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अरुणाचल प्रदेश में चीनी गांव के ख़िलाफ़ भाजपा ने प्रदर्शन किया, चीन के राष्ट्रपति का पुतला फूंका

चीन द्वारा क़रीब सवा साल में अरुणाचल प्रदेश के विवादित क्षेत्र में एक नया गांव बसाने का मामला हाल ही में सामने आया है. यह गांव प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी ज़िले में त्सारी नदी के तट पर स्थित एक ऐसे क्षेत्र में है, जो भारत और चीन के बीच लंबे समय से विवादित है. यह भारतीय क्षेत्र 1959 से चीनी नियंत्रण में है.

अरुणाचल प्रदेश में अगस्त 2019 और नवंबर, 2020 की सैटेलाइट तस्वीरें. (फोटो साभार: एनडीटीवी)

अरुणाचल प्रदेश में अगस्त 2019 और नवंबर, 2020 की सैटेलाइट तस्वीरें. (फोटो साभार: एनडीटीवी)

ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं ने राज्य के ऊपरी सुबनसिरी जिले में चीन द्वारा एक गांव के निर्माण के खिलाफ शनिवार को प्रदर्शन किया और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का पुतला जलाया.

भाजपा प्रवक्ता टेची नेचा ने कहा कि चीन अक्सर अरुणाचल प्रदेश को अपना क्षेत्र बताता है और राज्य में इस तरह की घुसपैठ करता है.

नेचा ने संवाददाताओं से कहा, ‘चीन की इन हरकतों की हम कड़ी निंदा करते हैं और बीजिंग को कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि हम भारतीय हैं और भारतीय रहेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘उस क्षेत्र (जहां चीन ने कथित तौर पर निर्माण किया है) पर चीन ने कांग्रेस के शासन काल में 1959 में कब्जा किया था और पार्टी इसकी रक्षा करने या राज्य के सीमावर्ती इलाकों का विकास करने में विफल रही.’

उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ भाजपा सरकार मैकमोहन रेखा के पास 2000 किलोमीटर लंबे अरुणाचल फ्रंटियर राजमार्ग का निर्माण करा रही है.

उन्होंने कहा, ‘ऊपरी सियांग के गेलिंग और अंजॉ जिले के चाग्लागाम और काहो जैसे सीमावर्ती इलाकों में सड़कें और पुल पहले ही पूरे हो चुके हैं, जबकि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में सड़कों के निर्माण के लिए कोई प्रयास नहीं किया था.’

संसद में भाजपा सांसद तापिर गाओ द्वारा बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद केंद्र सरकार की खुफिया विफलता या लापरवाही होने से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने ऐसी संभावनाओं को खारिज कर दिया और कहा कि राजनयिक कारणों के कारण केंद्र सरकार को जवाब देने में समय लग सकता है.

वास्तव में नवंबर 2020 में जब सैटेलाइट तस्वीर ली गई थी तब अरुणाचल प्रदेश से भाजपा सांसद तापिर गाओ ने राज्य में चीनी अतिक्रमण को लेकर लोकसभा को चेतावनी दी थी और उन्होंने खास तौर पर ऊपरी सुबरसिरी जिले का उल्लेख किया था.

बता दें कि बीते 18 जनवरी को सैटेलाइट आधारित तस्वीरों के जरिये एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के विवादित क्षेत्र में एक नया गांव बसाया है और इसमें करीब 101 घर हैं.

यह गांव ऊपरी सुबनसिरी जिले में त्सारी नदी के तट पर स्थित एक ऐसे क्षेत्र में है, जो भारत और चीन के बीच लंबे समय से विवादित है और इसे सशस्त्र संघर्ष द्वारा चिह्नित किया गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि 1 नवंबर 2020 को खींची गईं इन तस्वीरों का विभिन्न विशेषज्ञों ने विश्लेषण किया है. जिन्होंने पुष्टि की है कि निर्माण भारतीय सीमा के भीतर करीब 4.5 किलोमीटर में किए गए हैं.

सरकारी मानचित्र के अनुसार, हालांकि यह क्षेत्र भारतीय क्षेत्र में है, लेकिन 1959 से यह चीनी नियंत्रण में है. शुरुआत में यहां सिर्फ चीन की एक मिलिट्री पोस्ट थी, लेकिन इस समय एक पूरा गांव बसा दिया गया है, जिसमें हजारों लोग रह सकते हैं.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले बीते 22 जनवरी को ऊपरी सुबनसिरी जिले के स्थानीय लोग, युवा और अन्य संगठनों जैसे- ऑल टैगिन यूथ ऑर्गनाइजेशन, ऑल गिबा सर्कल विजिलेंस फोरम और न्यू मार्केट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया था.

इस मामले के सामने आने के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने बीते 21 जनवरी को कहा गया था कि ‘अपने खुद के क्षेत्र में’ चीन की विकास और निर्माण गतिविधियां सामान्य और दोषारोपण से परे हैं, क्योंकि यह हमारा क्षेत्र है.

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने एक मीडिया ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘जंगनान क्षेत्र (दक्षिण तिब्बत) पर चीन की स्थिति स्पष्ट और स्थिर है. हमने कभी भी तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं दी.’

चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिण तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत हमेशा कहता रहा है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न और अखंड हिस्सा है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)