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लोकप्रिय भजन गायक नरेंद्र चंचल का निधन

भजन सम्राट के नाम से मशहूर 80 वर्षीय नरेंद्र चंचल मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं के चलते नवंबर से अस्पताल में भर्ती थे, जहां शुक्रवार दोपहर को उनका देहांत हो गया.

नरेंद्र चंचल (फोटोः पीटीआई)

नरेंद्र चंचल (फोटोः पीटीआई)

नई दिल्लीः लोकप्रिय भजन गायक नरेंद्र चंचल का शुक्रवार को निजी अस्पताल में निधन हो गया. वह 80 वर्ष के थे.

सूत्रों का कहना है कि चंचल ने दिल्ली के अपोलो अस्पताल में शुक्रवार दोपहर 12.15 बजे अंतिम सांस ली.

उन्होंने बताया कि चंचल को मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं के चलते 27 नवंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

बीते 25 सालों से नरेंद्र चंचल के कंसर्ट आयोजक रहे संजय मलिक ने कहा, ‘नरेंद्र चंचल का दिल संबंधी बीमारियों की वजह से शुक्रवार दोपहर 12 बजे के आसपास निधन हुआ.’

उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ समय से उनकी तबियत ठीक नहीं थी. उन्हें दो महीने के लिए अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वह काफी कमजोर थे. उन्होंने आज अंतिम सांस ली.’

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी ट्वीट कर कहा, ‘सुप्रसिद्ध गायक श्री नरेंद्र चंचल का निधन सुगम संगीत, विशेषकर भक्ति संगीत के लिए गहरी क्षति है. लगभग पांच दशकों की संगीत यात्रा के दौरान गाए गए उनके गीत और भजन श्रोताओं को सदैव आनंदित करते रहेंगे. उनके परिवार व अनगिनत प्रशंसकों के प्रति मेरी शोक-संवेदनाएं.’

नरेंद्र चंचल के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर शोक जताया.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘लोकप्रिय भजन गायक नरेंद्र चंचल जी के निधन के समाचार से अत्यंत दुख हुआ है. उन्होंने भजन गायन की दुनिया में अपनी ओजपूर्ण आवाज से विशिष्ट पहचान बनाई. शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं. ओम् शांति!’

गायक दलेर मेहंदी ने ट्वीट कर नरेंद्र चंचल के निधन पर शोक जताया.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘यह जानकर दुख हुआ की लोकप्रिय और सबसे प्यारे नरेंद्र चंचल जी आज हमें छोड़कर स्वर्ग चले गए. उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना करता हूं. उनके परिवार और प्रशंसकों को संवेदनाएं.’

चंचल धार्मिक गानों और भजन के लिए जाने जाते थे. अपने करिअर में लाइव कार्यक्रमों में गाना गाने के अलावा उन्होंने हिंदी फिल्मों में भी गाने गाए हैं.

उन्होंने फिल्म ‘अवतार’ का गाना ‘चलो बुलावा आया है’ और ‘बॉबी’ फिल्म का ‘बेशक मंदिर मस्जिद तोड़ो’ जैसे लोकप्रिय गाने गाए. उन्हें ‘बॉबी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ गायक का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला.

इसके अलावा उन्होंने न सिर्फ शास्त्रीय संगीत में नाम कमाया बल्कि लोक संगीत में भी लोगों की दिल जीता.

नरेंद्र चंचल ने बचपन से ही अपनी मां कैलाशवती को माता रानी के भजन गाते हुए सुना. इसी वजह से उनकी रुचि भी गायकी में बढ़ी.

उनके शरारती स्वभाव और चंचलता की वजह से उनके शिक्षक उन्हें ‘चंचल’ कहकर बुलाते थे. बाद में नरेंद्र ने अपने नाम के साथ हमेशा के लिए चंचल जोड़ लिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)