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उत्तराखंडः अंतर धार्मिक​ ​विवाह के तीन महीने बाद पति-पत्नी और काज़ी समेत चार के ख़िलाफ़ केस

उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता क़ानून 2018 लागू होने के बाद से राज्य में तथातकथित धर्म परिवर्तन का यह पहला मामला है. मामला तब सामने आया जब मुस्लिम युवक ने हाईकोर्ट में सुरक्षा की गुहार लगाई थी. मुस्लिम महिला द्वारा धर्म परिवर्तन कर विवाह करने के एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने पति-पत्नी को सुरक्षा देने का पुलिस को निर्देश दिया है.

उत्तराखंड हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक)

उत्तराखंड हाईकोर्ट. (फोटो साभार: फेसबुक)

देहरादूनः उत्तराखंड पुलिस ने एक अंतर धार्मिक मामले में विवाह के करीब तीन महीने बाद राज्य के धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2018 के प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप में बीते मंगलवार को पति पत्नी और काजी समेत चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

ये मामला तब सामने आया था, जब मुस्लिम युवक शादी के बाद सुरक्षा के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इसकी जांच करने की जिम्मेदारी पुलिस को सौंपी गई तो पुलिस ने कथित तौर पर धार्मिक स्वतंत्रता कानून के उल्लंघन का हवाला देते हुए अपीलकर्ता पक्ष के खिलाफ ही केस दर्ज कर दिया.

वहीं उत्तराखंड में ही हुए एक अन्य मामले एक मुस्लिम युवती ने धर्म परिवर्तन कर हिंदू युवक से विवाह के बाद हाईकोर्ट से सुरक्षा की गुहार लगाई तो उन्हें सुरक्षा प्रदान कर दी गई है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि एक महिला ने कानून के प्रावधानों का पालन किए बिना इस साल सितंबर महीने में मुस्लिम युवक से शादी करने के लिए इस्लाम अपना लिया था.

महिला, उसके पति, पति के एक संबंधी और धर्मांतरण कराने वाले काजी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

उत्तराखंड धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2018 कानून लागू होने के बाद से उत्तराखंड में तथातकथित धर्म परिवर्तन का यह पहला मामला है.

महिला उनके पति समीर अली, उनके संबंधी शौकीन और काजी मुफ्ती सलीम अहमद के खिलाफ देहरादून के पटेल नगर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है.

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला इस साल उस समय सामने आया, जब समीर ने सुरक्षा प्रदान कराने के लिए नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की.

इसके बाद अदालत ने देहरादून जिला मजिस्ट्रेट को मामले की जांच के निर्देश दिए और सर्किल ऑफिसर (सदर) अनुज कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई.

पुलिस विज्ञप्ति के मुताबिक, ‘समीर की लगभग डेढ़ साल पहले देहरादून में ट्यूशन क्लासेस के दौरान महिला से मुलाकात हुई थी. उस समय वह 21 साल के थे, जबकि महिला की उम्र 19 साल थी.’

पुलिस के मुताबिक, दोनों ने आपसी सहमति से इस साल शादी करने का फैसला किया और धर्मांतरण के लिए काजी मुफ्ती सलीम अहमद से संपर्क किया, जिन्होंने महिला का धर्मांतरण कराया और तय प्रकिया का पालन किए बिना महिला को दिए गए नए नाम से संबंधित प्रमाण-पत्र जारी कर दिया.

पुलिस की जांच के मुताबिक, उसी दिन 29 सितंबर को काजी ने समीर के अंकल शौकीन की मौजूदगी में निकाह कराया.

सर्किल ऑफिसर अनुज कुमार का कहना है, ‘यह पता चला कि समीर, महिला, काजी और शौकीन ने धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2018 का उल्लंघन किया है. इस आधार पर उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया.’

कुमार ने कहा कि महिला के माता-पिता को जानकारी दिए बिना यह निकाह हुआ.

उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम की धारा तीन, आठ और 12 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

उच्च न्यायालय ने अंतरधार्मिक विवाह करने वाले दंपति को सुरक्षा देने को कहा

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हरिद्वार प्रशासन से अंतर धार्मिक विवाह करने वाले एक दंपति को सुरक्षा प्रदान करने को कहा है.

16 दिसंबर को शादी करने वाले दंपति ने पत्नी के परिवार की तरफ से नुकसान की आशंका जताते हुए अदालत से दखल देने की मांग की थी.

पिछले सप्ताह दंपति से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करने के बाद उच्च न्यायालय के जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस रविंद्र मैठाणी की पीठ ने हरिद्वार के जिलाधिकारी को उन्हें सुरक्षा प्रदान करने को कहा है.

पत्नी की इस शिकायत पर कि उसकी हिंदुत्व में धर्मांतरण की अर्जी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, न्यायालय ने जिलाधिकारी से कहा कि अगर अर्जी पर कार्रवाई की गई है तो अदालत को उसकी तिथि बताई जाए.

इस मामले पर अगली सुनवाई मार्च 2021 में होगी.

पत्नी ने हरिद्वार के जिलाधिकारी को अपना धर्म इस्लाम से बदलकर हिंदू करने के लिए नोटिस दिया था.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, न्याय के हित और सुप्रीम कोर्ट द्वारा लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश सरकार और एस. खुशबू बनाम कन्निआम्मल मामले में दिए गए फैसले के आलोक में हाईकोर्ट ने पति पत्नी को अंतरित राहत के तहत सुरक्षा देने के लिए पुलिस को निर्देश दिया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)