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किसानों को डराने के लिए एनआईए का इस्तेमाल कर रही है केंद्र सरकार: विपक्ष

किसान आंदोलन में शामिल कई लोगों को एनआईए का समन मिलने के बाद कांग्रेस और अकाली दल ने केंद्र की आलोचना की है. सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि जब खालसा एड ने गुजरात में सहायता की, तब सरकार को उसमें कुछ ग़लत नहीं लगा पर अब किसानों की मदद करने वालों के पीछे एनआईए लगा दिया गया.

सुखबीर सिंह बादल. (फोटो: पीटीआई)

सुखबीर सिंह बादल. (फोटो: पीटीआई)

अमृतसर/चंड़ीगढ़/लुधियाना/नई दिल्ली: कांग्रेस और एनडीए के पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल ने रविवार को तीन कृषि कानूनों का विरोध करने वाले किसान नेताओं, पत्रकारों और एक एनजीओ को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा समन और नोटिस भेजे जाने की आलोचना की और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार इसका विरोध करने वालों को डराने के लिए एजेंसी का उपयोग कर रही है.

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘अब सरकार किसानों को ऐसी एजेंसियों के माध्यम से नोटिस भेजती है जो आतंकवादियों के खिलाफ जांच करती हैं. किसानों को आतंकवादी, नक्सली और चीन तथा पाकिस्तानी एजेंट कहने के बाद मोदी सरकार की मंशा क्या है? मोदीजी आप क्या साबित करने की कोशिश कर रहे हैं?’

उन्होंने कहा, ‘खेद की बात है कि प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा नेता यह साबित करने पर उतारू हैं कि सभी किसान, इस देश के 62 करोड़ किसान आतंकवादी, उग्रवादी, नक्सली, चीन तथा पाकिस्तान के एजेंट हैं, लेकिन किसानों को एनआईए जैसी कठपुतली एजेंसी के ये फर्जी नोटिस न तो डिगाएंगे और न ही डराएंगे.’

सुरजेवाला ने कहा, ‘मोदीजी को समझना चाहिए कि अनाज मंडियों में छोटे दुकानदारों पर आयकर के छापों तथा किसानों एवं पत्रकारों को एनआईए या सीबीआई के नोटिसों से किसान डरेंगे नहीं. हम तब तक इसे जारी रखेंगे जब तक तीन काले कानून वापस नहीं ले लिए जाते.’

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और उसके प्रमुख सरकार की हाथों की कठपुतली रहे हैं और इस बात के प्रमाण हैं.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि जब खालसा एड ने गुजरात में मानवीय सहायता प्रदान की तब केंद्र सरकार को उसमें कुछ गलत नहीं लगा, लेकिन अब शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों की मदद करने वाले एनजीओ के पीछे एनआईए को लगा दिया गया है.

बता दें कि, केंद्र सरकार के तीन नए और विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे देशव्यापी किसान आंदोलन के बीच एनआईए ने प्रदर्शनों में शामिल एवं इसका समर्थन कर रहे लोगों को नोटिस भेजा है.

एनआईए से नोटिस प्राप्त करने वालों में किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा, पंजाबी अभिनेता एवं कार्यकर्ता दीप सिंधू, पंजाब के एक टीवी चैनल के पत्रकार जसबीर सिंह और कार्यकर्ता गुरप्रीत सिंह शामिल हैं.

जांच एजेंसी ने प्रतिबंधित संगठन ‘सिख फॉर जस्टिस’ के खिलाफ हाल ही में दायर की गई एफआईआर के संबंध में ये नोटिस भेजा है.

कृषि कानूनों पर सरकार के साथ बातचीत में शामिल लोक भलाई इंसाफ वेल्फेयर सोसायटी के अध्यक्ष बलदेव सिंह सिरसा को 17 जनवरी को एनआईआए हेडक्वार्टर बुलाया गया था.

पंजाबी अभिनेता और गायक दीप सिंधू को भी रविवार को एनआईए के सामने पेश होने के लिए कहा गया था. इससे पहले, उनके भाई और कम से कम एक दर्जन अन्य लोगों ने इसी मामले में एनआईए से नोटिस प्राप्त किए थे.

ब्रिटेन स्थित पंजाब टाइम्स के एक पत्रकार बलविंदर पाल सिंह को भी 17 जनवरी को एनआईए मुख्यालय में पेश होने के लिए इसी तरह का नोटिस दिया गया था.

इस बीच, एनआईए का समन पाने वालों में से कुछ ने एजेंसी के सामने पेश नहीं होने का फैसला किया है.

