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दिशा रवि के वकील का लाखों रुपये फीस लेने का दावा ग़लत, कर रहे हैं निशुल्क पैरवी

फैक्ट चेक: दिल्ली पुलिस ने युवा पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि को ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए किसान आंदोलन समर्थक टूलकिट संबंधी मामले में गिरफ़्तार किया है. रवि के ‘ईसाई’ होने के भ्रामक प्रचार के बाद अब उनके वकील की फीस को लेकर झूठे दावे किए जा रहे हैं.

दिशा रवि. (फोटो साभार: फेसबुक)

दिशा रवि. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्लीः टूलकिट मामले में बेंगलुरु से गिरफ्तार की गईं जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह के फेक न्यूज प्रसारित किए जा रहे हैं.

इन फेक न्यूज में से एक यह है कि दिशा के वकील अखिल सिब्बल उनका केस लड़ने के लिए प्रति सुनवाई पांच से सात लाख रुपये चार्ज कर रहे हैं.

हालांकि ऑल्ट न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, दिशा रवि (22) के वकील अखिल सिब्बल बगैर कोई पैसा लिए  (pro-bono] उनका केस लड़ रहे हैं.

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि को जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए किसानों के आंदोलन का समर्थन करने वाले टूलकिट को साझा करने में कथित भूमिका के चलते 14 फरवरी को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था.

दिशा रवि के निजी चैट मीडिया संस्थानों में लीक हो जाने के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने गिरफ्तारी को सनसनीखेज बनाने से मीडिया को रोकने के लिए अदालत में एक याचिका दायर की थी.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 18 फरवरी को न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड अथॉरिटी, न्यूज18 और टाइम्स नाउ को दिशा रवि और थर्ड पार्टी के बीच के वॉट्सऐप सहित उनके किसी भी निजी चैट को प्रकाशित करने से रोकने के लिए नोटिस जारी किए थे.

दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 फरवरी को मीडिया से दिशा रवि की खबरों को सनसनीखेज नहीं बनाने को कहा था. इस मामले में समाचार चैनलों के वकीलों और सिब्बल के बीच तीखी बहस भी हुई थी.

तभी से अखिल सिब्बल को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें तेज हो गई थीं.

ऑल्ट न्यूज की रिपोर्ट से पता चलता है कि बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया यूजर्स दिशा रवि को लेकर तरह-तरह की फेक न्यूज प्रसारित कर रहे हैं.

इन्हीं में से एक अभिजीत अय्यर मित्रा नाम के यूजर का 19 फरवरी का ट्वीट बहुत वायरल हुआ, जिसे 22,000 से अधिक बार लाइक किया गया और 9,000 बार रिट्वीट किया गया.

जिन लोगों ने इन ट्वीट को दोबारा शेयर किया है, उन यूजर्स को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और कपिल मिश्रा जैसे भाजपा नेता ट्विटर पर फॉलो करते हैं.

वहीं, भाजपा की एक प्रोपेगैंडा वेबसाइट द फ्रस्ट्रेटेड इंडियन ने एक लेख लिखकर एक अलग मामला दर्ज करने का आग्रह किया, जिसमें पैसों के उस स्रोत का पता लगाने को कहा गया, जिसके जरिये दिशा रवि के वकील को भुगतान किया जा रहा है.

लेख में कहा गया, ‘एक बार फिर से मामले की हर सुनवाई के लिए अखिल सिब्बल को पांच से सात लाख रुपये देना सिर्फ एक ही स्थिति में संभव है कि उनके वकील अपनी फीस माफ कर निशुल्क केस (प्रो-बोनो) लड़ रहे हो, जिसकी संभावना नहीं है. ऐसे में फिर दिशा रवि के केस के लिए कौन भुगतान कर रहा है? क्या यह पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन और सिख फॉर जस्टिस जैसे खालिस्तानी संगठन हैं या अन्य समूह हैं, जो अपने निहित स्वार्थ के लिए विश्वपटल पर भारत को बदनाम करना चाहते हैं और मोदी सरकार को अस्थिर करना चाहते हैं?’

इन दावों को खारिज करते हुए अखिल सिब्बल ने कहा कि वे दिशा रवि का केस निशुल्क लड़ रहे हैं.

उन्होंने ऑल्ट न्यूज को बताया, ‘रवि की वकील वृंदा भंडारी ने मुझसे संपर्क किया और मैं अब तक अदालत में दो बार उनकी पैरवी कर चुका हूं.’

उन्होंने कहा, ‘मैंने यह केस लिया क्योंकि अदालत के समक्ष इसके बारे में जिरह करना जरूरी है. हम मीडिया ट्रायल के खतरे जानते हैं. अदालत में चल रहे किसी मामले में निजी संदेशों को लीक नहीं किया जाना चाहिए. यह गलत मिसाल खड़ी करता है और व्यक्ति की निजता को प्रभावित करता है. कानून को अपना काम करना पड़ता है.’

अधिवक्ता वृंदा भंडारी ने भी इन झूठे दावों की पुष्टि कर कहा, ‘उन्होंने (सिब्बल) इतने शॉर्ट नोटिस पर मदद करने का फैसला किया. उन्होंने बिना किसी शुल्क के इस मामले की पैरवी करने का फैसला किया है.’

सोशल मीडिया पर वायरल ये पोस्ट दिशा रवि को लेकर तेजी से बढ़ रही गलत जानकारियों की वजह है, ताकि जानबूझकर दिशा रवि और खालिस्तानियों के बीच संबंधों को दर्शाया जा सके.

दिल्ली पुलिस का आरोप है कि दिशा रवि भारत को बदनाम करने के लिए वैश्विक साजिश का हिस्सा हैं. अन्य झूठे दावों में कहा गया कि दिशा ईसाई हैं और सिंगल मदर हैं.

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने दिशा रवि को जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा साझा किए गए किसानों के आंदोलन का समर्थन करने वाले टूलकिट को साझा करने में कथित भूमिका के चलते 14 फरवरी को बेंगलुरु से गिरफ्तार किया था.

पुलिस का दावा है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा समेत किसान आंदोलन का पूरा घटनाक्रम ट्विटर पर साझा किए गए टूलकिट में बताई गई कथित योजना से मिलता-जुलता है.

यह टूलकिट एक दस्तावेज है, जो ट्विटर पर किसानों के लिए समर्थन जुटाने के लिए और भारतीय दूतावासों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने जैसे कार्यों का सुझाव देता है. ट्विटर पर किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए ग्रेटा ने इस टूलकिट को साझा किया था.

आरोप है कि इस ‘टूलकिट’ में भारत में अस्थिरता फैलाने को लेकर साजिश की योजना थी. किसान आंदोलन पर ट्वीट को लेकर दिल्‍ली पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था, इसमें आपराधिक साजिश और समूहों में दुश्‍मनी फैलाने का आरोप लगाया गया था.

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया था कि यह टूलकिट एक ऐसे सोशल मीडिया हैंडल से मिला था, जिस पर 26 जनवरी की हिंसा वाली घटनाओं की साजिश फैलाने के संकेत मिले हैं.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)