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एनडीटीवी के प्रवर्तक सेबी द्वारा 27 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश के ख़िलाफ़ अपील करेंगे

पूंजी बाज़ार नियामक सेबी ने एनडीटीवी के प्रवर्तक प्रणय और राधिका रॉय और प्रवर्तक समूह कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड कुछ क़र्ज़ समझौतों के बारे में शेयरधारकों से कथित तौर पर खुलासा नहीं किए जाने के कारण 27 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.

Prannoy-Roy-NDTV

नई दिल्ली: एनडीटीवी के प्रवर्तक प्रणय और राधिका रॉय और प्रवर्तक समूह कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड पूंजी बाजार नियामक सेबी के आदेश के खिलाफ अपील करेंगे. सेबी ने उन पर कुछ कर्ज समझौतों के बारे में शेयरधारकों से कथित तौर पर खुलासा नहीं किए जाने के कारण 27 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.

आरआरपीआर होल्डिंग्स नई दिल्ली टेलीविजन लिमिटेड (एनडीटीवी) की एक प्रमोटर इकाई है.

सेबी ने कंपनी पर सूचीबद्धता और प्रतिभूतियों से जुड़े विभिन्न नियमों के उल्लंघन को लेकर यह जुर्माना लगाया है. इसमें कुछ कर्ज समझौतों के बारे में शेयरधारकों से जानकारी को छुपाने का भी आरोप है.

सेबी का कहना है कि कुछ ऋण समझौतों में ऐसे प्रावधान हैं, जिनका एनडीटीवी शेयरधारकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

एनडीटीवी ने बृहस्पतिवार शाम को शेयर बाजारों को भेजी गई सूचना में कहा है कि एनडीटीवी के संस्थापक और प्रवर्तक प्रणय रॉय और राधिका रॉय तथा कंपनी की प्रवर्तक कंपनी आरआरपीआर होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड ने बार-बार यह कहा है कि उन्होंने किसी भी लेन-देन अथवा समझौते के जरिये प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से एनडीटीवी का नियंत्रण हस्तांतरित करने की अनुमति नहीं दी है.

उनकी ओर से कहा है कि 24 दिसंबर को सेबी की ओर से उनके खिलाफ जारी आदेश तथ्यों का गलत तरीके से मूल्यांकन पर आधारित है.

दी गई सूचना में कहा गया है कि वह एनडीटीवी की चुकता शेयर पूंजी में अब भी 61.45 प्रतिशत हिस्सेदारी के धारक हैं.

सेबी के बृहस्पतिवार को पारित आदेश के बारे में इसमें कहा गया है कि कंपनी के प्रवर्तक और प्रवर्तक समूह कंपनी आदेश के खिलाफ ‘तुरंत अपील’ करेगी.

सेबी का आदेश कंपनी के संस्थापकों और प्रवर्तक कंपनी समूह द्वारा 2008-2010 के दौरान विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड और आईसीआईसीआई बैंक के साथ किए गए कर्ज समझौतों के बारे में कथित तौर पर खुलासा नहीं किए जाने पर आधारित है.

एनडीटीवी द्वारा शेयर बाजारों को भेजी सूचना में यह भी कहा गया है कि कंपनी का नियंत्रण कथित तौर पर छोड़ दिए जाने का मामला अभी प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण में लंबित है. इस मामले में न्यायाधिकरण ने 2019 में एनडीटीवी संस्थापकों के पक्ष में स्थगन दिया हुआ है. यह स्थगन अभी भी लागू है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी की ओर से कहा गया है कि उसकी जांच 2017 में क्वांटम सिक्योरिटीज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से मिली शिकायत के बाद शुरू होती है, जो एनडीटीवी की एक शेयरधारक कंपनी है. शिकायत में कहा गया था कि विश्वप्रधान कॉमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (वीसीपीएल) के साथ ऋण समझौतों के बारे में शेयरधारकों से जानकारी छिपाकर नियमों का उल्लंघन किया गया है.

एक ऋण समझौता आईसीआईसीआई बैंक और दो ऋण समझौते वीसीपीएल के साथ किए गए थे.

सेबी के अनुसार, आईसीआईसीआई के कर्ज को चुकाने के लिए वीसीपीएल के साथ 350 करोड़ रुपये का एक ऋण समझौता साल 2009 में किया गया था. इसके एक साल बाद वीसीपीएल के साथ 53.85 करोड़ रुपये का दूसरा ऋण समझौता किया गया था.

27 करोड़ रुपये के जुर्माने से संबंधित अपने 52 पेज के आदेश में सेबी ने कहा है कि ये ऋण समझौते नियम और शर्तों के साथ थे, जो एनडीटीवी की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते थे.

ऋण समझौते की एक शर्त वीसीपीएल को अप्रत्यक्ष रूप से आरडीपीआर होल्डिंग के इक्विटी शेयरों में वारंट के रूपांतरण के माध्यम से एनडीटीवी की 30 प्रतिशत शेयरधारिता हासिल करने की अनुमति देती थी.

ऋण समझौतों को इस तरह से बनाया गया था, जो एनडीटीवी से संबंधित विभिन्न मामले, जो कि भौतिक और मूल्य संवेदनशील जानकारी थी, को शेयरधारकों से छुपाए जाने के लिए पाबंद करती थी.

प्रणय और राधिका रॉय ने तर्क दिया है कि इन समझौतों में एनडीटीवी पार्टी नहीं थी, इसलिए स्टॉक एक्सचेंजों को इन समझौतों की जानकारी देने की उन्हें आवश्यकता नहीं थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)