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पश्चिम बंगाल: ममता बनर्जी का ऐलान, नंदीग्राम से लड़ेंगी विधानसभा चुनाव

नंदीग्राम में ज़मीन अधिग्रहण के विरुद्ध विशाल जनांदोलन के चलते ही ममता बनर्जी उभरी थीं और 2011 में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में पहुंची थी. साल 2016 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर यहां से चुनाव जीतने वाले शुभेंदु अधिकारी कुछ दिन पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं.

ममता बनर्जी. (फोटो: पीटीआई)

ममता बनर्जी. (फोटो: पीटीआई)

नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल): पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देते हुए सोमवार को ऐलान किया कि वह उनके गढ़ नंदीग्राम से आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगी.

अधिकारी हाल ही में तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे. भाजपा राज्य में एक दशक से राज कर रही तृणमूल को सत्ता से उखाड़ फेंकने की जी-तोड़ कोशिश में जुटी है.

मुख्यमंत्री ने यहां एक रैली में कहा कि दूसरे दलों में जाने वालों को लेकर उन्हें कोई चिंता नहीं क्योंकि जब तृणमूल कांग्रेस बनी थी, तब उनमें से शायद ही कोई साथ था.

उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने पिछले कुछ सालों के दौरान ‘अपने द्वारा लुटे गए’ धन को बचाने के लिए पार्टी (तृणमूल कांग्रेस) छोड़ी.

बनर्जी ने कहा, ‘मैंने हमेशा से नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान की शुरुआत की है. यह मेरे लिए भाग्यशाली स्थान है. इस बार मुझे लगा कि यहां से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहिए. मैं प्रदेश पार्टी अध्यक्ष सुब्रत बख्शी से इस सीट से मेरा नाम मंजूर करने का अनुरोध करती हूं.’

मंच पर मौजूद बख्शी ने तुरंत अनुरोध स्वीकार कर लिया.

नंदीग्राम विशेष आर्थिक क्षेत्र के निर्माण के लिए तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के ‘जबरन’ ‘जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध विशाल जनांदोलन का केंद्र था.

लंबे समय तक चले और अक्सर रक्तरंजित रहे इस आंदोलन के चलते ही बनर्जी और उनकी पार्टी उभरी एवं 2011 में तृणमूल कांग्रेस सत्ता में पहुंचीं. इसी के साथ 34 साल से जारी वाम शासन पर पूर्ण विराम लगा था.

अधिकारी नंदीग्राम आंदोलन का चेहरा माने जाते हैं. हालांकि पाला बदलकर भाजपा से हाथ मिला चुके अधिकारी ने अक्सर बनर्जी पर आरोप लगाते रहे हैं कि जिस क्षेत्र ने बनर्जी को सत्ता दिलाने में मदद पहुंचायी, उस क्षेत्र के लोगों को उन्होंने भुला दिया.

ममता बनर्जी फिलहाल दक्षिण कोलकाता के भवानीपुर से विधायक हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यदि संभव हुआ तो मैं भवानीपुर और नंदीग्राम दोनों जगहों से चुनाव लडूंगी. नंदीग्राम मेरी बड़ी बहन है और भवानीपुर मेरी छोटी बहन. यदि मैं भवानीपुर से चुनाव नहीं लड़ पायी तो मैं वहां से कोई और मजबूत उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारूंगी.’

उन्होंने कहा कि वह ‘कुछ लोगों’ को बंगाल को कभी भाजपा के हाथों नहीं बेचने देंगी.

उन्होंने कहा, ‘जो पार्टी से चले गए, उन्हें मेरी शुभकामनाएं हैं. उन्हें देश का राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति बनने दीजिए. लेकिन आप बंगाल को भाजपा के हाथों बेचने का दुस्साहस नहीं करें. जब तक मैं जिंदा हूं, मैं उन्हें अपने राज्य को भाजपा के हाथों नहीं बिकने दूंगी.’

तृणमूल सूत्रों ने बताया कि बनर्जी के ऐलान से पूर्वी और पश्चिमी मिदनापुर जिलों एवं आसपास के क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करेगा जो अधिकारी के पार्टी छोड़ देने के बाद बिना पतवार के नाव जैसा महसूस कर रहे हैं.

अधिकारी का जिक्र किए बगैर बनर्जी ने कहा कि राज्य जीतने का सपने देखने से पहले उन्हें स्थानीय तृणमूल नेताओं से संघर्ष करना होगा.

