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किसानों ने आंदोलन तेज़ करने के लिए कई कार्यक्रमों की घोषणा की

किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि 23 फरवरी को ‘पगड़ी संभाल दिवस’ और 24 फरवरी को ‘दमन विरोधी दिवस’ मनाया जाएगा. इस दौरान इस बात पर जोर दिया जाएगा कि किसानों का सम्मान किया जाए और उनके ख़िलाफ़ कोई दमनकारी कार्रवाई न की जाए.

Bathinda: Farmers block a road during their chakka jam protest as part of the ongoing agitation over new farm laws, in Bathinda, Saturday, Feb. 6, 2021. (PT Photo)(PTI02 06 2021 000134B)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों ने अपना आंदोलन तेज करने के लिए 23 से 27 फरवरी के बीच कई कार्यक्रम आयोजित करने की रविवार को घोषणा की.

उन्होंने यह भी कहा कि वे प्रदर्शन को लंबे समय तक चलाने के लिए जल्द ही नई रणनीति तैयार करेंगे.

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि उनके प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत 23 फरवरी को ‘पगड़ी संभाल दिवस’ और 24 फरवरी को ‘दमन विरोधी दिवस’ मनाया जाएगा और इस दौरान इस बात पर जोर दिया जाएगा कि किसानों का सम्मान किया जाए और उनके खिलाफ कोई दमनकारी कार्रवाई न की जाए.

मोर्चा ने कहा कि 26 फरवरी को ‘युवा किसान दिवस’ और 27 फरवरी को ‘मजदूर किसान एकता दिवस’ मनाया जाएगा.

किसान नेता दर्शनपाल ने कहा कि 23 फरवरी को ‘पगड़ी संभाल दिवस’ मनाया जाएगा जो चाचा अजीत सिंह और सहजानंद सरस्वती की याद में मनाया जाएगा. इस दिन किसान अपने क्षेत्र की पगड़ी पहनेंगे.

उन्होंने कहा, ‘24 फरवरी को ‘दमन विरोधी दिवस’ मनाया जाएगा, जिसमें किसान और नागरिक, किसान आंदोलन को दबाने के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे. इस दिन तहसील और जिला मुख्यालयों के जरिए भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा जाएगा.’

पाल ने कहा, ‘26 फरवरी को इस आंदोलन में युवाओं के योगदान का सम्मान करते हुए, ‘युवा किसान दिवस’ आयोजित किया जाएगा. इस दिन एसकेएम के सभी मंचों का संचालन युवा करेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘27 फरवरी को गुरु रविदास जयंती और शहीद चंद्रशेखर आज़ाद के शहादत दिवस के मौके पर ‘किसान मजदूर एकता दिवस’ मनाया जाएगा.’

स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने कहा, ‘सरकार प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी, उन्हें हिरासत में लेने और उनके खिलाफ मामले दर्ज कर हर दमनकारी उपाय अपना रही है. सिंघू बॉर्डर पर किलेबंदी कर दी गई है और वह एक अंतरराष्ट्रीय सीमा की तरह प्रतीत होता है.’

उन्होंने कहा, ‘संसद के आठ मार्च से शुरू हो रहे सत्र के मद्देनजर आंदोलन के लिए दीर्घकालिक योजना पर चर्चा की जाएगी और एसकेएम की अगली बैठक में रणनीति साझा की जाएगी.’

किसान नेता दर्शनपाल ने भी सरकार पर दमन का आरोप लगाया.

उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में ‘ट्रैक्टर परेड’ के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए 122 लोगों में से 32 को जमानत मिल चुकी है.

बीते 18 फरवरी को तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने देशव्यापी रेल रोको प्रदर्शन किया था. संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर हुए इस प्रदर्शन के दौरान तमाम ट्रेनों का आवागमन बाधित रहा, कुछ ट्रेनों को कैंसिल करना पड़ा और कुछ को दूसरे रास्तों से भेजना पड़ा.

26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली और छह फरवरी को चक्का जाम कार्यक्रम के बाद किसानों द्वारा किया गया यह तीसरा बड़ा प्रदर्शन था.

बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए विवादित कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने की मांग को लेकर हजारों किसान करीब तीन महीने से दिल्ली की तीन सीमाओं- सिंघू, टिकरी और गाजीपुर के साथ अन्य जगहों पर भी प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें से अधिकतर किसान पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हैं.

26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा के बाद दिल्ली की सीमाओं को किले में तब्दील कर दिया गया है. पुलिस ने वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए कई स्तरीय बैरिकेडिंग की है. इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है.

केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए कृषि से संबंधित तीन विधेयकों– किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020, किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020 और आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020- के विरोध में पिछले दो महीने से किसान दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

इसे लेकर सरकार और किसानों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है.

किसान तीनों नए कृषि कानूनों को पूरी तरह वापस लिए जाने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दिए जाने की अपनी मांग पर पहले की तरह डटे हुए हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)