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हरियाणाः शवगृह में रखे किसान के शव को चूहों ने कुतरा, जांच के आदेश

मामला सोनीपत का है, जहां बुधवार को केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे एक बुज़ुर्ग किसान की हृदयाघात से मौत होने के बाद उनका शव सरकारी अस्पताल के शवगृह में रखा गया था. अगले दिन मृतक के परिजनों ने शव पर ज़ख्मों के निशान देखे, जिसके बाद यह मामला सामने आया.

(फोटो साभार: India Rail Info)

(फोटो साभार: India Rail Info)

चंडीगढ़: हरियाणा के सोनीपत जिले में एक सरकारी अस्पताल के शवगृह में चूहों ने 72 वर्षीय एक किसान के शव को कुतर दिया, जिसके बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.

यह मामला उस समय सामने आया, जब राजेंद्र के परिवार वालों को गुरुवार सुबह शव के चेहरे और पैर पर जख्मों के निशान दिखे.

अधिकारियों का कहना है कि बैयानपुर के रहने वाले किसान राजेंद्र की दिल का दौरा पड़ने से बुधवार को मौत हो गई थी और उनके शव को बुधवार रात शवगृह में रखा गया था.

सोनीपत के प्रधान चिकित्सा अधिकारी जय भगवान ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन डॉक्टरों की एक टीम बनायी गई है. इसमें उपचिकित्सा अधीक्षक गिन्नी लांबा, संदीप लठवाल और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी सुशील जैन शामिल हैं.

जय भगवान ने बताया, तीन डॉक्टरों की एक टीम मामले की जांच कर रही है और वे देखेंगे कि किसकी तरफ से लापरवाही बरती गई है.

उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की टीम एक दिन के भीतर ही यह रिपोर्ट सौपेंगी.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, मृतक के परिजनों ने इस लापरवाही के लिए अस्पताल में हंगामा किया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की.

मृतक किसान के बेटे प्रदीप का कहना है कि उनके पिता नियमित तौर पर सिंघू बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन में हिस्सा लेने जाते थे और वह चार दिनों तक रसोई गांव के पास प्रदर्शन स्थल पर चार दिनों तक रहे भी थे.

उन्होंने कहा कि उनके पिता की बुधवार रात को तबियत खराब हो गई थी, जिसके बाद वे उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

बता दें कि किसान राजेंद्र सोनीपत के बैयानपुर गांव के निवासी थे.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस घटना पर हैरानी जताते हुए ट्वीट कर कहा, ’73 साल में ऐसा दर्दनाक मंजर शायद कभी ना देखा हो. शहीद किसान के शव को चूहे कुतर जाएं और भाजपा सरकारें तमाशबीन बनी रहें. शर्म से डूब क्यों नहीं मर गए भाजपाई.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)