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उत्तर प्रदेश: नए धर्मांतरण क़ानून के तहत गिरफ़्तार दो भाई जेल से रिहा

मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले के कांठ कस्बे का है. बीते पांच दिसंबर को यहां पुलिस ने नए धर्मांतरण क़ानून के तहत 25 वर्षीय राशिद और उनके भाई को गिरफ़्तार कर लिया था. राशिद को जब पुलिस ने गिरफ़्तार किया उस वक़्त वह अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन करवाने जा रहे थे.

(फोटो साभार: ट्विटर)

(फोटो साभार: ट्विटर)

मुरादाबाद: मुरादाबाद में उत्तर प्रदेश में लागू किए गए धर्म-परिवर्तन से संबंधित नए कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजे राशिद अली और उनके भाई सलीम अली को शनिवार को रिहा कर दिया गया.

यह मामला उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले के कांठ कस्बे का है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस को उनके खिलाफ जबरन धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं मिला. हालांकि उन्हें करीब दो हफ्ते जेल में रहना पड़ा.

बीते पांच दिसंबर को राशिद और सलीम को तब गिरफ्तार किया गया था, जब युवक (राशिद) एक 22 वर्षीय हिंदू युवती पिंकी के साथ किए गए विवाह को रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज कराने पहुंचा था.

जेल के निकलने के बाद युवक ने कहा, ‘मैं क्या कह सकता हूं. हमने सहमति से शादी की थी. मैंने 15 दिन जेल में बिताए. मैं आज बहुत खुश हूं.’

हालांकि, उन्होंने इस बात पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि पुलिस ने धर्मांतरण विरोधी नए कानून का दुरुपयोग किया.

बता दें कि पिंकी और राशिद ने पांच महीने पहले निकाह किया था. पांच दिसंबर को दोनों अपनी शादी का पंजीकरण कराने मुरादाबाद के मैरिज रजिस्ट्रेशन ऑफिस गए थे.

वहां बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोक लिया था और उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन ले गए थे. इस दौरान राशिद और उसके भाई को गिरफ्तार कर लिया गया था.

पिंकी का कहना था कि वे दोनों अपने शादी का रजिस्ट्रेशन कराने जा रहे थे कि रास्ते में पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया था.

इस संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें महिला को बजरंग दल के सदस्यों से यह कहते सुना जा सकता है, ‘मैं बालिग हूं, 22 साल की हूं. मैंने अपनी मर्जी से 24 जुलाई को शादी की थी. यह हमारी शादी का पांचवां महीना है.’

हालांकि, वीडियो में बजरंग दल के लोग उत्तर प्रदेश के नए धर्मांतरण कानून के बारे में बात कर रहे थे.

पुलिस का कहना था कि पिंकी तीन महीने की गर्भवती है और उसके पास अपनी शादी का कोई प्रमाण नहीं था. युवती के परिजनों ने शिकायत की थी कि राशिद ने जबरन उनकी बेटी का धर्म परिवर्तन कराया है.

वहीं, पिंकी ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान में कहा था कि उसका जन्म 1998 में हुआ था और वह वयस्क हैं.

मुरादाबाद के पुलिस अधीक्षक विद्यासागर मिश्रा ने कहा था, ‘लड़की ने मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने बयान में कहा है कि उसका जन्म 1998 में हुआ था और उसने और राशिद ने देहरादून में 24 जुलाई को निकाह किया था.’

पिंकी को पहले मुरादाबाद पुलिस के एक नारी निकेतन में रखा गया था, लेकिन बाद में मजिस्ट्रेट ने रिहा कर दिया था.

इसके बाद उन्होंने आरोप लगाया था कि एक सरकारी डॉक्टर ने उन्हें गर्भपात के लिए इंजेक्शन दिया था. हालांकि सरकारी डॉक्टरों और पुलिस ने इससे इनकार किया था.

उन्हें बीते कुछ दिनों में पेटदर्द, ब्लीडिंग और स्पॉटिंग के कारण दो बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

बता दें कि राशिद के खिलाफ दर्ज मामला उत्तर प्रदेश में 29 नवंबर से लागू धर्म परिवर्तन विरोधी कानून के तहत दर्ज पांचवां मामला था.

इससे पहले बरेली में 21 साल के युवक को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था.

वहीं, सात और लोगों को गिरफ्तार किया गया और सीतापुर में आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया. मऊ में 14 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया.

इसके साथ ही पेशे से मजदूर नदीम के खिलाफ 29 नवंबर को मुजफ्फरनगर के मंसूरपुर पुलिस थाने में महिला के पति की शिकायत पर धर्मांतरण विरोधी कानून और आईपीसी की धारा 120बी, 506 और 504 के तहत मामला दर्ज किया गया था. शिकायतकर्ता ने नदीम पर उसकी पत्नी से शादी करने और उसका धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया था.

हालांकि, शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह कहते हुए नदीम की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी कि महिला और पुरुष दोनों वयस्क हैं और ये उनकी निजता का मौलिक अधिकार है.

बता दें कि बीते 24 नवंबर को उत्तर प्रदेश सरकार तथाकथित ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए शादी के लिए धर्म परिवर्तन पर लगाम लगाने के लिए ‘उत्‍तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्‍यादेश, 2020’ ले आई थी.

इसमें विवाह के लिए छल-कपट, प्रलोभन देने या बलपूर्वक धर्मांतरण कराए जाने पर विभिन्न श्रेणियों के तहत अधिकतम 10 वर्ष कारावास और 50 हजार तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है. उत्तर प्रदेश पहला ऐसा राज्य है, जहां लव जिहाद को लेकर इस तरह का कानून लाया गया है.

प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 28 नवंबर को इस अध्यादेश को मंजूरी दी थी. इसी दिन एक युवती के पिता की शिकायत पर बरेली जिले में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत अपना पहला मामला दर्ज किया गया था.

हालांकि इस मामले में यह भी आरोप लगा है कि पुलिस के दबाव में आकर यह केस दर्ज कराया गया था.