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टूलकिट मामला: दिशा की निजी चैट लीक करने के आरोपों से पुलिस ने हाईकोर्ट में इनकार किया

टूलकिट मामले में गिरफ़्तार कार्यकर्ता दिशा रवि ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि पुलिस को उनके ख़िलाफ़ हो रही जांच से जुड़ी कोई भी सामग्री मीडिया में लीक करने से रोका जाए. अदालत ने इसे लेकर एनबीएसए और कुछ मीडिया संस्थानों को नोटिस जारी किया है.

बेंगलुरु में दिशा रवि की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते विभिन्न संगठनों के लोग. (फोटो: पीटीआई)

बेंगलुरु में दिशा रवि की गिरफ्तारी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते विभिन्न संगठनों के लोग. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दिल्ली हाईकोर्ट से कहा कि उसने किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ साझा करने के मामले में गिरफ्तार जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि के मामले की जांच से जुड़ी कोई भी जानकारी मीडिया में लीक नहीं की है.

दिशा रवि ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अनुरोध किया है कि पुलिस को उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी से जुड़ी जांच की कोई भी सामग्री मीडिया में लीक करने से रोका जाए.

पुलिस की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह के समक्ष यह दलील दीं.

अदालत ने पुलिस को यह हलफनामा दाखिल करने को कहा कि उसने मीडिया को जांच से संबंधित कोई भी सामग्री लीक नहीं की है.

सुनवाई के दौरान, राष्ट्रीय प्रसारण मानक प्राधिकरण (एनबीएसए) और कुछ मीडिया घरानों के वकील उपस्थित नहीं थे जिनके नाम याचिका में लिए गए हैं.

इसके बाद अदालत ने उन्हें नोटिस जारी करते हुए कहा कि मामले पर आगे की सुनवाई शुक्रवार को की जाएगी.

याचिका में मीडिया को उनकी वॉट्सऐप पर हुई बातचीत या अन्य चीजें प्रकाशित करने से रोकने का भी अनुरोध किया गया है.

रवि ने अपनी याचिका में कहा कि वे ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित उनकी गिरफ्तारी और मीडिया ट्रायल से काफी दुखी हैं, जहां उन पर प्रतिवादी 1 (पुलिस) और कई मीडिया घरानों द्वारा स्पष्ट रूप से हमला किया जा रहा है.’

उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ द्वारा 13 फरवरी को बेंगलुरु से उनको गिरफ्तार किया जाना ‘पूरी तरह से गैर कानूनी और निराधार था.’

उन्होंने दलील दी कि मौजूदा परिस्थितियों में इस बात की ‘काफी आशंका’ है कि आम जनता इन खबरों से याचिकाकर्ता को दोषी मान ले.

याचिका में कहा, ‘इन परिस्थितियों में, और प्रतिवादी को उनकी निजता, उनकी प्रतिष्ठा और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन करने से रोकने के लिए, याचिकाकर्ता वर्तमान याचिका को आगे बढ़ा रही है.’

याचिका में आरोप लगाया गया है कि जांच संबंधी सामग्री मीडिया में लीक की जा रही है और पुलिस द्वारा किए जा रहे संवाददाता सम्मेलन ‘पूर्वाग्रह से ग्रसित’ और ‘उनके निष्पक्ष सुनवाई और उनके निर्दोष होने की संभावना के अधिकार का उल्लंघन करता है.’

जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करने वाले ‘टूलकिट गूगल दस्तावेज’ को साझा किया था.

‘टूलकिट गूगल दस्तावेज’ की जांच कर रही दिल्ली पुलिस ने बेंगलुरु की कार्यकर्ता दिशा रवि को गिरफ्तार किया है, जबकिमुंबई की वकील निकिता जैकब और पुणे के इंजीनियर शांतनु मुलुक को अदालत ने अग्रिम जमानत दे दी है.

दिल्ली की एक अदालत ने 14 फरवरी को रवि को पांच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था, जब एजेंसी ने कहा था कि भारत सरकार के खिलाफ एक कथित ‘बड़ी साजिश’ की जांच करने और खालिस्तान आंदोलन से संबंधित उनकी कथित भूमिका का पता लगाने के लिए उनकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है.

बता दें कि टूलकिट किसी भी मुद्दे को समझाने के लिए बनाया गया एक दस्तावेज है. यह इस बात की भी जानकारी देता है कि किसी को समस्या के समाधान के लिए क्या करना चाहिए. इसमें याचिकाओं के बारे में जानकारी, विरोध प्रदर्शन और जन आंदोलनों के बारे में जानकारी शामिल हो सकती है.

जिस टूलकिट को पुलिस राजद्रोह संबंधी साजिश का हिस्सा होने का दावा कर रही है दरअसल में उसमें किसान आंदोलन से संबंधित लेखों, सोशल मीडिया हैंडल्स और सूचनाओं का संकलन है ताकि कोई भी उसके बारे में जानकारी हासिल कर सके और उसे साझा कर सके.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)