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यदि ट्रैक्टर परेड में कोई बाधा उत्पन्न की जाती है तो सड़क जाम करें: राकेश टिकैत

कृषि क़ानूनों के विरोध में राष्ट्रीय राजधानी में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में ट्रैक्टर परेड निकालने का आह्वान किया है. उत्तर प्रदेश से ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि प्रशासन ने पेट्रोल पंपों को निर्देश दिया है कि परेड में शामिल हो रहे किसानों के ट्रैक्टरों के लिए तेल न दें.

राकेश टिकैट. (फोटो: पीटीआई)

राकेश टिकैट. (फाइल फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में किसानों की ट्रैक्टर रैली (परेड) को लेकर उत्तर प्रदेश में प्रशासन के निर्देश पर पेट्रोल पंपों द्वारा तेल न देने की शिकायतों के बाद भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने बीते रविवार को कहा कि यदि ट्रैक्टर रैली में कोई बाधा उत्पन्न की जाती है तो जो जहां हैं, वहीं पर रोड ब्लॉक करें.

टिकैत ने कहा कि सरकार यह गलतफहमी दिमाग से निकाल दे कि किसान दिल्ली से वापस जाएगा, जब तक बिल वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं.

किसान नेता ने कहा, ‘आखिर सरकार चाह क्या रही है. डीजल नहीं देंगे तो क्या ट्रैक्टर दिल्ली नहीं आ पाएगा? ये गलतफहमी सरकार न पाले. किसान इससे रुकेगा नहीं. ऐसा लगता है कि उत्तर प्रदेश सरकार भी एक आंदोलन कराने के मूड में है. वहां पर भी हमारे बहुत मामले हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘किसान सड़क या हाइवे के ऊपर अपना ट्रैक्टर लगाएं और वहीं बैठ जाएं. ये लड़ाई किसानों को मजबूती से लड़नी पड़ेगी. जंग छिड़ चुकी है, अब तो घर से निकलना पड़ेगा.’

टिकैत ने कहा कि ट्रैक्टर परेड में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से लगभग 25,000 ट्रैक्टर हिस्सा लेंगे.

टिकैत ने यह भी कहा है कि मुरादाबाद से उन्हें एक फोन आया था, जिससे पता चला कि वहां पेट्रोल पंप ट्रैक्टरों को डीजल देने से इनकार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह बताता है कि ट्रैक्टर परेड को रोकने की कोशिशें लगातार जारी हैं.

वैसे तो दिल्ली पुलिस ने ट्रैक्टर रैली की इजाजत दे दी है, लेकिन इसमें एक शर्त ये है कि राजपथ पर होने वाले परेड के बाद ये रैली निकाली जा सकती है.

प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों के अनुसार, परेड में दो लाख से अधिक ट्रैक्टरों के भाग लेने की उम्मीद है और रैली के करीब पांच मार्ग होंगे. दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस परेड समाप्त होने के बाद दोपहर 12 बजे ट्रैक्टर परेड निकाली जाएगी.

मालूम हो कि सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश, विशेषकर गाजीपुर, से जुड़ीं कई ऐसी खबरें वायरल हो रही हैं, जहां ‘आधिकारिक आदेश’ के हवाले से ये बताया जा रहा है कि प्रशासन ने पेट्रोल पंपों को निर्देश दिया है कि दिल्ली में होने वाली ट्रैक्टर रैली के मद्देनजर वे किसानों के ट्रैक्टर में तेल न दें.

ऐसी कुछ तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं जिसमें लिखा है, ‘ट्रैक्टर एवं बोतल में तेल नहीं दिया जाएगा.’

हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, ‘मेरठ के जिला पूर्ति अधिकारी नीरज सिंह ने बताया, सुरक्षा के मद्देनजर शासन की ओर से आदेश जारी किए गए हैं. 26 जनवरी को किसान आंदोलन के मद्देनजर विशेष एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं. बोतल ड्रम या कृषि यंत्र लगे वाहनों में डीजल नहीं दिया जाएगा.’

हालांकि अब गाजीपुर पुलिस ने दो पुलिस स्टेशनों द्वारा जारी किए गए इस आदेश को वापस ले लिया है. पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि सुहवाल और सैदपुर पुलिस थानों के प्रभारी ने ऐसे आदेश जारी किए हैं तो वे अचंभित हो गए और एएसपी (ग्रामीण) से मामले की जांच करने को कहा.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस संबंध में कहा, ‘किसानों की गणतंत्र दिवस ट्रैक्टर परेड रोकने के लिए ट्रैक्टरों को पंपों पर डीज़ल न दिए जाने के निर्देश की ख़बर मिली है. भाजपा, किसान के ख़िलाफ़ निम्न कोटि का षड्यंत्र कर रही है. कहीं किसान ‘डीज़ल बंदी’ का जवाब, भाजपाइयों की ‘नाकाबंदी’ से देने लगे तो क्या होगा.’

मालूम हो कि ये पहला मौका नहीं है कि जब भाजपा शासित राज्यों ने किसानों को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए इस तरह के अप्रत्याशित कदम उठाए हों.

इससे पहले पिछले साल नवंबर महीने में जब हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की तरफ कूच कर रहे थे तो राज्य सरकारों ने वॉटर कैनन, आंसू गैस के गोले और लाठीचार्ज समेत हरसंभव कदम उठाए. जब किसान इतने पर भी नहीं रुके तो राष्ट्रीय राजमार्ग को भी खोद दिया गया, ताकि किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पार न कर सकें.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर समेत तमाम भाजपा नेता ट्रैक्टर रैली के खिलाफ हैं और इसे राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस में व्यवधान पैदा करने वाला कदम बताया है.

हालांकि किसानों का कहना है कि ये दिवस सिर्फ सरकार का ही नहीं, बल्कि देश के हर एक नागरिक का है और वे इसे अपने तरीके से मनाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि इस दिन वे ट्रैक्टर रैली निकालकर अपने अधिकारों का उपयोग करेंगे और देश को इन कानूनों की कमियों को बताएंगे.

इस दौरान पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के कई हिस्सों में रैली की तैयारी चल रही है. साथ ही मध्य प्रदेश में भी इस एक तरह के विरोध के लिए बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है.