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शांतिपूर्ण तरीके से हुआ किसानों का रेल रोको प्रदर्शन, रेलवे ने कहा- ट्रेन परिचालन पर मामूली असर

किसान आंदोलन के प्रमुख संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि क़ानूनों को वापस लेने की मांग के लिए दबाव बनाने को लेकर गुरुवार को चार घंटे के रेल रोको प्रदर्शन का आह्वान किया था. इस दौरान विभिन्न राज्यों में रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शन करते हुए पटरियों को अवरुद्ध कर दिया गया और नारेबाज़ी हुई.

रेल रोको प्रदर्शन के तहत गाजियाबाद में ट्रैक पर बैठे किसान. (फोटो: पीटीआई)

रेल रोको प्रदर्शन के तहत गाजियाबाद में ट्रैक पर बैठे किसान. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के तीन नए और विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले करीब तीन महीने से प्रदर्शन कर रहे किसान गुरुवार को देशभर के रेलवे स्टेशनों पर इकट्ठा हुए और चार घंटे के राष्ट्रव्यापी रेल रोको प्रदर्शन के तहत कई जगहों पर ट्रेन की पटरियों पर बैठ गए. वहीं एहतियात के तौर पर अधिकारी ट्रेनों को स्टेशनों पर ही रोक दे रहे थे.

किसान आंदोलन के प्रमुख संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के लिए दबाव बनाने को लेकर 18 फरवरी को दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक ‘रेल रोको’ का आह्वान किया था.

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में किसान गीता जयंती एक्सप्रेस के इंजन पर चढ़ गए थे. हालांकि, ट्रेन उस वक्त खड़ी थी. कुरुक्षेत्र से रेलवे अधिकारियों ने बताया, ‘ट्रेन कुरुक्षेत्र स्टेशन से अपराह्न तीन बजे के बाद रवाना होने वाली थी.’

अधिकारियों ने बताया कि पंजाब में किसान दिल्ली-लुधियाना-अमृतसर रूट पर कई जगह ट्रेन की पटरियों पर बैठ गए थे.

उन्होंने बताया कि जालंधर में किसानों ने जालंधर कैंट-जम्मू रूट और मोहाली में भी ट्रेन की पटरियां अवरुद्ध कर दी थीं.

अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा में प्रदर्शन करने वालों में महिलाएं भी शामिल हैं. राज्य के अंबाला, कुरुक्षेत्र, पानीपत, पंचकुला और फतेहाबाद में किसान जगह-जगह पटरियों पर बैठ गए थे.

अंबाला से भारतीय किसान यूनियन के नेता गुलाब सिंह मानकपुर के नेतृत्व में किसानों का एक समूह अंबाला कैंट स्टेशन से करीब दो किलोमीटर दूर शाहपुर गांव में पटरियों पर बैठे हुए थे.

किसान नेता ने कहा, ‘कृषि कानून वापस लिए जाने तक हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा.’

अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सरकारी रेलवे पुलिस तथा राज्य पुलिस बल के कर्मियों को तैनात किया गया है.

उत्तर रेलवे के फिरोजपुर डिवीजन ने ट्रेनों को स्टेशन पर ही रोकने का फैसला लिया है ताकि यात्रियों को ‘रेल रोको’ आह्वान के कारण परेशानी न उठानी पड़े.

अधिकारियों ने बताया कि किसानों के ‘रेल रोको’ आह्वान के कारण ट्रेनें देरी से चल सकती हैं. उन्होंने बताया कि प्रदर्शन समाप्त होने के बाद सुरक्षा नियमों का पालन करते हुए ट्रेन सेवा पुन: बहाल की जाएगी.

हरियाणा में रेलवे पुलिस के अलावा राज्य पुलिस के कर्मियों को भी बड़ी संख्या में प्रदर्शन स्थलों और विभिन्न स्टेशनों पर तैनात किया गया था.

अंबाला डिवीजन के संभागीय प्रबंधक जीएम सिंह ने बताया कि ‘रेल रोको’ आह्वान के कारण कोई ट्रेन रद्द नहीं हुई है.

रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे के बीच अंबाला कैंट स्टेशन से होकर चार ट्रेनें गुजरने वाली थीं.

भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्रहान) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने बताया कि संगठन के सदस्य पंजाब के नाभा, मनसा, बरनाला, बठिंडा, फिरोजपुर, जालंधर और तरन तारन सहित 22 जगहों पर ट्रेन की पटरियां अवरुद्ध की गईं.

‘रेल रोको’ अभियान के मद्देनजर रेलवे ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही देशभर में रेलवे सुरक्षा विशेष बल (आरपीएसएफ) की 20 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई थीं.

पांच घंटे बंद रहे दिल्ली मेट्रो के चार स्टेशनों के प्रवेश, निकास द्वार

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने रेल रोको प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के दृष्टिकोण से बृहस्पतिवार को करीब पांच घंटे तक टिकरी बॉर्डर सहित कुल चार मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद कर दिए थे.

टिकरी बॉर्डर मेट्रो स्टेशन किसानों के प्रदर्शन स्थल से बिलकुल पास है.

सुबह 11.19 बजे डीएमआरसी ने ट्वीट किया था, ‘सुरक्षा अपडेट, टिकरी बॉर्डर, पंडित श्रीराम शर्मा, बहादुरगढ़ सिटी और ब्रिगेडियर होशियार सिंह मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वारा बंद कर दिए गए हैं.’

इसके बाद दोपहर 4.19 बजे ट्वीट कर बताया कि उपरोक्त सभी स्टेशनों को खोल दिया गया है.

कर्नाटक में रेल रोको को मिश्रित प्रतिक्रिया मिली

केंद्र के कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के रेल रोको प्रदर्शन को बृहस्पतिवार को कर्नाटक में मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली.

बेंगलुरु में प्रदर्शन में कम लोगों ने हिस्सा लिया लेकिन रायचूर, बेलगावी और दावनगेरे में बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हुए.

प्राप्त सूचना के अनुसार, बेंगलुरु के यशवंतपुर स्टेशन, मैसुरू, रायचूर, बेलगावी, विजयपुरा, दावनगेरे, हुबली-धारवाड़, कोप्पल और कोलार में प्रदर्शन हुए.

प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें रोकने के लिए रेलवे स्टेशन में प्रवेश करने का प्रयास किया.

सूत्रों ने बताया कि रायचूर, बेलगावी और दावनगेरे में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया.

बेंगलुरु में किसान नेता कुरुबुरु शांताकुमार के नेतृत्व में प्रदर्शन हुए लेकिन उसका कोई खास प्रभाव नहीं दिखा.

पुणे और औरंगाबाद स्टेशन पर रेल रोककर नारेबाजी की

नए कृषि कानूनों के खिलाफ बृहस्पतिवार को विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों से जुड़े सदस्यों ने महाराष्ट्र के पुणे रेलवे स्टेशन पर ‘रेल रोको’ प्रदर्शन किया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

प्रदर्शन कर रहे किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की अपनी मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए पिछले सप्ताह ‘रेल नाकाबंदी’ की घोषणा की थी. मोर्चा ने कहा था कि पूरे देश में दोपहर 12 बजे से शाम चार बजे तक रेलें रोकी जाएंगी.

श्रमिक कल्याण कार्यकर्ता नितिन पवार ने कहा कि बृहस्पतिवार की दोपहर को कांग्रेस, शिवसेना, राकांपा और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं समेत विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने पुणे रेलवे स्टेशन पर रेल रोको प्रदर्शन में हिस्सा लिया.

उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कोयना एक्सप्रेस को रोककर उसके सामने नारेबाजी की.

रेलवे सुरक्षा बल के एक अधिकारी ने कहा कि अवैध तरीके से रेलवे प्लेटफॉर्म पर आने, रेल की पटरी पार करने और नारेबाजी करने के आरोप में पवार समेत तीन कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

किसानों के एक संगठन ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के लासुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की आवाजाही को बाधित किया.

एक अधिकारी ने बताया कि लासुर रेलवे स्टेशन पर कम से कम 12 लोगों को हिरासत में लिया गया.

रेलवे पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, ‘जालना-मुंबई जनशताब्दी ट्रेन को स्टेशन पर करीब 30 मिनट तक रोका गया. हमने करीब 12 आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया है और आगे जांच की जारी है.’

इसी प्रकार किसानों के संगठन अखिल भारतीय किसान सभा ने औरंगाबाद रेलवे स्टेशन के बाहर धरना दिया.

