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उत्तराखंड ग्लेशियर हादसा: तपोवन सुरंग से एक और शव मिला, मृतकों की संख्या बढ़कर 68 हुई

बीते सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली ज़िले की ऋषिगंगा घाटी में ग्लेशियर टूटने से अचानक भीषण बाढ़ आ गई थी. बाढ़ से रैणी गांव में स्थित उत्पादनरत 13.2 मेगावाट ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजना पूरी तरह तबाह हो गई थी, जबकि धौलीगंगा के साथ लगती एनटीपीसी की निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना को व्यापक नुकसान पहुंचा था.

Chamoli: NDRF personnel carry the body of a victim who died in the massive floods caused after a glacier broke off in Joshimath in the Dhauli Ganga river, near Raini village in Chamoli district of Uttarakhand, Tuesday, Feb. 9, 2021. (PTI Photo/Arun Sharma)(PTI02 09 2021 000108B)

उत्तराखंड के चमोली जिले के रैणी गांव में राहत और बचाव कार्य जारी है. (फोटो: पीटीआई)

तपोवन: उत्तराखंड में तपोवन सुरंग से रविवार को एक और शव बरामद किया गया, जिसके साथ ही एक पखवाड़े पहले चमोली जिले में आई आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 68 हो गई है. आधिकारिक सूत्रों ने इसकी जानकारी दी.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रविवार को तपोवन-विष्णुगढ़ जल विद्युत परियोजना की सुरंग से निकाले गए शव की पहचान झारखंड के लोहरदगा जिले के किसको क्षेत्र निवासी 27 वर्षीय सुनील बखला के रूप में हुई है.

उन्होंने बताया कि इसके साथ ही तपोवन सुरंग से अब तक 14 शव बरामद हो चुके हैं.

उन्होंने बताया कि इससे पहले बीते शनिवार को तपोवन बैराज साइट से पांच शव बरामद हुए थे. राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम द्वारा तपोवन बैराज साइट पर निकाले गए पांचों शव की भी शिनाख्त हो चुकी है, जिनमें झारखंड निवासी अमृत कुमार और ज्योतिष वासला, बिहार निवासी मुन्ना कुमार सिंह, उत्तर प्रदेश के लखीमपुर के रहने वाले जलाल और देहरादून के कालसी क्षेत्र के निवासी जीवन सिंह शामिल हैं.

चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने रविवार को ही बैराज साइट पर अतिरिक्त व्यवस्था कर काम शुरू करवाया था.

बता दें कि बीते सात फरवरी को चमोली जिले की ऋषिगंगा घाटी में पर ग्लेशियर टूटने से अचानक भीषण बाढ़ आ गई थी. बाढ़ से रैणी गांव में स्थित उत्पादनरत 13.2 मेगावाट ऋषिगंगा जलविद्युत परियोजना पूरी तरह तबाह हो गई थी, जबकि धौलीगंगा के साथ लगती एनटीपीसी की निर्माणाधीन तपोवन-विष्णुगढ़ जलविद्युत परियोजना को व्यापक नुकसान पहुंचा था.

ग्लेशियर टूटने से अलकनंदा और इसकी सहायक नदियों में अचानक आई विकराल बाढ़ के कारण हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी तबाही मची गई थी.

अचानक आई इस आपदा के चलते वहां स्थित दो पनबिजली परियोजनाओं (ऋषिगंगा और तपोवन विष्णुगढ़) में काम कर रहे तकरीबन 200 लोग लापता हो गए थे, जिनके शव लगातार मिल रहे हैं. अब तक कुल 68 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 136 अन्य व्यक्ति लापता हैं, जिनकी तलाश के लिए बचाव और राहत अभियान जारी है.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)