उन्होंने वाममोर्चा सरकार के दौरान जबरन जमीन अधिग्रहण के विरुद्ध नंदीग्राम और सिंगूर में अपने नेतृत्व में छेड़े गए आंदोलन को याद करते हुए कहा कि भाजपा दिल्ली की सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन को कमतर आंककर वही भूल कर रही है.

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘माकपा ने किसानों की जमीन छीनने का प्रयास किया था. भाजपा किसानों का फसल छीनने का प्रयत्न कर रही है.’

प्रतिद्वंद्वी दलों के नेताओं को पार्टी में शामिल करने पर भाजपा पर निशाना साधते हुए बनर्जी ने कहा, ‘भाजपा देश में सबसे बड़ी कबाड़ पार्टी है. भाजपा कोई राजनीतिक दल नहीं है बल्कि वाशिंग पाउडर है. वह तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को अपने में शामिल करने के वास्ते पैसे और धमकियों का इस्तेमाल कर रही हैं.’

अपनी पार्टी के दल-बदल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा भले ही कुछ नेताओं को खरीद ले लेकिन वह बंगाल के लोगों को खरीद नहीं सकती. उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस लगातार तीसरी बार जीतकर सत्ता में आयेगी और भाजपा का सफाया हो जाएगा.

राज्य में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं.

ममता बनर्जी को हराऊंगा, नहीं तो राजनीति छोड़ दूंगा: शुभेंदु अधिकारी

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने उनकी विधानसभा सीट नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दी गई चुनौती सोमवार को स्वीकार करते हुए कहा वह चुनाव में उन्हें हरायेंगे, वरना राजनीति छोड़ देंगे.

हालांकि पूर्व तृणमूल नेता ने कहा कि उम्मीदवारों पर आखिरी निर्णय भाजपा नेतृत्व विस्तृत चर्चा के बाद लेगा, न कि जैसे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में मनमाने तरीके से होता है.

इससे पहले, बनर्जी ने दिन में नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान करके सभी को चौंका दिया था. पिछले चुनाव में इस सीट पर टीएमसी के टिकट पर अधिकारी को जीत हासिल हुई थी.

अधिकारी ने कहा, ‘यदि मुझे मेरी पार्टी नंदीग्राम से चुनाव मैदान में उतारती है तो मैं उनको कम से कम 50 हजार वोटों के अंतर से हराऊंगा, अन्यथा मैं राजनीति छोड़ दूंगा.’

उन्होंने कहा कि लेकिन तृणमूल कांग्रेस को जहां बनर्जी और उनके भतीजे ‘तानाशाही’ तरीके से चलाते हैं वहीं भाजपा में उम्मीदवार चर्चा के बाद तय किए जाते हैं और मेरी उम्मीदवारी पर फैसला पार्टी को करना है.

तीन किलोमीटर के रोडशो के बाद उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा, ‘मैं नहीं जानता कि मुझे कहां से उतारा जाएगा और उतारा भी जाएगा या नहीं.’

उन्होंने कहा कि बनर्जी बस चुनाव से पहले ही नंदीग्राम को याद करती हैं एवं उन पर नंदीग्राम गोलीबारी में लिप्त रहे एक आईपीएस अधिकारी को चार बार सेवा विस्तार देने का आरोप लगाया.

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि बनर्जी नंदीग्राम के लोगों की भावनाओं के साथ खेल रही हैं लेकिन ‘इस बार यह काम नहीं करेगा और उनकी पार्टी लोकतांत्रिक ढंग से बंगाल की खाड़ी में फेंक दी जाएगी.’

उन्होंने दावा किया कि सोमवार को नंदीग्राम के टेखली में बनर्जी की सभा में 30 हजार से अधिक लोग नहीं थे और उनमें से भी अधिकतर को दूसरे स्थानों से लाया गया था.

उन्होंने बनर्जी पर नंदीग्राम के लोगों के प्रति सहानुभूति न रखने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘स्कूलों की पुस्तकों में सिंगूर में हुए कृषि भूमि अधिग्रहण-रोधी आंदोलन को तो शामिल किया गया है लेकिन नंदीग्राम तथा खेजुरी के शहीदों को कोई जिक्र नहीं है.’

अधिकारी ने टीएमसी पर अम्फान चक्रवात के पीड़ितों को आवंटित कोष और गरीबों को दिए जाने वाले खाद्यान्न भंडार को चुराने का आरोप लगाया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)