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उत्तर प्रदेश: बदायूं में महिला की सामूहिक बलात्कार के बाद मौत, लापरवाही पर थानाध्यक्ष निलंबित

उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले की घटना. आरोप है कि तीन जनवरी की शाम महिला मंदिर में पूजा करने गई थी, जहां उसका सामूहिक बलात्कार किया गया. कांग्रेस ने इस घटना की तुलना निर्भया मामले से करते हुए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की निंदा की है.

Hathras: Police personnel stand guard as CBI officials (unseen) investigate the case of a 19-year-old Dalit woman who died after being allegedly gang-raped, in Hathras, Tuesday, Oct. 13, 2020. (PTI Photo)(PTI13-10-2020 000190B)

(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

बदायूं/लखनऊ: बीते तीन जनवरी को उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में मंदिर में पूजा करने गईं एक पचास साल की आंगनबाड़ी सहायिका के साथ सामूहिक बलात्कार का मामला सामने आया है. महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई है.

इस मामले में मंदिर के महंत समेत तीन लोगों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार और हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है. दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक फरार है. घटना जिले के उघैती क्षेत्र में हुई है.

आरोप है कि तीन जनवरी की शाम महिला मंदिर में पूजा करने गई थीं. इस दौरान मंदिर में मौजूद महंत सत्यनारायण, चेला वेदराम व ड्राइवर जसपाल ने महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया और तीन जनवरी की रात ही आरोपी अपनी गाड़ी से महिला को उसके घर के सामने फेंककर फरार हो गए.

बदायूं के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा ने बुधवार को बताया कि तीन जनवरी को उघैती थाना क्षेत्र के एक गांव में मंदिर गईं 50 वर्षीय एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. परिजन ने मंदिर के महंत सत्य नारायण और उसके दो साथियों पर बलात्कार और हत्या का आरोप लगाया है. इस आधार पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनमें से वेद राम और जसपाल को मंगलवार रात गिरफ्तार कर लिया गया.

उन्होंने बताया कि आरोपी महंत फरार है. उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की चार टीम गठित की गई है. संकल्प शर्मा ने बताया कि इस मामले में लापरवाही बरतने पर वहां के थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है.

पीड़ित परिवार का आरोप है की आरोपी खून से लथपथ महिला को उसके घर छोड़कर फरार हो गए. महिला का बहुत खून बह रहा था, बाद में जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.

मृतक महिला के बेटे ने बताया कि उसकी मां पिछले रविवार की शाम गांव के ही मंदिर में पूजा करने गई थी. रात करीब 11 बजे मंदिर का महंत दो अन्य लोगों के साथ उनके घर आया और उसकी मां का शव रख दिया.

लड़के के मुताबिक, घर के लोग महंत सत्य नारायण और उसके साथ आए लोगों से कुछ पूछ पाते, उससे पहले ही वे यह कहकर चले गए कि मंदिर से घर लौटते समय महिला रास्ते में स्थित एक सूखे कुएं में गिर गई थी. उसकी चीख-पुकार सुनकर उन्होंने उसे कुएं से बाहर निकाला और उसे घर लेकर आए हैं.

लड़के का कहना है कि पुलिस को घटना की सूचना सोमवार की सुबह दी गई थी.

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में महिला के प्राइवेट पार्ट में रॉड जैसी चीज डालने की पुष्टि हुई है. महिला के शरीर पर चोट के गंभीर निशान भी मिले हैं. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पसली, पैर और फेफड़े भी क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि हुई है.

जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर यशपाल सिंह का कहना है कि महिला की मौत सदमे और अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से हुई है.

घटना को निर्भया कांड जैसा बताया जा रहा है. इस बारे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर मेडिकल विशेषज्ञों से राय ली जा रही है, उससे पहले इसे किसी भी घटना से जोड़ना गलत होगा.

मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है. चार जनवरी को मामला दर्ज होने के बाद भी महिला के शव का पोस्टमॉर्टम नहीं कराया गया. शव का पोस्टमॉर्टम पांच जनवरी को हुआ, तब तक घटना के करीब 48 घंटे बीत चुके थे.

गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में लापरवाही बरतने व घटना को दबाने के मामले में थानाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह को एसएसपी संकल्प शर्मा ने निलंबित कर दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार, थानाध्यक्ष ने पुलिस के आलाधिकारी को गुमराह करते हुए बताया था कि महिला की कुएं में गिरने से मौत हुई है, लेकिन ग्रामीणों व परिजनों के हंगामे के बाद थानाध्यक्ष की लापरवाही उजागर हुई.

संबंधित पुलिस थाने में तीनों आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376डी (गैंगरेप) और 302 (हत्या) की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है.

बुधवार को बदायूं के जिला मजिस्ट्रेट प्रशांत कुमार ने बताया, ‘मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. अन्य आरोपी व्यक्ति की गिरफ्तारी के लिए एक टीम का गठन किया गया है.’

कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘महिला आंगनवाड़ी सहायिका थी. उसके परिवार को हम हरसंभव मदद देंगे. हम परिवार की सुरक्षा पर ध्यान दे रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमारा मानना है कि यह घटना राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत जांच के लिए उपयुक्त है और हम ऐसा करेंगे.’

विपक्ष ने घटना की तुलना निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड से की

विपक्षी दलों ने इस घटना को ‘निर्भया कांड’ से जोड़ते हुए प्रदेश सरकार को घेरा है. इस बीच उत्तर प्रदेश की कांग्रेस इकाई ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधते हुए इस मामले की तुलना दिल्ली के निर्भया गैंगरेप हत्याकांड से की.

पार्टी ने ट्वीट कर कहा, ‘हाथरस की नाकामी को छिपाने के लिए शुरू हुआ आदित्यनाथ का मिशन शक्ति फेल हो गया. बदायूं में महिला के साथ निर्भया जैसी हैवानियत की गई. मिशन शक्ति चलाकर प्रदेश की महिलाओं के साथ धोखा करने वाले मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए.’

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने इस घटना की हाथरस कांड से तुलना करते हुए सरकार को घेरा और ट्वीट किया, ‘हाथरस में सरकारी अमले ने शुरुआत में फरियादी की नहीं सुनी. सरकार ने अफसरों को बचाया और आवाज को दबाया. बदायूं में थानेदार ने फरियादी की नहीं सुनी, घटनास्थल का मुआयना तक नहीं किया. महिला सुरक्षा पर यूपी सरकार की नियत में खोट है.’

प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने इस घटना पर सरकार को घेरते हुए एक ट्वीट में कहा, ‘यूपी के बदायूं में पूजा करने गई 50 वर्षीय आंगनवाड़ी सहायिका के साथ सामूहिक बलात्कार और फिर उसके बाद उसकी निर्मम हत्या ने संपूर्ण मानवता को शर्मसार कर दिया है.’

पार्टी ने ट्वीट में कहा, ‘डूब मरें सत्ताधीश, जो महिला सुरक्षा के सिर्फ झूठे दावे करते हैं. दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिला कर न्याय किया जाए.’

बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी इस घटना की निंदा करते हुए एक ट्वीट में कहा, ‘उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में एक महिला के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म व हत्या की घटना अति दुःखद व अति निंदनीय है. राज्य सरकार इस घटना को गंभीरता से ले व दोषियों को सख्त सजा दिलाना भी सुनिश्चित करे ताकि ऐसी घटना की पुनरावृति न हो.’

इधर, घटना को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय से ट्वीट कर कहा गया है, ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनपद बदायूं की घटना का संज्ञान लेते हुए संबंधित अभियुक्तों के विरुद्ध सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए हैं.’

एक अन्य ट्वीट में कहा गया है, ‘मुख्यमंत्री जी ने एडीजी बरेली जोन को घटना के संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं. मुख्यमंत्री ने यूपी एसटीएफ को इस घटना की विवेचना में सहयोग प्रदान करने के लिए निर्देशित किया है.’

राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी इस घटना का संज्ञान लिया है. आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा, ‘हमने मामले का संज्ञान लिया है. आयोग का एक सदस्य स्थिति की जानकारी लेने और पुलिस तथा परिवार से मिलने के लिए वहां जा रहा है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)