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किसानों ने एक दिन की ‘क्रमिक’ भूख हड़ताल की, 25-27 दिसंबर को हरियाणा में टोल वसूली रोकेंगे

केंद्र के तीन कृषि क़ानूनों के विरोध में हज़ारों की संख्या में किसान बीते 27 नवंबर से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं. केंद्र की मोदी सरकार के साथ उनकी कई दौर की बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकाला है.

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर डटे किसान. (फोटो: पीटीआई)

दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर डटे किसान. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: हरियाणा और उत्तर प्रदेश से लगी दिल्ली की सीमाओं पर केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करे रहे किसानों ने कड़ाके की ठंड के बीच सोमवार सुबह एक दिन की ‘क्रमिक’ भूख हड़ताल शुरू की.

किसान नेताओं के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे किसान अलग-अलग समूहों में भूख-हड़ताल करेंगे और पहले समूह में 11 लोग होंगे.

दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर हजारों की संख्या में किसान बीते करीब चार हफ्ते से प्रदर्शन कर रहे हैं और नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं.

स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव ने सिंघू बॉर्डर पर संवाददाता सम्मेलन में रविवार को कहा था, ‘सोमवार को किसान नए कृषि कानूनों के खिलाफ सभी प्रदर्शन स्थलों पर एक दिन की क्रमिक भूख हड़ताल करेंगे. इसकी शुरुआत सिंघू बॉर्डर समेत यहां प्रदर्शन स्थलों पर 11 सदस्यों का एक दल करेगा.’

उन्होंने कहा था, ‘हम देशभर में सभी प्रदर्शन स्थलों पर मौजूद सभी लोगों से इसमें भाग लेने की अपील करते हैं.’

प्रदर्शन के मद्देनजर कई मार्ग बंद हैं और दिल्ली यातायात पुलिस लोगों को बंद और खुले मार्गों की समय-समय पर जानकारी दे रही है.

यातायात पुलिस ने सोमवार को ट्वीट किया कि सिंघू, औचंदी, प्याऊ मनियारी, सबोली और मंगेश बॉर्डर बंद हैं. लोगों से लामपुर, सफियाबाद और सिंघू स्कूल टोल टैक्स बार्डर से होकर वैकल्पिक मार्ग पर जाने को कहा गया है.

पुलिस ने बताया कि मुकरबा तथा जीटीके रोड से यातायात परिवर्तित किया गया है, इसलिए लोग आउटर रिंग रोड, जीटीके रोड और एनएच-44 पर जाने से भी बचें.

उनके अनुसार, हरियाणा जाने के लिए झाड़ोदा (वन सिंगल कैरिजवे), दौराला, कापसहेड़ा, रजोकरी एनएच-8, बिजवासन/ बजघेड़ा, पालम विहार और डूंडाहेड़ा बॉर्डर खुले हैं.

दिल्ली यातायात पुलिस ने ट्वीट किया, ‘टिकरी, ढांसा बॉर्डर भी यातायात के लिए बंद हैं. झटीकरा बॉर्डर केवल एक या दो-पहिया वाहन और राहगिरों के लिए खुला है.’

उनके अनुसार, ‘चिल्ला बॉर्डर केवल दिल्ली से नोएडा जाने वाले लोगों के लिए खुला है. नोएडा से दिल्ली आने वाला मार्ग बंद है.’

मालूम हो कि केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कृषि से संबंधित तीन विधेयकों– किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020, किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020- के विरोध में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं.

बीते 27 सितंबर को राष्ट्रपति ने इन विधेयकों को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद से पंजाब में किसान लगातार इसके विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. किसानों ने बीते 26 नवंबर से ‘दिल्ली चलो मार्च’ से का आह्वान किया था, लेकिन उन्हें दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर रोक दिया गया था.

अगले दिन 27 नवंबर को केंद्र सरकार ने किसानों को दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति दे दी, लेकिन किसानों ने दिल्ली की सीमाओं पर ही प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया और तभी से पंजाब, हरियाणा और अन्य जगहों के हजारों आंदोलनकारी किसान सिंघू, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर डटे हुए हैं.

किसानों को इस बात का भय है कि सरकार इन अध्यादेशों के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने की स्थापित व्यवस्था को खत्म कर रही है और यदि इसे लागू किया जाता है तो किसानों को व्यापारियों के रहम पर जीना पड़ेगा.

दूसरी ओर केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली मोदी सरकार ने बार-बार इससे इनकार किया है. सरकार इन अध्यादेशों को ‘ऐतिहासिक कृषि सुधार’ का नाम दे रही है. उसका कहना है कि वे कृषि उपजों की बिक्री के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था बना रहे हैं.

