दुनिया

पड़ोसी देशों में भाजपा सरकार बनाने के बिप्लब देब के बयान पर श्रीलंका के बाद नेपाल ने आपत्ति जताई

बीते शनिवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने कहा था कि अमित शाह ने भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए पार्टी के नेताओं से कहा था कि भाजपा अन्य क्षेत्रीय देशों में ‘आत्मनिर्भर दक्षिण एशिया’ पहल के तहत शासन स्थापित करेगी और अब श्रीलंका और नेपाल में भी विस्तार करना है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

काठमांडू: नेपाल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एवं त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब द्वारा हाल में दिए गए उस बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हवाले से कहा था कि पार्टी जल्द ही हिमालयी राष्ट्र में अपनी सरकार बनाएगी.

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञवाली ने मंगलवार को इसकी पुष्टि की कि नेपाल सरकार ने भारत के सत्ताधारी दल के नेता की टिप्पणी पर अपनी औपचारिक आपत्ति जता दी है.

ज्ञवाली ने एक नेपाली ट्विटर उपयोगकर्ता के एक ट्वीट के जवाब में कहा, ‘औपचारिक रूप से आपत्ति जतायी जा चुकी है.’

‘माई रिपब्लिका’ समाचारपत्र ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने अरिंदम बागची में समक्ष सरकार की आधिकारिक आपत्ति दर्ज करायी है. बागची भारत के विदेश मंत्रालय में नेपाल और भूटान मामलों के प्रभारी संयुक्त सचिव हैं.

वहीं, नेपाल की सत्ताधारी नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी और मुख्य विपक्षी नेपाली कांग्रेस ने शाह की कथित टिप्पणी की आलोचना की और कहा कि यह नेपाल की संप्रभुता को कर करता है.

इससे पहले सोमवार को, श्रीलंका के चुनाव आयोग के अध्यक्ष निमल पुंचीहेवा ने द्वीपीय देश में एक राजनीतिक इकाई स्थापित करने की भाजपा की कथित योजना के उल्लेख संबंधी खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि देश का चुनाव कानून इस तरह की व्यवस्था की अनुमति नहीं देता है.

दरअसल मीडिया की खबरों में कहा गया है कि देब ने शनिवार को कहा था कि शाह ने भाजपा अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए पार्टी के नेताओं से कहा था कि भाजपा अन्य क्षेत्रीय देशों में ‘आत्मनिर्भर दक्षिण एशिया’ पहल के तहत शासन स्थापित करेगी.

एबीपी न्यूज के अनुसार, मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब द्वारा 2018 में त्रिपुरा विधानसभा चुनाव की तैयारी के दौरान अमित शाह से की गई बातचीत को लेकर कहा कि जब अमित शाह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, उस दौरान एक बैठक में भारत में सभी राज्यों में पार्टी की जीत के बाद विदेशी विस्तार को लेकर भी चर्चा की गई थी.

उसी बातचीत के आधार पर बिपल्ब देब ने कहा, ‘हम अतिथिगृह में बात कर रहे थे तब अजय जम्वाल ने कहा था कि भाजपा ने कई राज्यो में अपनी सरकार बनाई. इसी के जवाब में अमित शाह ने कहा था कि अब श्रीलंका और नेपाल में भी विस्तार करना है.’

केंद्रीय बजट की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ‘यह आत्मनिर्भर दक्षिण एशिया को बनाने की दिशा में एक कदम है. भारत की नीतियां और कार्य बांग्लादेश, भूटान और नेपाल को आत्मनिर्भर बनाने में सक्षम हैं.’

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, केरल और तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए देब ने कहा कि भाजपा दोनों राज्यों में सत्ता में आएगी.

देब ने कहा, ‘केरल में अब न तो माकपा होगी और न ही कांग्रेस. नरेंद्र मोदी वहां जा रहे हैं और अमित शाह पहले ही वहां पहुंच चुके हैं. तमिलनाडु में भी हम अगली सरकार बनाएंगे. भाजपा के अलावा कोई सरकार नहीं होगी.’

देब के बयान के 24 घंटे के अंदर ही पार्टी की राज्य इकाई उनके समर्थन में आ गई और कहा कि वह भाजपा की दीर्घकालिक वैचारिक लक्ष्य की बात कर रहे हैं.

त्रिपुरा भाजपा के प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्य ने कहा, ‘हमने लंबे समय से अपने भारतीय दर्शन और संस्कृति को विभिन्न देशों तक पहुंचाने का काम शुरू किया. हम कभी भी चुनाव लड़ने को अपना प्राथमिक उद्देश्य नहीं मानते हैं. हम हर जगह लोगों को जीतने पर विचार कर रहे हैं.’

यह दावा करते हुए कि कांग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी की नेपाली कांग्रेस या कम्युनिस्ट पार्टियों जैसी पार्टियों के रूप में वैश्विक मौजूदगी है, उन्होंने पूछा कि भाजपा की विचारधारा दुनियाभर में क्यों नहीं फैल सकती है.

उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि भारतीय संस्कृति, दर्शन सबसे अच्छे हैं और हम इसे अन्य देशों में फैलाना चाहते हैं. हम अकेले राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए काम नहीं करते हैं. बिप्लब देब ने ठीक यही बात कही. इसमें क्या गलत है?’

वहीं विपक्षी माकपा और कांग्रेस ने नेपाल और श्रीलंका जैसे संप्रभु देशों के खिलाफ अपने सबसे अलोकतांत्रिक भाषण के लिए बिप्लब के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है.

इसके साथ ही शाह को देशों में सत्ता पर कब्जा करने की योजना के बारे में अपने दावे की जांच के लिए बुलाने के लिए कहा है.

दिल्ली के भाजपा नेताओं ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)