दोपहर बाद नरेला नहीं आई कोई ट्रेन

दिल्ली के नरेला रेलवे स्टेशन पर बृहस्पतिवार को असमान स्थिति देखने को मिली जहां सैकड़ों की संख्या में पुलिस कर्मी और करीब 20 लोग प्लेटफार्म पर नजर आए. हालांकि कोई व्यक्ति किसी रेलगाड़ी का इंतजार नहीं कर रहा था.

केंद्र के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के ‘रेल रोको प्रदर्शन’ के तहत पंजाब एवं हरियाणा में जगह-जगह रेलगाड़ियों को रोका गया और दोपहर तक नरेला स्टेशन पर कोई रेलगाड़ी नहीं आयी थी.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि नरेला स्टेशन आने वाली ट्रेनों को हरियाणा के सोनीपत में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने रोक दिया.

उन्होंने बताया, ‘झेलम एक्सप्रेस के सुबह स्टेशन से गुजरने के बाद कोई रेलगाड़ी नहीं आई है.’

उन्होंने बताया कि स्थानीय पुलिस एवं भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के करीब 100 सुरक्षाकर्मियों को रेलवे स्टेशन पर तैनात किया गया है जो प्रदर्शन के दौरान किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं.

स्टेशन अधीक्षक एचएस त्यागी ने बताया, ‘एक रेलगाड़ी को बठिंडा (पंजाब) से पूर्वाह्न 11 बजकर 30 मिनट पर आना था जिसे सोनीपत से पहले रोक दिया गया है. अन्य रेलगाड़ियों जिन्हें कुरुक्षेत्र, पानीपत एवं अंबाला के रास्ते आना है, वे प्रभावित होंगी. शाम चार बजे के बाद स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है जब किसान अपना ‘रेल रोको आंदोलन’ समाप्त करेंगे.’

उन्होंने हालांकि, दावा किया कि ‘रेल रोको’ आंदोलन का असर नरेला स्टेशन पर यात्रियों के आने-जाने पर नहीं पडा है.

‘रेल रोको प्रदर्शन’ का रेलगाड़ियों के परिचालन पर बहुत मामूली असर: रेलवे

राष्ट्रीय परिवाहक रेलवे के प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों द्वारा किए गए ‘रेल रोको प्रदर्शन’ का उसकी सेवाओं पर असर नगण्य या न्यूनतम रहा.

प्रवक्ता ने बताया कि अधिकतर जोनल रेलवे ने सूचित किया है कि उनके क्षेत्र में प्रदर्शन की घटना नहीं हुई.

उन्होंने कहा, ‘रेल रोको प्रदर्शन बिना किसी अप्रिय घटना के समाप्त हो गया. पूरे देश में रेलगाड़ियों के परिचालन पर इसका नगण्य या न्यूनतम असर रहा. सभी जोन में रेलगाड़ियों की आवाजाही सामान्य रही.’

प्रवक्ता ने बताया, ‘अधिकतर जोन में प्रदर्शनकारियों द्वारा रेलगाड़ियों को रोकने की एक भी घटना दर्ज नहीं की गई. कुछ रेलवे जोन में कुछ रेलगाड़ियों को रोका गया लेकिन अब ट्रेनों का परिचालन सामान्य है एवं वे बिना बाधा चल रही हैं. रेल रोको प्रदर्शन के दौरान सभी संबंधित पक्षों द्वारा अधिकतम संयम बरता गया.’

इससे पहले प्रदर्शन के चलते रेलवे ने करीब 25 रेलगाड़ियों को पुन: व्यवस्थित किया था.

उत्तर पश्चिम रेलवे ने एक रेल सेवा को रद्द कर दिया वहीं कुछ रेल सेवाओं के संचालन में देरी हुई.

रेलवे ने देशभर में, खासकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में रेलवे पुलिस सुरक्षा बल की 20 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की थीं.

हालांकि, किसानों के ‘रेल रोको’ आह्वान के प्रभाव का पूरा ब्योरा रेलवे ने अभी उपलब्ध नहीं कराया है, लेकिन एक अधिकारी ने कहा कि इसका प्रभाव अंबाला में देखा जा सकता है जहां बड़ी संख्या में भीड़ एकत्र हो गई.

अधिकारी ने कहा कि बताया जा रहा है कि दिल्ली के पास रेलवे स्टेशनों पर भी प्रदर्शनकारी पटरियों पर जुटे. वे गाजीपुर बॉर्डर के नजदीक मोदीनगर रेलवे स्टेशन के पास भी एकत्र हुए.

किसानों ने हरियाणा के चरखी दादरी रेलवे स्टेशन पर भी पटरियों को अवरुद्ध कर दिया. उन्होंने प्रदर्शनकारियों, पुलिसकर्मियों तथा रेलकर्मियों को जलेबी और चाय तथा खाने-पीने की अन्य चीजें वितरित कीं.

अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली-लुधियाना-अमृतसर रेल मार्ग पर पंजाब में कई स्थानों पर प्रदर्शनकारी पटरियों पर बैठ गए.

किसानों ने जालंधर में जालंधर छावनी-जम्मू रेल मार्ग तथा मोहाली जिले में रेल पटरी को अवरुद्ध कर दिया.

अधिकारियों ने बताया कि पंजाब और हरियाणा में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं और रेलवे पुलिस तथा राज्य पुलिस के कर्मियों की तैनाती की गई है.

उत्तर रेलवे के फिरोजपुर मंडल ने ट्रेनों को स्टेशनों पर रोकने का निर्णय किया जिससे कि ‘रेल रोको’ आंदोलन के दौरान यात्रियों को ज्यादा असुविधा का सामना न करना पड़े.

देशभर में रेल रोको प्रदर्शन हुए, विरोध पंजाब-हरियाणा तक सीमित नहीं: किसान नेता

देशभर में छोटे-बड़े स्टेशनों पर रेल पटरियों को बाधित किए जाने के बीच सिंघू बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि यह आंदोलन केवल पंजाब और हरियाणा तक ही सीमित नहीं है.

क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता भजन सिंह ने कहा कि सरकार लगातार यह कह रही है कि नए कृषि कानूनों का विरोध केवल दो राज्यों पंजाब एवं हरियाणा के किसान ही कर रहे हैं लेकिन रेल रोको प्रदर्शन ने सरकार को गलत साबित कर दिया है.

उन्होंने कहा, ‘विभिन्न राज्यों के किसानों ने रेल रोको प्रदर्शन में हिस्सा लिया. इसलिए, रेल पटरियों पर प्रदर्शन करना हमारे लिए महत्वपूर्ण था. जिस तरह रेलवे का देशभर में नेटवर्क है, उसी तरह हमारा प्रदर्शन भी देशभर में हो रहा है.’

पंजाब और हरियाणा के कई रेलवे स्टेशनों के अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक समेत अन्य राज्यों के अलग-अलग हिस्सों में रेल रोको प्रदर्शन किया गया.

वहीं, किसान नेता अमरीक सिंह ने कहा कि इस तरह के विरोध-प्रदर्शन के जरिये किसान सरकार को अपनी एकजुटता दिखाना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, ‘तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की आवश्यकता है और संयुक्त किसान मोर्चा हर तरह से सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा है. हालांकि, हम शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं और आगे भी जारी रखेंगे.’

सिंह ने कहा कि रेल रोको प्रदर्शन केवल चार घंटे तक ही सीमित था क्योंकि किसान सरकार को एक संदेश देना चाहते थे और वे जनता के लिए असुविधा उत्पन्न नहीं करना चाहते थे.

उन्होंने कहा, ‘हम यात्रियों के लिए परेशानी खड़ी करना नहीं चाहते. हम केवल यह चाहते हैं कि सरकार हमारी मांगों को स्वीकार करे ताकि वे भी आराम से सो सकें और हम भी वापस अपने परिवारों के पास लौट सकें.’

सिंघू बॉर्डर पर कई प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि उनके परिवार के सदस्य गांवों में रेल पटरियों पर बैठे हुए हैं.

पंजाब के होशियारपुर से आए जयराम सिंह ने कहा, ‘आज के प्रदर्शन के जरिये पूरा देश जाग रहा है. यह दर्शाता है कि हमारी मांग, पूरे देश की मांग है. हम इस मुद्दे के समाधान को लेकर आशान्वित हैं चाहे इसमें दो या चार महीने ही क्यों ना लग जाएं.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)