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‘जो लोग आज़ादी की लड़ाई में साथ नहीं थे उनके अनुयायी आज देश की एकता पर हमला कर रहे हैं’

आकाशवाणी और दूरदर्शन ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार का स्वतंत्रता दिवस का भाषण प्रसारित नहीं किया.

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स्वतंत्रता दिवस पर अगरतला में परेड के दौरान त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मानिक सरकार. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली/अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने आरोप लगाया है कि दूरदर्शन और आकाशवाणी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनके भाषण को प्रसारित करने से मना कर दिया और कहा कि जब तक वह भाषण को नया रूप नहीं देते, तब तक इसे प्रसारित नहीं किया जाएगा.

माणिक सरकार ने इसे अलोकतांत्रिक, निरंकुश और असहिष्णु कदम क़रार दिया. दूरदर्शन और आकाशवाणी का संचालन संभालने वाले प्रसार भारती से इस मामले में फिलहाल प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी.

त्रिपुरा सरकार की ओर से जारी बयान में आरोप लगाया गया कि दूरदर्शन और आकाशवाणी ने गत 12 अगस्त को सरकार का भाषण रिकॉर्ड कर लिया और 14 अगस्त की शाम सात बजे मुख्यमंत्री कार्यालय को एक पत्र के ज़रिये सूचित किया गया कि उनके भाषण को जब तक नया रूप नहीं दिया जाता तब तक इसे प्रसारित नहीं किया जाएगा.

मुख्यमंत्री कार्यालय के बयान में दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने भाषण में एक शब्द भी नहीं बदलेंगे तथा इस कदम को उन्होंने अलोकतांत्रिक, निरंकुश और असहिष्णु क़रार दिया.

सरकार का भाषण 15 अगस्त को त्रिपुरा में दूरदर्शन और आकाशवाणी पर प्रसारित होना था. माकपा ने आरोप लगाया कि दूरदर्शन ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार के भाषण का प्रसारण करने से मना कर दिया. पार्टी ने इस अघोषित आपातकाल से लड़ने की बात कही.

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि दूरदर्शन, आरएसएस-भाजपा की निजी संपत्ति नहीं है और आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने लोगों को निर्देश दे रहे हैं कि विपक्ष की आवाज़ को दबा दिया जाए, जिसमें कि एक निर्वाचित मुख्यमंत्री शामिल हैं.

माकपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा गया, दूरदर्शन ने त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक सरकार का भाषण प्रसारित करने से इनकार किया. क्या प्रधानमंत्री मोदी इसी सहयोगात्मक संघवाद की बात करते हैं शर्म की बात है.

माना जा रहा है कि पार्टी का परोक्ष इशारा प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस संबोधन की ओर था.

येचुरी ने एक ट्वीट करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि चैनल द्वारा सरकार का भाषण प्रसारित करने से मना करना ग़ैरकानूनी है.

उन्होंने ट्वीट किया, अगर यह तानाशाही और अघोषित आपातकाल नहीं है तो क्या है माकपा, त्रिपुरा की जनता और हमारे सभी नागरिक इससे लड़ेंगे.

सीताराम येचुरी ने माणिक सरकार के भाषण की प्रतियां भी ट्वीट की हैं. माणिक सरकार के भाषण का कुछ अंश इस प्रकार है:

विविधता में एकता भारत की परंपरागत विरासत रही है. धर्म निरपेक्षता के महान मूल्यों की वजह से हम भारतीयों को एक देश के रूप में एकजुट रहने में मदद मिली. लेकिन आज धर्म निरपेक्षता की विचारधारा ख़तरे में हैं.

धर्म, जाति और समुदाय के नाम पर हमारी राष्ट्रीय चेतना पर हमला करने और समाज को बांटने की कोशिशें की जा रही हैं. गाय की रक्षा के नाम पर और भारत को एक ख़ास धर्म वाले देश के रूप परिवर्तित करने के लिए भावनाओं को भड़काया जा रहा है.

अल्पसंख्यक और दलित समुदाय के लोग ख़तरे में हैं. उनकी सुरक्षा की भावना को ठेस पहुंचाया जा रहा है. उनकी ज़िंदगियां ख़तरे में हैं. इन अपवित्र प्रवृत्तियों और कोशिशों को प्रश्रय नहीं दिया जा सकता. ये विध्वंसकारी कोशिशें स्वतंत्रता आंदोलन के लक्ष्यों, सपनों और आदर्शों के ख़िलाफ़ हैं.

जो लोग आज़ादी की लड़ाई में साथ नहीं थे बल्कि उसे नाकाम करने की कोशिश की, जो नृशंस, क्रूर और लुटेरे अंग्रेजों के गुलामों की तरह रहे, जो राष्ट्र विरोधी ताकतों के साथ रहे, उनके अनुयायी आज भारत की एकता और अखंडता पर हमला कर रहे हैं.

आज हर ईमानदार और देशभक्त भारतीय को एकीकृत भारत के विचार के प्रति प्रतिबद्ध रहने का संकल्प लेना चाहिए ताकि विध्वंसकारी षड्यंत्रों और हमलों की कोशिशों का जवाब दिया जा सके.

दलित और अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और हमारे देश की एकता और अखंडता को संरक्षित करने के लिए हमें एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए.