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बदायूं गैंगरेप: मामला दर्ज करने में लापरवाही बरतने पर दो पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

बदायूं ज़िले में तीन जनवरी की शाम मंदिर में पूजा करने गईं पचास साल की महिला के कथित सामूहिक बलात्कार और मौत के मामले में इससे पहले कर्तव्यों का निर्वहन न करने के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन के एसएचओ और पोस्ट प्रभारी को निलंबित किया गया था.

Badaun

नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश के बदायूं में पचास साल की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में कथित तौर पर लापरवाही बरतने के लिए दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह एफआईआर अपराध होने के बाद कथित तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन न करने के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन के एसएचओ और पोस्ट प्रभारी के खिलाफ दर्ज की गई है.

इन आरोपों से पहले इन दोनों को निलंबित कर दिया गया था.

बदायूं (ग्रामीण) के एसपी सिद्धार्थ वर्मा का कहना है, ‘हमारी जांच के दौरान हमें पता चला कि पुलिसकर्मियों की ओर से लापरवाही की गई. एफआईआर दर्ज करने में देरी की गई. जब किसी महिला से जुड़ा हुआ अपराध होता है तो कुछ निश्चित कर्तव्यों को पूरा करने की जरूरत होती है. मामले में सभी औपचारिकताओं को पूरा होने में काफी देर की गई.’

पीड़ित परिवार का कहना है कि एफआईआर दर्ज होने में लगभग 18 घंटे की देरी की गई. पुलिस के मुताबिक, ‘शुरुआत में पीड़ित परिवार की ओर से किसी तरह की लिखित शिकायत नहीं दी गई.’

परिवार का आरोप है कि समय पर पुलिस के हरकत में आने से महिला की जान बच सकती थी.

बता दें कि आरोप है कि तीन जनवरी की शाम महिला मंदिर में पूजा करने गई थीं. आरोप है कि इस दौरान मंदिर में मौजूद महंत सत्य नारायण, चेला वेदराम व ड्राइवर जसपाल ने महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया और तीन जनवरी की रात ही आरोपी अपनी गाड़ी से महिला को उनके घर के सामने फेंककर फरार हो गए.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में महिला के प्राइवेट पार्ट में रॉड जैसी चीज डालने की पुष्टि हुई थी. महिला के शरीर पर चोट के गंभीर निशान भी मिले. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पसली, पैर और फेफड़े भी क्षतिग्रस्त होने की पुष्टि हुई थी.

जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर यशपाल सिंह ने कहा कि महिला की मौत सदमे और अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से हुई थी.

गैंगरेप के बाद हत्या के मामले में लापरवाही बरतने और घटना को दबाने के मामले में थानाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया था.

इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद फरार मुख्य आरोपी महंत को सात जनवरी की देर रात गिरफ्तार किया गया था.