किसानों ने बीते 14 दिसंबर को भी एक दिन की भूख हड़ताल की थी.

25-27 दिसंबर को हरियाणा में टोल वसूली रोकेंगे

केंद्र के नए कृषि कानूनों के विरोध में अपने आंदोलन को तेज करते हुए किसानों ने रविवार को घोषणा की थी कि वे 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में सभी राजमार्गों पर टोल वसूली नहीं करने देंगे.

उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा था कि किसान आंदोलन को ‘बिना अवरोध के’ चलने देना चाहिए और यह अदालत इसमें दखल नहीं देगी, क्योंकि प्रदर्शन का अधिकार मौलिक अधिकार है.

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाला ने बताया कि किसान 25 से 27 दिसंबर तक हरियाणा में सभी राजमार्गों पर टोल वसूली नहीं करने देंगे.

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘25 से 27 तक हरियाणा में सभी टोल बूथ पर हम टोल वसूली नहीं होने देंगे, हम उन्हें ऐसा करने से रोकेंगे. 27 दिसंबर को हमारे प्रधानमंत्री अपने ‘मन की बात’ करेंगे और हम लोगों से अपील करना चाहते हैं कि उनके भाषण के दौरान ‘थालियां’ पीटें.’

संवाददाता सम्मेलन में किसान नेता और भाकियू के वरिष्ठ सदस्य राकेश टिकैत ने कहा कि नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान 23 दिसंबर को किसान दिवस मनाएंगे. उन्होंने कहा, ‘हम लोगों से अनुरोध करते हैं कि इस दिन वे दोपहर का भोजन न पकाएं.’

प्रदर्शनकारी किसानों ने इससे पहले रविवार दिन में आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों को श्रद्धांजलि दी और उनकी स्मृति में मोमबत्तियां भी जलाईं.

ऑल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) ने अनेक व्यापारी संगठनों को पत्र लिखकर उनसे किसानों के आंदोलन को समर्थन देने का अनुरोध किया है.

सरकार ने किसान संगठनों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया

बीते रविवार को केंद्र सरकार ने प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया और कहा कि वे इसकी तिथि तय करें. सरकार ने कहा है कि कृषि कानूनों में पहले जिन संशोधनों का प्रस्ताव दिया गया था, उन्हें लेकर जो चिंताएं हैं, संगठन वे भी बताएं.

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल ने इस संदर्भ में किसानों के 40 संगठनों को पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि केंद्र किसानों की सभी चिंताओं का उचित समाधान निकालने की खातिर खुले मन से हरसंभव प्रयास कर रहा है.

उल्लेखनीय है कि किसानों से वार्ता के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में मंत्रिस्तरीय एक समिति गठित की थी. केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल तथा वाणिज्य राज्य मंत्री सोमप्रकाश इसके सदस्य हैं.

सरकार से किसानों की अब तक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है जो विफल रही है. किसानों के संगठनों की एक बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ भी बैठक हो चुकी है, लेकिन उसका नतीजा भी शून्य रहा है.

अग्रवाल ने कहा कि सरकार नई दिल्ली के विज्ञान भवन में अगली बैठक बुलाना चाहती है ताकि प्रदर्शन जल्द से जल्द समाप्त हों.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों के समाधान के लिए खुले मन से हरसंभव प्रयास कर रही है.

अग्रवाल ने कहा कि नौ दिसंबर को भेजे गए मसौदा प्रस्ताव में सरकार ने कम से कम सात मुद्दों पर आवश्यक संशोधन करने का प्रस्ताव दिया है जिसमें वर्तमान एमएसपी को जारी रखने के बारे में ‘लिखित आश्वासन’ की बात भी शामिल है.

लेकिन संगठनों ने वह प्रस्ताव खारिज कर दिया था. इसकी जानकारी क्रांतिकारी किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष दर्शन पाल ने 16 दिसंबर को ईमेल के जरिये दी थी.

हालिया पत्र पाल को भी भेजा गया है.

इसमें अग्रवाल ने कहा कि किसान संगठनों द्वारा सरकार के मसौदा प्रस्ताव पर दिया गया जवाब ‘बहुत ही संक्षिप्त’ था.

पत्र में कहा गया कि जवाब में मसौदा प्रस्ताव खारिज करने की कोई विशेष वजह नहीं बताई गई है तथा ‘यह स्पष्ट नहीं है कि उक्त विचार आपके (पाल) के थे या फिर सभी संगठनों के.’

यह पत्र ऐसे दिन लिखा गया है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एक या दो दिन में प्रदर्शनकारी समूहों से उनकी मांगों पर बातचीत कर सकते हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)