे. देशविरोधी तत्व एकसाथ आएंगे, कश्मीर से आतंकी और पाकिस्तान समर्थक लोग पाकिस्तान की शह पर एकजुट होंगे.’

उप मुख्यमंत्री ने आगे कहा, ‘अगर 50,000 राष्ट्र विरोधी लोग एक साथ आते हैं और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने वाले कानून को रद्द करने की मांग करते हैं तो क्या हमें संसद से पारित इस अधिनियम को निरस्त करना होगा? अगर 50,000 लोग मांग करते हैं तो क्या हम कश्मीर को पाकिस्तान को दे देंगे? अगर 50,000 कम्युनिस्ट एक साथ आकर लद्दाख, चीन को सौंपने को कहते हैं तो क्या हमें ऐसा करना पड़ेगा.’

पटेल ने कहा, ‘मैं युवा पीढ़ी को बताना चाहता हूं कि जब भारत और चीन के बीच पहला युद्ध लड़ा गया था, तब ये कम्युनिस्ट जो किसान आंदोलन में हसिया और हथौड़े के निशान वाले झंडे लिए शामिल हैं, ने चीन का समर्थन किया था. ये खालिस्तानी पंजाब को भारत से अलग करना चाहते हैं.’

उन्होंने कहा, ‘किसानों के नाम पर राष्ट्रविरोधी तत्व, आतंकी, खालिस्तानी, कम्युनिस्ट और चीन समर्थित लोग आंदोलन में घुस आए हैं. हम उन्हें पिज्जा, पकौड़ी खाते देख सकते हैं. ये सब मुफ्त में आ रहा है. देशविरोधी तत्व उन्हें वहां बने रहने के लिए लाखों रुपये दे रहे हैं.’