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असमानता दूर करने में सरकारों की विफलता की कीमत चुका रही है दुनिया: ऑक्सफैम

विश्व आर्थिक मंच की दावोस एजेंडा शिखर बैठक में ऑक्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक गैब्रिएला बुचर ने कहा कि महामारी की आर्थिक मार से उबरने में अरबों लोगों को एक दशक से अधिक का समय लग सकता है, जबकि मार्च 2020 के बाद से सबसे शीर्ष पर सिर्फ़ 10 अरबपतियों का धन आसमान छू लिया है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली/दावोस: कोविड-19 महामारी के दौरान असमानता में सबसे अधिक वृद्धि हुई है. ऑक्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक गैब्रिएला बुचर ने बुधवार को कहा कि सरकारों की इस मुद्दे को हल करने की विफलता की कीमत आज दुनिया को चुकानी पड़ रही है.

विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के ऑनलाइन दावोस एजेंडा शिखर बैठक में ‘सुधार के दौरान सामाजिक न्याय की आपूर्ति’ पर एक सत्र में संबोधित करते हुए बुचर ने कहा, ‘समानता एक ताजा और सैद्धांतिक और गंभीर रूपरेखा है और यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है. हम सरकारों की असमानता को दूर करने में विफलता की कीमत चुका रहे हैं. हमने असमानता में सबसे अधिक वृद्धि देखी है.’

बुचर ने कहा, ‘किनारे पर बैठकर कुछ नहीं होगा. हमें असमानता को समाप्त करना होगा.’

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से दुनियाभर के नेताओं ने प्रणालीगत असमानता को दूर करने की नई प्रतिबद्धताएं जताई हैं और साथ ही उन्होंने सामाजिक न्याय को लेकर अपने हितधारक दायित्व को दर्शाया है. इनमें से कई ने जलवायु न्याय में उल्लेखनीय निवेश की घोषणा की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बुचर ने कहा कि समानता एक ऐसा रूपरेखा है जो 21वीं सदी की अर्थव्यवस्थाओं को चलाने के तरीके को नया रूप दे सकता है.

उन्होंने कहा कि महामारी की आर्थिक मार से उबरने में अरबों लोगों को एक दशक से अधिक का समय लग सकता है, जबकि मार्च 2020 के बाद से सबसे शीर्ष पर सिर्फ 10 अरबपतियों का धन आसमान छू लिया है.

बुचर ने आगे कहा कि ऑक्सफैम के अध्ययन से पता चला है कि 22 हजार अश्वेत और हिस्पैनिक (स्पेनिश भाषा बोलने वाले लोग) अमेरिका में जिंदा होते अगर उनकी मृत्यु दर श्वेत लोगों के समान होती.

इसी सत्र को संबोधित करते हुए लंदन के मेयर सादिक खान ने कहा कि लंदन में श्वेत और अश्वेतों पर स्वास्थ्य नतीजों और कोविड-19 के प्रभाव का अंतर इस बात का संकेत है कि हमें असमानता से निपटने को मिलकर काम करना होगा.

उन्होंने कहा, ‘यदि आप लंदन में एक अश्वेत व्यक्ति हैं, तो एक श्वेत व्यक्ति की तुलना में आपकी जान जाने का जोखिम चार गुना ज्यादा होता है. यदि आप एक मां हैं, तो आपको एक पिता की तुलना में अपनी नौकरी खोने की संभावना 50 प्रतिशत से अधिक हैं.’

सादिक खान ने कहा कि लंदन में श्वेत और अश्वेतों पर स्वास्थ्य नतीजों और कोविड-19 के प्रभाव का अंतर इस बात का संकेत है कि हमें असमानता से निपटने को मिलकर काम करना होगा.

 

बता दें कि गरीबी उन्मूलन के लिए काम करने वाला गैर सरकारी संगठन ऑक्सफैम वार्षिक दावोस शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हर साल वैश्विक असमानता पर एक रिपोर्ट जारी करता है.

हाल ही में संगठन ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें पता चला है कि कोरोना वायरस महामारी ने भारत और दुनियाभर में मौजूदा असमानताओं को और गहरा किया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी पिछले सौ वर्षों का सबसे बड़ा स्वास्थ्य संकट है और इसके चलते 1930 की महामंदी के बाद सबसे बड़ा आर्थिक संकट पैदा हुआ.

रिपोर्ट में कहा गया, ‘लॉकडाउन के दौरान भारतीय अरबपतियों की संपत्ति 35 फीसदी बढ़ी है और 2009 से इन अरबपतियों की संपत्ति 90 फीसदी बढ़कर 422.9 अरब डॉलर हो गई है, जिसके बाद भारत अरबपतियों की संपत्ति के मामले में विश्व में अमेरिका, चीन, जर्मनी, रूस और फ्रांस के बाद छठे स्थान पर पहुंच गया है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)