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जम्मू कश्मीर: ज़मानत के ठीक बाद वहीद पारा को अन्य आतंकी मामले में हिरासत में लिया गया

टेरर फंडिंग के आरोप में एनआईए द्वारा गिरफ़्तार पीडीपी की युवा इकाई के नेता वहीद पारा को शनिवार को अदालत ने ज़मानत देते हुए कहा था कि उन पर लगाए आरोपों का कोई अर्थ नहीं है. इसी दिन उनकी रिहाई के फौरन बाद पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने एक अन्य मामले में उन्हें हिरासत में ले लिया.

वहीद पारा. (फोटो साभार: फेसबुक/@parawahid)

वहीद पारा. (फोटो साभार: फेसबुक/@parawahid)

श्रीनगर: आतंकी फंडिंग मामले में एनआईए अदालत से जमानत मिलने के ठीक बाद पीडीपी युवा इकाई के नेता वहीद-उर-रहमान पारा को आतंक से संबंधित एक अन्य मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू कश्मीर पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने शनिवार की शाम अंबफाला जिला जेल से रिहा होने के बाद उन्हें तत्काल हिरासत में ले लिया.

एक वरिष्ठ जेल अधिकारी ने बताया, ‘हमें काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) से जेल से पारा को लेने का एक संदेश मिला था, क्योंकि वे उनसे श्रीनगर में दर्ज एफआईआर नंबर 31 के संबंध में पूछताछ करना चाहते थे.’

अधिकारी ने प्राथमिकी के विवरण के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. वहीं, पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने भी इस बारे में कुछ नहीं बताया, जबकि सूत्रों  के अनुसार एफआईआर एक आतंकी फंडिंग मामले से संबंधित है.

एक सूत्र ने बताया, ‘यह एक ओपन एफआईआर है और वहीद के नाम का उल्लेख नहीं है. महबूबा मुफ्ती (पीडीपी प्रमुख) के रिश्तेदारों और सहयोगियों में से कई लोगों इस मामले में पूछताछ कर चुके हैं.’

सूत्र ने आगे कहा, ‘यह मामला वहीद के एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद दायर किया गया था.’

पारा के वरिष्ठ वकील पीएन रैना के सहयोगी आलोक बम्ब्रू ने कहा कि पारा को जमानत देने के अदालती आदेश वाले दस्तावेजों को शनिवार शाम करीब 4 बजे जेल अधिकारियों को दे दिया गया. हालांकि, उन्होंने दस्तावेज तैयार करने की बात कहते हुए रिहाई में दो घंटे देरी कर दी, जब तक कि सीआईके के एक इंस्पेक्टर और कुछ अन्य पुलिसकर्मी एक वाहन में जेल नहीं पहुंच गए और पारा को उठा लिया.

बम्ब्रू ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने बताया कि वे उन्हें पूछताछ के लिए संयुक्त पूछताछ केंद्र (जेआईसी) ले जा रहे थे.

बम्ब्रू ने कहा, ‘रविवार को मैं जेआईसी पहुंचा लेकिन अधिकारियों ने मुझे बताया कि वे अभी भी पूछताछ कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पुलिस ने जमानत के बाद पारा को हिरासत में लेने का आधार नहीं बताया.’

पारा को शनिवार को यहां एनआईए की एक अदालत ने जमानत दी थी. विशेष जज ने एक लाख रुपये की जमानत राशि और इतनी ही राशि के निजी मुचलके, पासपोर्ट जमा करने, साथ ही जमानत अवधि के दौरान बिना लिखित इजाजत के जम्मू कश्मीर से बाहर जाने की शर्त पर पारा की रिहाई का आदेश दिया था.

एजेंसी द्वारा कथित टेरर फंडिंग के आरोप में हिरासत में लिए गए पारा को डेढ़ महीने बाद जमानत देते हुए स्पेशल जज सुनित गुप्ता ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप, खासकर यूएपीए के तहत का प्रथमदृष्टया कोई अर्थ नहीं है.

एनआईए के मामले में कई झोल बताते हुए जज ने कहा कि न पहली और न ही पूरक चार्जशीट में ‘वर्तमान आवेदक का जिक्र तक नहीं है’ और उन्हें ‘इस मामले का केवल एक संदिग्ध बताया गया है.’

अदालत ने आतंकी सयैद नवीद मुश्ताक शेख उर्फ़ नवीद बाबू के कथित इकबालिया बयान के आधार पर हुई पारा की गिरफ़्तारी पर सवाल उठाते हुए कहा कि एविडेंस एक्ट की धारा 25 के तहत इस बयान की कोई कानूनी वैधता नहीं है, जिसके मुताबिक इस तरह के इकबालिया बयान केवल मजिस्ट्रेट द्वारा सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए जा सकते हैं.

अदालत ने यह भी कहा कि किसी भी एक गवाह ने पारा का नाम नहीं लिया है.

अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में दक्षिण कश्मीर के अपने गृह नगर पुलवामा जिले से जिला विकास परिषद (डीडीसी) चुनाव जीतने वाले पारा को एनआईए ने पारा को पिछले साल 25 नवंबर को गिरफ्तार किया था.

उनकी गिरफ्तारी गुपकर घोषणा पत्र गठबंधन (पीएजीडी) के उम्मीदवार के तौर पर उनके द्वारा नामांकन पत्र दाखिल किए जाने के कुछ दिन बाद हुई थी.

एनआईए ने कहा था कि पारा को हिजबुल मुजाहिदीन की मदद संबंधी नवीद बाबू-दविंदर सिंह मामले में गिरफ्तार किया गया था.

पीडीपी ने इस आरोप से इनकार किया था और गिरफ्तारी को ‘राजनीति से प्रेरित’ करार दिया था. पार्टी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने कहा था, ‘मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाने पर वे मेरा नाम टेरर फंडिंग से जोड़कर मुझे बदनाम करने के दूसरे तरीके खोज रहे हैं.’

शनिवार देर शाम महबूबा ने ट्वीट कर कहा था, ‘एनआईए अदालत द्वारा अदालती कार्यवाही के बाद वहीद पारा को जमानत दिए जाने के बावजूद अब उन्हें जम्मू में सीआईके ने हिरासत में लिया है. किस कानून के तहत और किस अपराध में उन्हें गिरफ्तार किया गया है? यह अदालत की खुली अवमानना है. मनोज सिन्हा जी से आग्रह है कि वह हस्तक्षेप करें, जिससे कि न्याय सुनिश्चित हो.’

एनआईए के सूत्रों का कहना है कि एजेंसी पारा की जमानत को हाईकोर्ट में चुनौती देगी.