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पंजाब: कृषि क़ानूनों के विरोध में भाजपा के दस वरिष्ठ नेता अकाली दल में शामिल

शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए नेताओं ने कहा कि उन्होंने पहले ही भाजपा को चेतावनी दी थी कि वे किसान विरोधी कृषि क़ानून वापस लें, लेकिन ऐसा करने के बजाय उल्टा क़ानूनों का समर्थन करने को कहा गया.

Amritsar: Farmers raise slogans during a protest in support of the nationwide strike, called by farmer unions to press for repeal of the Centres Agri laws, in Amritsar, Tuesday, Dec. 8, 2020. (PTI Photo)(PTI08-12-2020 000197B)

(फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: पंजाब के मालवा क्षेत्र में बीते शुक्रवार को भाजपा को उस समय झटका लगा जब पार्टी के 10 वरिष्ठ नेता शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) में शामिल हो गए.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एसएडी की सदस्यता लेने वालों में बलविंदर सिंह (पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष किसान मोर्चा, भाजपा), सुखदेव सिंह फरमाही (भाजपा के पूर्व मनसा जिला अध्यक्ष), बलकार सिंह सहोता, जगतार सिंह तारी (पूर्व जिला उपाध्यक्ष एससी मोर्चा, भाजपा), सुरजीत कौर (पूर्व महिला मोर्चा और मानसा जिले की अध्यक्ष), राजिंदर कुमार राजी, बलजीत सिंह चहल, बहादुर खान, रविंदर कुमार शर्मा और बघेल सिंह (भाजपा बीसी मोर्चा सदस्य) शामिल हैं.

पार्टी बदलते हुए नेताओं ने कहा केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने ये निर्णय लिया है.

अकाली दल के नेताओं ने कहा कि 10 भाजपा नेता बड़ी संख्या में अपने समर्थकों के साथ शामिल हुए. उन्होंने एसएडी अध्यक्ष को आश्वासन दिया कि उनके और समर्थक जल्द ही अकाली दल में शामिल होंगे और वे इस संबंध में एक समारोह करेंगे.

बलविंदर सिंह और सुखदेव सिंह फरमाही ने कहा, ‘हमने राज्य की भाजपा इकाई को चेतावनी दी थी कि अगर वह अपने किसान विरोधी कदम को वापस नहीं लेती है, गांवों में उनके एक कार्यकर्ता भी बचेंगे. हालांकि जब पार्टी ने हमारी सलाह को मानने से इनकार कर दिया और इसके बजाय हमसे इन कृषि कानूनों का बचाव करने के लिए कहा, तो हमने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और पार्टी छोड़ने का फैसला किया. अब हम किसान आंदोलन के साथ-साथ एसएडी और सुखबीर सिंह बादल को मजबूत करेंगे.’

बठिंडा में पार्टी कार्यालय में आयोजित एक समारोह में अकाली गुना में भाजपा नेताओं का स्वागत करते हुए, एसएडी अध्यक्ष ने कहा कि यह जिले में एसएडी को और मजबूत करेगा. उन्हें पार्टी में उचित सम्मान और मान्यता देने का आश्वासन भी दिया.