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कोविड टीकाकरण: दिल्ली में 52 और महाराष्ट्र में 14 लोगों पर साइड इफेक्ट के मामले सामने आए

कोविड-19 टीकाकरण अभियान के पहले दिन देशभर में जिन स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना वायरस का टीका लगाया गया उनमें से 75 से अधिक लोगों में टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव के मामले सामने आए. दिल्ली में एक गंभीर और 51 मामूली, जबकि महाराष्ट्र में ऐसे 14 मामले सामने आए.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: कोविड-19 टीकाकरण अभियान के पहले दिन शनिवार को देशभर में जिन स्वास्थ्यकर्मियों को कोरोना वायरस का टीका लगाया गया उनमें से 75 से अधिक लोगों में एईएफआई (टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव) के मामले सामने आए.

ये मामले दो राज्यों दिल्ली और महाराष्ट्र से हैं. दिल्ली में एईएफआई का एक ‘गंभीर’ और 51 ‘मामूली’ मामले सामने आए. वहीं, महाराष्ट्र में ऐसे 14 मामले सामने आए.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के 11 जिलों में टीकाकरण अभियान के पहले दिन 8,117 स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाने का लक्ष्य था, जिनमें कुल 4,319 लोगों को टीका लगाया गया.

अधिकारियों ने कहा कि जिन लोगों को टीका लगाया गया, उनमें से कुछ में एईएफआई के मामले आए.

सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘एईएफआई के कुछ मामले आए लेकिन अधिकतर मामूली थे. निगरानी के दौरान ये लोग सामान्य हो गए. एईएफआई का केवल एक गंभीर मामला दक्षिणी दिल्ली में सामने आया.’

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, टीकाकरण के बाद प्रतिकूल चिकित्सा प्रभाव के मामले को एईएफआई की श्रेणी में रखा जाता है, जिसका टीके के इस्तेमाल से संबंध होना जरूरी नहीं है.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दक्षिणी और दक्षिण पश्चिमी जिलों से एईएफआई के 11 ‘मामूली’ मामले आए.

अधिकारियों के अनुसार एईएफआई के ‘मामूली’ मामले उत्तर पूर्वी और शाहदरा जिलों को छोड़कर बाकी सभी जिलों से आए. दिल्ली में शनिवार को 81 केंद्रों पर टीकाकरण अभियान चलाया गया.

वहीं, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में एईएफआई के 14 मामले सामने आए जिसमें से कोई भी मामला गंभीर नहीं है. राज्य के अधिकारी फिलहाल मामलों का अध्ययन कर रहे हैं.

14,000 लाभार्थियों में से पहले दिन लगभग 50 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण किया गया. सबसे पहले टीका लगवाने वालों में फ्रंटलाइन वर्कर्स, डॉक्टर्स और सीरम इंस्टिट्यूट के सीईओ आदर पूनावाला शामिल थे.

महाराष्ट्र में टीकाकरण के लिए 285 केंद्र बनाए गए हैं जहां प्रतिदिन 100 स्वास्थ्यकर्मी को टीका लगाया जाएगा. पहले दिन राज्य में 28,500 कर्मियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था.

जालना में टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा कि महाराष्ट्र में अब तक 60 फीसदी या 10 लाख खुराक मिल चुकी है और शेष अगले 10 दिनों में मिल जाएगी.

सरकार के मुताबिक, सबसे पहले एक करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों, अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले करीब दो करोड़ कर्मियों और फिर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को टीके की खुराक दी जाएगी. बाद के चरण में गंभीर रूप से बीमार 50 साल से कम उम्र के लोगों का टीकाकरण होगा.

स्वास्थ्यकर्मियों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों पर टीकाकरण का खर्च सरकार वहन करेगी.

कोवैक्सीन पर बरकरार संदेह

भारत में जिन दोनों वैक्सीनों को मंजूरी दी गई है उनमें से भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को लेकर कुछ आशंकाएं जताई जा रही हैं क्योंकि उसके तीसरे चरण का मानव परीक्षण अभी भी चल रहा है और उसके प्रभाव के डेटा को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.

महाराष्ट्र ने राज्य के लगभग छह केंद्रों पर कोवैक्सीन के 20 हजार डोज दिए. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर राज्य प्रशासन ने कोवैक्सीन केंद्रों की संख्या पहले से निर्धारित नौ की जगह छह कर दी है.

यही कारण है कि शनिवार को राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल के ‘रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन’ (आरडीए) ने चिकित्सा अधीक्षक को पत्र लिखकर कहा था कि उन्हें कोवैक्सीन को लेकर कुछ संदेह है और वे लोग बड़ी संख्या में टीकाकरण अभियान में हिस्सा नहीं लेंगे. इसके बजाय उन्होंने ऑक्सफोर्ड द्वारा विकसित कोविड-19 का टीका कोविशील्ड लगाए जाने का अनुरोध किया था.

वहीं, केंद्र को अपनी वैक्सीन की 55 लाख खुराक की आपूर्ति करने वाली भारत बायोटेक ने कहा है कि कंपनी टीका लगवाने वालों द्वारा अनुभव किए गए किसी भी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव के लिए मुआवजा देगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)