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मणिपुर: अस्थमा से उबरने के बाद भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को लगाया गया कोविशील्ड टीका, मौत

मामला विष्णुपुर ज़िले का है, जहां 48 वर्षीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नवरेम सुंदरी के परिजनों का दावा है कि कोविड-19 टीका लगवाने से पहले सुंदरी ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को सूचित किया था कि वह एक साल पहले अस्थमा की बीमारी से उबरी थीं और उन्हें एलर्जी की समस्या होती है.

(फोटो: पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

इंफाल: मणिपुर के विष्णुपुर जिले की 48 वर्षीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता नवरेम सुंदरी की शुक्रवार को मौत हो गई. कोविड-19 टीका लगवाने के ठीक एक सप्ताह बाद उनकी मौत हुई है. टीका लगवाने के बाद उनमें प्रतिकूल प्रभाव सामने आए थे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के सूत्रों का कहना है कि 12 फरवरी को दोपहर करीब एक बजे सुंदंरी को कोविशील्ड दिया गया था.

एक दिन बाद उन्होंने बुखार और एलर्जी की शिकायत की. इसे सामान्य साइड इफेक्ट मानते हुए उन्होंने एक स्थानीय दवा की दुकान से दवा ले ली. हालांकि, उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई और उन्हें सीएचसी, मोइरंग में मंगलवार को भर्ती कराया गया.

अगले दिन उन्हें कुंबी के पीएचसी में शिफ्ट कर दिया गया. शुक्रवार को उनका परिवार उन्हें इम्फाल में एक स्वास्थ्य सुविधा में स्थानांतरित करने की योजना बना रहा था लेकिन उनकी हालत और बिगड़ गई और उन्हें फिर से सीएचसी, मोइरंग में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने अंततः दम तोड़ दिया.

इसके बाद उनके परिजनों ने दावा किया कि उनके सहकर्मियों ने बताया कि टीका लगवाने से पहले सुंदरी ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर को सूचित किया था कि वह एक साल पहले अस्थमा की बीमारी से उबरी थीं और उन्हें एलर्जी का सामना करना पड़ रहा है.

परिवार के सदस्य ने कहा कि हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि कोई समस्या नहीं है और एक नर्स को टीका लगाने के लिए कह दिया.

डॉक्टर की ओर से लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों ने उनकी मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कुंबी लाई सैंडहोंग में एक सार्वजनिक बैठक की. उसके शव को रिम्स की मोर्चरी में रखा गया है, जहां शव पोस्टमार्टम होना है.

स्टेट इम्यूनाइजेशन ऑफिसर (एसआईओ) नंदकिशोर ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक उनका विभाग मौत पर टिप्पणी नहीं कर सकता.

हालांकि, मोइरंग पुलिस स्टेशन ने विरोध को देखते हुए स्वत: चिकित्सकीय लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया है.

वहीं, आंगनवाड़ी वर्कर्स एंड हेल्पर्स यूनियन मणिपुर ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सुंदरी के परिजनों को 50 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने की मांग की ताकि जल्द से जल्द उनका अंतिम संस्कार किया जा सके.

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में अब तक कम से कम 38,484 लोगों का टीकाकरण हो चुका है जिसमें 28863 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि टीकाकरण अभियान के बाद गंभीर रिएक्शन/एलर्जी या प्रतिकूल घटनाओं के कोई मामले नहीं हैं और पूरी तरह से ठीक हो गए हैं. हालांकि, कुछ में हल्के रिएक्शन देखे गए थे और उन्हें घरेलू देखभाल की सलाह दी गई थी.

इससे पहले 14 फरवरी को कोविशील्ड का टीका लगवाने के 14 दिन बाद रविवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश के 24 वर्षीय प्रशिक्षु की मौत हो गई थी. हालांकि, प्रशासन ने इसके लिए टीकाकरण को जिम्मेदार मानने से इनकार कर दिया था.

बीते 13 फरवरी को हरियाणा के पानीपत में कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगने के नौ दिन बाद एक आशा कार्यकर्ता की मौत हो गई थी. 35 वर्षीय आशा कार्यकर्ता कविता को तीन फरवरी को कोरोना वैक्सीन की पहली डोज दी गई थी.

हालांकि, प्रशासन का कहना था कि अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की वजह से उनकी मौत हुई.

इससे पहले 26 जनवरी को ओडिशा के नौपाड़ा जिला मुख्यालय अस्पताल में 27 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड नानिकाराम कींट की मौत कोविड-19 वैक्सीन लगाने के तीन दिन बाद हो गई थी. स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि उनकी मौत का टीकाकरण से कोई संबंध नहीं है.

इसी तरह हरियाणा के गुड़गांव में बीते 22 जनवरी को कोविड-19 का टीका लगवाने वाली एक 55 वर्षीय महिला स्वास्थ्यकर्मी की बीते 22 जनवरी को मृत्यु हो गई थी. तब भी अधिकारियों का कहना था कि इसका संबंध टीके से नहीं है.

दूसरी ओर मृतक के परिजनों का कहना था कि उन्हें संदेह है कि उनकी मौत टीका लगने की वजह से हुई है. महिला स्वास्थ्यकर्मी को 16 जनवरी को कोविशील्ड का टीका लगा था. वह गुड़गांव जिले के भांगरोला के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत थीं.

इससे पहले तेलंगाना के निर्मल जिले में कोविड-19 का टीका लगवाने वाले एक 42 वर्षीय स्वास्थ्यकर्मी की मौत का मामला सामने आया था. इस मामले में भी अधिकारियों ने मौत के लिए टीके को जिम्मेदार नहीं ठहराया था.

इसी तरह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 45 वर्षीय मजदूर दीपक मरावी की संदिग्ध परिस्थितियों में बीते साल 21 दिसंबर को मौत हो गई थी.

उन्हें 12 दिसंबर 2020 को पीपुल्स मेडिकल कॉलेज (भोपाल) में भारत बायोटेक और आईसीएमआर द्वारा बनाई गई स्वदेशी कोवैक्सीन की खुराक दी गई थी. मृतक के परिवार का आरोप लगाया था कि वैक्सीन से उनकी जान गई है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)