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हेमा मालिनी पंजाब आकर कृषि क़ानून समझाएं, आने-जाने-रहने का ख़र्च हम उठाएंगे: किसान संगठन

मथुरा से भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने नए कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ किसानों के आंदोलन को लेकर कहा था कि किसानों को पता नहीं है कि वे क्या चाहते हैं क्योंकि उनके पास कोई एजेंडा नहीं है. उन्हें विपक्षी दलों द्वारा अपने हितों को साधने के लिए भड़काया जा रहा है.

भाजपा सांसद हेमा मालिनी. (फोटो: पीटीआई)

भाजपा सांसद हेमा मालिनी. (फोटो: पीटीआई)

जालंधर: कांढी किसान संघर्ष समिति (केकेएससी) ने रविवार को भाजपा नेता हेमा मालिनी को तीन नए और विवादित कृषि कानूनों को समझाने के लिए पंजाब आने का आमंत्रण दिया है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, किसान संगठन ने उत्तर प्रदेश के मथुरा से सांसद हेमा मालिनी की एक हफ्ते तक यात्रा और फाइव स्टार होटल में रुकने का खर्च उठाने की बात भी कही है.

किसान संगठन का यह पत्र अभिनेत्री से राजनेता बनीं हेमा मालिनी द्वारा नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के संबंध में दिए गए बयान के बाद सामने आया है.

मालिनी ने कहा था, ‘पता नहीं वे क्या चाहते हैं क्योंकि उनके पास कोई एजेंडा नहीं है और उन्हें विपक्षी दलों द्वारा अपने हितों को साधने के लिए भड़काया जा रहा है.’

पत्र में केकेएससी अध्यक्ष भूपिंदर सिंह घुम्मन, संरक्षक अवतार सिंह भीखोवाल और उपाध्यक्ष जरनैल सिंह गढ़ीवाल ने कहा कि उन्हें पंजाब में भाभी के रूप में सम्मान मिला है. भाभी मां के बराबर होती है और उन्होंने खुद चुनावी अभियान के दौरान कहा था कि वो पंजाब की बहू हैं.

बता दें कि हेमा मालिनी मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र की पत्नी हैं, जो पंजाब से आते हैं. उनके बेटे सनी देओल भी गुरदासपुर से सांसद हैं.

संगठन के पत्र में लिखा गया, ‘अपनी फसल की सही कीमत की मांग करते हुए पिछले 51 दिनों से किसान दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन रहे हैं और लगभग 100 किसान अपनी जान गंवा चुके हैं. ऐसे समय पर आपके बयान ने हर पंजाबी को चोट पहुंचाई है. किसान कड़ी मेहनत कर फसल उगाता है. वो अपनी फसल को यूं ही किसी भी दाम पर नहीं बेच सकता क्योंकि उसके पास न्यूनतम समर्थन मूल्य पाने का भी अधिकार नहीं है.’

पत्र में आगे कहा गया, ‘आप कह रही हैं कि हम (किसान) नहीं जानते हैं कि हम क्या चाहते हैं इसलिए कृपया पंजाब आएं और हमें यह समझाएं कि हमें क्या करना चाहिए ताकि किसानों को दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करते हुए अपने प्राणों की आहुति न देनी पड़े.’

पत्र में कहा गया, ‘हमने तय किया है कि हम आपके ठहरने की व्यवस्था किसी फाइव स्टार होटल में करेंगे और किसान और मजदूर इसके लिए भुगतान करेंगे.’