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उत्तर प्रदेश: धर्मातरण रोधी क़ानून के तहत एक महीने में 14 केस दर्ज, 51 लोग गिरफ़्तार

इन 14 दर्ज मामलों में से 13 में आरोप लगाया गया है कि हिंदू महिला को इस्लाम क़बूलने के लिए मजबूर किया गया है. इसमें से सिर्फ़ दो मामलों में ही संबंधित महिला ने शिकायत दर्ज कराई है, बाकी के 12 मामलों में लड़की के परिजनों ने केस दर्ज कराया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा तथाकथित लवजिहाद को रोकने के नाम पर लाए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को एक महीना बीत गया है.

इस दौरान राज्य में कई सारे ऐसे मामले देखने को मिले जहां पुलिस प्रशासन द्वारा इस कानून के तहत हिंदू-मुस्लिम दंपत्ति को प्रताड़ित किया गया, कई सारी गिरफ्तारियां हुईं और कट्टरवादी हिंदू संगठनों ने ऐसे युवक-युवतियों एवं उनके परिजनों को डराने-धमकाने के भी मामले सामने आए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक उत्‍तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्‍यादेश, 2020 लाने के बाद से राज्य में 14 केस दर्ज किए गए और 51 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें से 49 अभी जेल में हैं.

इन 14 मामलों में से 13 में आरोप लगाया गया है कि हिंदू महिला को इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया गया है. इसमें से सिर्फ दो मामलों में ही संबंधित महिला ने शिकायत दर्ज कराई है, बाकी के 12 मामलों में लड़की के परिजनों ने केस दर्ज कराया है.

इसमें से दो केस में कट्टरवादी हिंदू कार्यकर्ताओं ने हस्तक्षेप किया है और पुलिस स्टेशन के सामने नारेबाजी की थी. एक को छोड़कर बाकी सभी मामलों में लड़की बालिग है. इसी तरह आठ मामलों में हिंदू-मुस्लिम युवक-युवती या तो दोस्त थे या फिर ‘रिलेशनशिप’ में थे. वहीं एक युवक-युवती ने दावा किया है कि उन्होंने पहले से ही शादी कर ली थी.

इनमें से एक केस में कथित तौर पर गैरकानूनी ढंग से ईसाई धर्म में परिवर्तन कराने का आरोप है. इसे लेकर आजमगढ़ में तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज है.

दो मामलों में महिलाओं, जिनकी अन्य से शादी हो चुकी है, ने ‘सामाजिक दबाव’ के चलते अपना बयान दर्ज कराने से इनकार कर दिया है. इसके अलावा दो अन्य मामलों में महिलाओं ने बलात्कार का आरोप लगाया है. कथित तौर पर धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर की गईं महिलाओं में से तीन लोग दलित हैं.

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में इस तरह के तीन मामले और शहाजहांपुर में दो मामले दर्ज किए गए हैं. बाकी के केस बरेली, मुजफ्फरनगर, मऊ, सीतापुर, हरदोई, एटा, कन्नौज, आजमगढ़ और मुरादाबाद जिलों के हैं. एक मामले में पुलिस महिला का पता लगाने में असमर्थ रही है.

अध्‍यादेश के लागू होने के ठीक एक दिन बाद बरेली के देवरनिया थाने में पहला मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमें लड़की के पिता टीकाराम राठौर ने शिकायत की कि उवैश अहमद (22) ने उनकी बेटी से दोस्‍ती करने की कोशिश की और धर्म परिवर्तन के लिए जबरन दबाव बनाया और लालच देने की कोशिश की.

बरेली की देवरनिया पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद तीन दिसंबर को उवैश अहमद को गिरफ्तार कर लिया. हालांकि इस मामले में यह आरोप लगा है कि पुलिस के दबाव में यह केस दर्ज कराया गया था.

इसी तरह लखनऊ पुलिस ने राजधानी में एक अंतरधार्मिक विवाह रोक दिया था और दंपति से पहले कानूनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कहा गया था.

मुजफ्फरनगर जिले में नदीम और उनके साथी को छह दिसंबर को एक विवाहित हिंदू महिला को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. हालांकि बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में यूपी पुलिस को कोई कठोर कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था.

मुरादाबाद में धर्मांतरण विरोधी अध्यादेश के तहत गिरफ्तार किए गए दो भाइयों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत ने रिहा कर दिया था.

दो भाइयों- राशिद और सलीम को चार दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था. राशिद एक हिंदू महिला से अफनी शादी के लिए मुरादाबाद के रजिस्ट्रार ऑफिस गए थे.

वहीं, शबाब खान उर्फ राहुल (38) को तीन दिसंबर को मऊ जिले में पुलिस ने गिरफ्तार किया और उन पर और उनके 13 सहयोगियों पर कथित तौर पर 27 साल की एक युवती को अगवा करने के लिए मामला दर्ज किया गया है.

आरोप है कि 30 नवंबर को युवती की शादी थी और उसी शाम को धर्म परिवर्तन के इरादे से युवती का अपहरण किया गया.

सीतापुर जिले के तंबोर पुलिस थाने में 22 साल के जुबरैल और उसके परिवार के पांच सदस्यों एवं दो स्थानीय लोगों के खिलाफ 19 साल की एक लड़की को अगवा करने और उसका धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई. जुबरैल को छोड़कर सभी को पांच दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था.

बिजनौर में 22 साल के मजदूर अफजल को कथित तौर पर एक लड़की को उसके घर से अगवा करने के लिए 13 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया.

इसी तरह 18 साल की एक लड़की ने 11 दिसंबर को हरदोई जिले के शाहबाद पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी कि शादी का झांसा देकर उसका बलात्कार किया गया और उस पर शादी का दबाव डाला गया.

लड़की का आरोप है कि मोहम्मद आजाद दिल्ली में उसे बेच भी रहा था. आजाद पर यूपी के धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत बलात्कार, मानव तस्करी का मामला दर्ज किया गया. वह 16 दिसंबर से जेल में बंद है.

लव जिहाद हिंदूवादी संगठनों द्वारा इस्तेमाल में लाई जाने वाली शब्दावली है, जिसमें कथित तौर पर हिंदू महिलाओं को जबरदस्ती या बहला-फुसलाकर उनका धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम व्यक्ति से उसका विवाह कराया जाता है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जौनपुर में भाजपा की एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मुस्लिमों को चेताते हुए कहा कि जो लोग अपनी पहचान छिपाकर लव जिहाद करते हैं, उनकी राम नाम सत्य है कि यात्रा निकलने वाली है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 27 नवंबर को ‘उत्‍तर प्रदेश विधि विरूद्ध धर्म संपविर्तन प्रतिषेध अध्‍यादेश, 2020’ को मंजूरी दी थी.

इस अध्यादेश के तहत शादी के लिए छल-कपट, प्रलोभन या बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराए जाने पर अधिकतम 10 साल के कारावास और जुर्माने की सजा और 15,000 रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है, जबकि नाबालिगों और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिला के मामले में तीन से 10 वर्ष तक की कैद और 25,000 रुपये जुर्माने की होगी.

इसके अलावा सामूहिक धर्म परिवर्तन के संबंध में तीन से दस साल तक की कैद और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है.