भारत

कृषि क़ानूनों के प्रचार अभियान पर केंद्र ने चार महीनों में क़रीब आठ करोड़ रुपये ख़र्चे

कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर राज्यसभा में बताया कि सितंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच उनके मंत्रालय द्वारा कृषि क़ानूनों से संबंधित मुद्दों पर विज्ञापन जारी करने के लिए 7,25,57,246 रुपये का भुगतान किया गया है.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर. (फोटो: पीटीआई)

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शुक्रवार को राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के उत्तर में कहा कि केंद्र द्वारा कृषि कानूनों के बारे में अपने प्रचार अभियान पर लगभग 8 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.

बता दें कि पिछले करीब ढाई महीने से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर केंद्र सरकार के तीन नए और विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन चल रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस सांसद सैयद नासिर हुसैन ने पूछा था कि कृषि कानूनों पर सरकार द्वारा ‘भ्रामक प्रचार के खिलाफ’ [Myth Bursting] के लिए सितंबर, 2020 और जनवरी, 2021 के बीच देश में प्रचार अभियान पर कुल कितना खर्च किया गया.

इस पर तोमर ने जवाब दिया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से सितंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच आउटरीच एंड कम्युनिकेशन ब्यूरो (बीओसी) ने देश में कृषि कानूनों के प्रचार अभियान से संबंधित मुद्दों पर विज्ञापन जारी करने के लिए 7,25,57,246 रुपये का भुगतान किया है.

उन्होंने कहा, ‘किसानों और अन्य हितधारकों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए कृषि कानूनों से संबंधित स्पष्टीकरणों के लिए हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा के अखबारों में बीओसी के माध्यम से प्रिंट विज्ञापन प्रकाशित किए गए थे.’

उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने किसानों और अन्य हितधारकों के बीच इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया और वेबिनार के माध्यम से व्यापक प्रचार के लिए कृषि कानूनों पर तीन प्रचार और दो शैक्षिक फिल्मों के उत्पादन पर 67,99,750 रुपये खर्च किए थे.’

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही प्रिंट विज्ञापन के लिए सामग्री तैयार पर 1,50,568 रुपये का विविध खर्च हुआ.

विदेश में स्थित सभी सरकारी विभागों, एजेंसियों, और भारतीय दूतावासों, जिन्हें कृषि कानूनों के प्रचार अभियान पर ‘मिथकों का खंडन’ करने और साझा करने के लिए कहा गया था, का विवरण मांगने वाले सांसद से एक अन्य प्रश्न के जवाब में मंत्री ने कहा कि विदेश मंत्रालय द्वारा प्रदान की गई जानकारी के अनुसार, इसके तहत कोई खर्च नहीं किया गया था.

उन्होंने कहा, ‘हालांकि, मिशन/पोस्ट नियमित राजनयिक कार्यों के हिस्से के रूप में सोशल मीडिया पर अपने आउटरीच के तहत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू) आदि सहित, कृषि कानूनों पर प्रवासियों के साथ सरकार की विचारशील स्थिति और उपयोगी जानकारी साझा करते हैं.’

इससे पहले बीते पांच फरवरी को तोमर ने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल के एक सवाल के जवाब में कहा था कि केंद्र के पास तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों के विरोध के संबंध में नवंबर 2020 से जनवरी 2021 तक किसानों की मौत और आत्महत्या के मामलों की कुल संख्या का कोई रिकॉर्ड नहीं है.

मंत्री ने आगे कहा, ‘गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट दी है कि प्रश्न में उठाए गए मुद्दों पर देने के लिए कोई विशेष जानकारी नहीं है. हालांकि, दिल्ली पुलिस द्वारा यह सूचित किया गया है कि किसानों के विरोध के दौरान दो व्यक्तियों की मौत हो गई और एक ने आत्महत्या कर ली.’

एक अन्य प्रश्व के जवाब में उन्होंने कहा था, ‘तीन कानूनों के खिलाफ विरोध करने के लिए दिल्ली की ओर मार्च कर रहे किसानों पर दिल्ली पुलिस द्वारा किसी एक्सपायर्ड आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल नहीं किया गया था.’

क्या सरकार मृतक किसानों के परिवारों को किसान कल्याण कोष से वित्तीय सहायता प्रदान करेगी? इस प्रश्न का उत्तर तोमर ने ‘नहीं’ में दिया था.

वहीं, बीते शुक्रवार, 12 फरवरी को यह पूछे जाने पर कि इस चल रहे आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के परिवारों और बच्चों को पिछले दो महीनों के दौरान प्रदान किए गए पुनर्वास और सहायता का ब्योरा क्या है, तोमर ने कहा, ‘कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है.’

मालूम हो कि दो महीने से ज्यादा समय से चल रहे किसान आंदोलन के दौरान बीते 20 जनवरी तक कम से कम पांच लोग दिल्ली के विभिन्न प्रदर्शन स्थलों पर आत्महत्या कर चुके हैं. इसी तरह किसान आंदोलन के दौरान विभिन्न कारणों से कई किसानों की जान जा चुकी हैं.

बता दें कि हजारों किसान, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों से आए किसान, दो महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर डेरा डाले हुए हैं, जो तीन नए कृषि कानूनों को रद्द करने की और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग कर रहे हैं.

केंद्र और 41 प्रदर्शनकारी किसान यूनियनों के बीच 11 दौर की वार्ता अभी तक अनिर्णायक रही है, हालांकि केंद्र ने 18 महीनों के लिए कानूनों के निलंबन सहित रियायतें देने की पेश की है, जिन्हें किसान संगठनों ने खारिज कर दिया है.

केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कृषि से संबंधित तीन विधेयकों– किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020, किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020- के विरोध में पिछले डेढ़ महीने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

केंद्र सरकार इन कानूनों को कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार के रूप में पेश कर रही है. हालांकि, प्रदर्शनकारी किसानों ने यह आशंका व्यक्त की है कि नए कानून न्यूनतम समर्थन मूल्य की सुरक्षा और मंडी प्रणाली को खत्म करने का मार्ग प्रशस्त करेंगे तथा उन्हें बड़े कॉरपोरेट की दया पर छोड़ देंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)