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ओडिशा: भाजपा का दावा- ख़रीद में देरी के कारण एमएसपी से नीचे धान बेचने को मजबूर किसान

ओडिशा के भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य की सत्ताधारी बीजेडी सरकार ने अपने केंद्रीकृत टोकन प्रणाली के साथ किसानों को गुमराह किया है जिसके कारण कई किसान अपनी उपज बेचने में असमर्थ हैं. हालांकि, बीजेडी ने भरोसा दिलाया कि वास्तविक किसानों की फसल ख़रीदी जाएगी.

Jalandhar: Farmers thrash rice paddy at a field, in Jalandhar, Friday, Oct. 2, 2020. (PTI Photo)

(फोटो: पीटीआई)

भुवनेश्वर: ओडिशा में धान खरीद को लेकर राजनीतिक नूराकुश्ती शुरू हो गई है जिसमें विपक्षी भाजपा गुरुवार-शुक्रवार की मध्य रात्रि से संभलपुर में धरना दे रही है और सत्ताधारी बीजू जनता दल (बीजेडी) पर राज्य में किसानों के कल्याण और धान खरीद में बाधा डालने का आरोप लगा रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार द्वारा राज्यों से चावल की खरीद को 50 फीसदी तय करने के फैसले पर ओडिशा सरकार के साथ विवाद चल रहा है.

अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को धरना स्थल पर भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प भी हुई जिसके बाद भाजपा के 50 कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया. हालांकि बाद में उन्हें रिहा भी कर दिया गया.

राज्य के भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि बीजेडी सरकार ने अपने केंद्रीकृत टोकन प्रणाली के साथ किसानों को गुमराह किया है जिसके कारण कई किसान अपनी उपज बेचने में असमर्थ हैं. हालांकि, बीजेडी ने भरोसा दिलाया कि वास्तविक किसानों की फसल खरीदी जाएगी.

भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खरीद की सीमा निर्धारित करने के फैसले के बाद बीजेडी ने सात दिनों में फैसला वापस न लेने पर आंदोलन की धमकी दी थी.

राज्यसभा सांसद और ओडिशा के भाजपा प्रभारी बिजयपाल सिंह तोमर ने कहा, ‘टोकन सिस्टम के कारण कई किसान अभी भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. वे अपनी उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 1,868 रुपये नीचे बेचने के लिए मजबूर हैं, क्योंकि विभिन्न सरकारी-संचालित यार्डों में खरीद रुकी हुई है.’

बारगढ़ से भाजपा सांसद सुरेश पुजारी ने आरोप लगाया, ‘सरकार दावा करती रही है कि इस साल उन्होंने पिछले साल की तुलना में 22 फीसदी अधिक धान की खरीद की है. लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है. खाद्य आपूर्ति मंत्री रणेंद्र प्रताप स्वैन ने वादा किया था कि अगर किसी स्थान पर एमएसपी के नीचे धान की खरीद की जाती है तो आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे, लेकिन कहीं भी कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है.’

आरोपों पर बीजद के प्रवक्ता श्रीमयी मिश्रा ने कहा कि राज्य भाजपा बिचौलियों (मिडलमैन) के हितों का प्रतिनिधित्व कर रही है.

मिश्रा ने कहा, ‘जब किसानों को लाभान्वित करते हुए इतने बड़े पैमाने पर धान की खरीद हुई है तो कुछ बिचौलियों ने ओडिशा भाजपा को पकड़ लिया है और वे उनकी वकालत कर रहे हैं. ओडिशा के लोग जानते हैं कि ओडिशा भाजपा हमेशा से बिचौलियों की वकालत करती रही है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इसके अलावा दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन से ध्यान हटाने के लिए ओडिशा भाजपा अनावश्यक रूप से उपद्रव पैदा कर रही है, जिसे ओडिशा के लोग बहुत अच्छी तरह से समझ चुके हैं.’

रिपोर्ट के अनुसार, इस राजनीतिक तनातनी के बीच जिन किसानों की फसल अभी नहीं बिकी है, उन्होंने चोरी होने से बचाने के लिए यार्ड्स पर रात के दौरान निगरानी शुरू कर दी है.

पश्चिमी ओडिशा में एक किसान नेता अशोक प्रधान ने कहा, ‘अधिकांश किसानों की केंद्रीकृत टोकन की अवधि समाप्त हो गई है और वे अब इसके नवीनीकरण का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि उपज बिक नहीं सकी है.’

प्रधान ने कहा, ‘अन्य वर्षों के विपरीत इस साल सौभाग्य से कोई कीट संक्रमण या प्राकृतिक आपदा नहीं थी, यही वजह है कि फसल अच्छी थी. हालांकि, खरीद से संबंधित बहुत सारे मुद्दे हैं, जैसे- किसानों को यार्डों में एमएसपी से नीचे बेचने के लिए मजबूर करना.’

प्रधान ने आगे कहा, ‘पहले तो सरकार ने प्रत्येक एकड़ सिंचित भूमि के लिए 19 क्विंटल धान की खरीद और हर एकड़ गैर-सिंचित भूमि के लिए 13 क्विंटल की सीमा को संशोधित नहीं किया. नतीजतन, हजारों किसानों को बिना बिके धान के साथ छोड़ दिया गया, जिसे उन्हें एमएसपी के आधे दाम पर बेचना पड़ा. तब अधिकांश के लिए केंद्रीकृत टोकन प्रणाली का अर्थ एक लंबा इंतजार है, जो उनके संकटों को बढ़ाता है.’

इस बीच राज्य सरकार ने शुक्रवार को प्राथमिक कृषि समितियों (पीएसीएस) के 15 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया और धान खरीद में अनियमितता के आरोप में सेवा से डाटा एंट्री ऑपरेटर को बर्खास्त कर दिया. उन्हें चार जिलों – संबलपुर, बलांगीर, बौध और क्योंझर में निलंबित किया गया है.

वहीं, दूसरी तरफ बीजेडी सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से उपभोक्ता मामलों, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल के साथ बातचीत की और चावल की खरीद पर लगी सीमा के मुद्दे पर जल्द समाधान की मांग की.

इस हफ्ते की शुरुआत में ही खाद्य आपूर्ति मंत्री स्वैन ने पीयूष गोयल को धान खरीद के लिए लंबित सब्सिडी के दावों के बारे में और एफसीआई के कच्चे चावल के बारे में फैसले से उन्हें अवगत कराया था.

उन्होंने लिखा था, ‘चूंकि ओएससीएससी (ओडिशा स्टेट सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड) द्वारा बैंक वित्त की स्वीकृत सीमा सहित सभी संसाधनों को समाप्त कर दिया गया है, इसलिए लंबित सब्सिडी को तत्काल जारी किया जा सकता है, क्योंकि किसानों से धान की खरीद बुरी तरह प्रभावित होगी.’

स्वैन ने यह भी कहा कि एफसीआई के फैसले का राज्य बहुत ही अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. स्वैन ने बताया कि मौजूदा विपणन सत्र में एफसीआई द्वारा निकाले जाने वाला अनुमानित अधिशेष 30 लाख मीट्रिक टन की सीमा में है.