सिंधू भाइयों की ओर से पेश होने वाले वकील हकम सिंह ने कहा, ‘दीप सिंह सिंधू रविवार को एनआईए के सामने पेश नहीं हुए. उनके भाई भी पेश नहीं होंगे जिन्हें 19 जनवरी को पेश होने के लिए कहा गया है.’

उन्होंने कहा कि वह पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की योजना बना रहे थे, ताकि उन सभी को ट्रांजिट जमानत मिल सके, जिन्हें नोटिस मिला है.

समन के बाद एनआईए के सामने पेश होने वाले एक वालंटियर ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा, ‘मेरा एसएफजे (सिख फॉर जस्टिस) से कोई संबंध नहीं है. मुझे आश्चर्य हुआ कि उनके पास मेरा हर विवरण है. मैं डरा हुआ हूं और उन्हें वे सभी विवरण दिए गए हैं जो वे चाहते थे. मुझे नहीं पता कि वे संतुष्ट हैं या नहीं.’

बादल ने कहा, ‘केंद्र को लगता है कि इस तरह के डराने वाले उपायों से वह कृषि (कानूनों का) विरोध को कमजोर कर सकता है. उन्हें नहीं पता है कि किसानों का दमन केवल इन दमनकारी कदमों के कारण मजबूत हो रहा है.’

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील कुमार जाखड़ ने कहा कि भाजपा किसान समुदाय और पंजाबियों को लुभाने की कोशिश कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘वे न केवल किसानों को धोखा देने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि वे उनकी सहायता प्रणाली को भी कम कर रहे हैं.’

जाखड़ ने कहा, ‘नोटिसों ने सरकार के दोमुंहेपन को उजागर कर दिया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसानों को बदनाम नहीं करना चाहिए. लेकिन पंजाब और हरियाणा के भाजपा नेता उन्हें अलग-अलग नाम से पुकारते रहे. एनआईए नोटिस साफ तौर पर भाजपा का तरीका है.’

एनजीओ खालसा एड ने एनआईए नोटिस पर कहा, ‘स्वैच्छिक एजेंसियों, समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ इस प्रकृति की बड़े पैमाने पर अंधाधुंध एनआईए जांच, जो मानवीय सहायता प्रदान करती हैं, भारतीय इतिहास में अभूतपूर्व है. हमारी टीम एनआईए टीम का सहयोग करेगी और किसी भी प्रश्न का जवाब देगी.’

शनिवार को समन के समय पर सवाल उठाते हुए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) की अध्यक्ष बीबी जागीर कौर ने काले कृषि कानूनों के विरोध में किसानों की आवाज बुलंद करने पर केंद्र की रणनीति की निंदा की.

सिख फॉर जस्टिस के खिलाफ पहले से ही कई मामलों की जांच कर रही एनआईए ने संगठन के खिलाफ 15 दिसंबर, 2020 को एक नया मामला दर्ज किया है.

बता दें कि ‘सिख फॉर जस्टिस’ एक अमेरिकी-आधारित खालिस्तानी समूह है, जो पंजाब को भारत से अलग करने का समर्थन करता है. साल 2019 में इसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था. समूह का गठन 2007 में गुरपतवंत सिंह पन्नून द्वारा किया गया था.

प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि एसएफजे आतंकी वारदातों के लिए युवाओं की भर्ती करने की कोशिश कर रहा है और जमीनी अभियानों को शुरू करने और भारत सरकार के खिलाफ प्रोपगेंडा करने के लिए भारत में खालिस्तानी समर्थक तत्वों के लिए गैर-सरकारी संगठनों के माध्यम से विदेशी धन भेज रहा है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के संदर्भ में दर्ज किए गए एनआईए के एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और कई अन्य देशों में भारतीय मिशनों के बाहर प्रदर्शन सहित भारत सरकार के खिलाफ जमीनी अभियानों और प्रचार के लिए विदेशों में भारी धन एकत्र किया जा रहा है.

एफआईआर ने एसएफजे नेताओं गुरपवंत सिंह पन्नू, हरदीप सिंह निज्जर और परमजीत पम्मा को आरोपी बनाया गया है और ऐसा कहा जाता है कि ये तीनों विदेश में रहते हैं.

गौरतलब है की पिछले सप्ताह अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि दिल्ली के बाहरी इलाकों में चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन में सरकार को खालिस्तानी घुसपैठ होने की सूचना मिली है.

हालांकि, किसान संगठनों ने एसएफजे से किसी संबंध से इनकार किया है और कहा है कि यह आंदोलन और आंदोलनकारियों को बदनाम करने की केंद्र सरकार की साजिश है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)