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सरकार ने शिपिंग कॉरपोरेशन ख़रीदने के लिए बोली की समयसीमा एक मार्च तक बढ़ाई

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल नवंबर में शिपिंग कॉरपोरेशन और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी थी. शिपिंग कॉरपोरेशन में सरकार की 63.75 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, मौजूदा समय में जिसकी कीमत तक़रीबन 2500 करोड़ रुपये है.

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

(प्रतीकात्मक फोटो: रॉयटर्स)

नई दिल्ली: सरकार ने शुक्रवार को शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को खरीदने के लिए प्रारंभिक बोली जमा करने की समयसीमा को एक मार्च तक बढ़ा दिया.

निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) ने बीते साल दिसंबर में प्रबंधन के हस्तांतरण के साथ शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया 63.75 प्रतिशत की अपनी पूरी हिस्सेदारी के रणनीतिक विनिवेश के लिए रुचि पत्र (ईओआई) आमंत्रित किए थे.

बोली जमा करने की अंतिम तारीख 13 फरवरी थी. अब सरकार ने ईओआई को जमा करने की अंतिम तारीख को एक मार्च तक बढ़ा दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक डीआईपीएएम चालू वित्त वर्ष में बिक्री के समापन की दिशा में काम कर रहा है, क्योंकि निवेशक की अच्छी दिलचस्पी है और लेनदेन का आकार बड़ा नहीं है.

शुक्रवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में शिपिंग कॉरपोरेशन के शेयर पिछले दिन के मुकाबले 3.22 प्रतिशत बढ़कर 86.55 रुपये पर बंद हुए थे.

मौजूदा बाजार मूल्य पर शिपिंग कॉरपोरेशन में सरकार की हिस्सेदारी 2,500 करोड़ रुपये की है.

मंत्रिमंडल ने पिछले साल नवंबर में शिपिंग कॉरपोरेशन और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. हालांकि, महामारी के कारण इन योजनाओं में देरी हुई.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 के अपने बजट भाषण में कहा था कि भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, आईडीबीआई बैंक, बीईएमएल लिमिटेड, पवन हंस, नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड सहित कई विनिवेश कार्यक्रम 2021-22 में पूरे हो जाएंगे.

सरकार ने 2021-22 के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा है, जिसे चालू वित्त वर्ष में पांच गुना से अधिक करने का लक्ष्य है. संशोधित अनुमानों के अनुसार चालू वित्त वर्ष के लिए 32,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021-22 में सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (पीएसई) नीति पेश करते हुए कहा था कि चार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों की सरकारी कंपनियों का विनिवेश किया जाएगा. यह नीति रणनीतिक और गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में विनिवेश की स्पष्ट रूपरेखा पेश करेगी.

उन्होंने कहा था कि अगले वित्त वर्ष में आईडीबीआई बैंक, बीपीसीएल, शिपिंग कॉरपोरेशन, नीलाचल इस्पात निगम लि. और अन्य कंपनियों का विनिवेश किया जाएगा. इसके अलावा एलआईसी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए विधायी संशोधन भी 2021-22 में लाए जाएंगे.

बता दें कि बीते 10 फरवरी को महापत्तन प्राधिकरण विधेयक 2020 को राज्यसभा में पारित कर दिया गया. यह विधेयक लोकसभा में पहले ही पारित हो चुका है.

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार इस विधेयक के जरिये बंदरगाहों को निजी हाथों में सौंपना चाहती है, क्योंकि इसमें बंदरगाहों के प्रबंधन के लिए 13 सदस्यीय बोर्ड का प्रस्ताव किया गया है, जिसके सात सदस्य गैर-सरकारी होंगे. ऐसी स्थिति में निर्णय लेने का अधिकार निजी क्षेत्र को मिल जाएगा और इससे देश की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है.

हालांकि सरकार ने बंदरगाहों के निजीकरण के आरोप को इनकार किया और कहा कि बंदरगाहों को पीपीपी मॉडल (सार्वजनिक निजी भागीदारी) के तहत विकसित करने का फैसला किया है और इसी प्रक्रिया के तहत कोलकाता बंदरगाह का कायाकल्प किया गया है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)