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400 से अधिक शिक्षाविद, कार्यकर्ताओं ने नवदीप कौर और अन्य की गिरफ़्तारी की निंदा की

बयान में कहा गया है कि कई सरकारी एजेंसियों और राज्य सरकारों ने किसान, मज़दूर, शिक्षाविदों, पत्रकारों, कॉमेडियन और आम नागरिकों के अलावा युवा कार्यकर्ताओं को डराया-धमकाया और सिर्फ इसलिए मामला दर्ज किया क्योंकि ये लोग सरकार से असहमति जता रहे थे और लगातार उससे सवाल पूछ रहे थे.

(फोटोः पीटीआई)

(फोटो: पीटीआई)

नई दिल्लीः 400 से अधिक शिक्षाविदों और कार्यकर्ताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि, श्रम अधिकार कार्यकर्ता नवदीप कौर और अन्य की गिरफ्तारी की निंदा की है.

बयान में कहा गया है कि ये गिरफ्तारियां केंद्र सरकार की दमनकारी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए वे अधिकार कार्यकर्ताओं, छात्र नेताओं और अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को निशाना बना रहे हैं.

बयान में कहा गया, ‘कई भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों और राज्य सरकारों ने किसानों, मजदूरों, शिक्षाविदों, पत्रकारों, कॉमेडियन और आम नागरिकों के अलावा छात्रों और युवा कार्यकर्ताओं को डराना, धमकाना चाहा है और उन पर सिर्फ इसलिए मामला दर्ज किया है क्योंकि ये लोग सरकार से असहमति जता रहे थे और लगातार सरकार से सवाल पूछ रहे थे.’

बयान जारी करने वाले इन लोगों में इतिहासकार रामचंद्र गुहा, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज, भाषाविद् आयशा किदवई, पॉलिटिकल साइंटिस्ट प्रकाश काशवान और कई अन्य लोग शामिल हैं.

बयान में कहा गया, ‘हम इन युवा कार्यकर्ताओं के साथ खड़े हैं, जिन्होंने खुद के लिए, अपने साथियों के लिए, देश के भविष्य के लिए और इस ग्रह के लिए एकजुट खड़े होने का साहस दिखाया है. हम इनकी तत्काल रिहाई की मांग करते हैं.’

बयान में कहा गया, ‘हम 22 साल की जलवायु कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता दिशा रवि, जिसे दिल्ली पुलिस ने बेंगलुरू में उनके घर से गिरफ्तार किया था, उनकी गिरफ्तारी की निंदा करते हैं. ध्यान दिला दें कि दिशा की गिरफ्तारी से उन मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जिनके जरिए सरकार ने 23 साल की दलित श्रम अधिकार कार्यकर्ता नवदीप कौर सहित कई सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया है. नवदीप को 12 जनवरी को सिंघू बॉर्डर के पास किसानों के प्रदर्शन स्थल से गिरफ्तार किया गया था और जिन्हें कथित तौर पर पुलिस हिरासत में प्रताड़ित किया जा रहा है. दरअसल छात्र और युवा कार्यकर्ता विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े कार्यकर्ताओं का लंबे समय से केंद्र सरकार द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है क्योंकि इन्होंने देश के ईमानदार नागरिक होने के नाते चुप रहने के बजाए बोलने को चुना.’

बता दें कि दिल्ली की अदालत ने मंगलवार को दिशा को जमानत देते हुए मामले की जांच पर सवाल उठाए हैं.

बयान में कहा गया, ‘सवाल पूछते और अन्याय के खिलाफ विरोध करते युवा लोकतंत्र के सबसे मूल्यवान सिद्धांतों को जीवंत बनाए हुए हैं. संदेह का माहौल पैदा कर, भय पैदा कर और किसी भी महत्वपूर्ण चर्चा और बातचीत पर अंकुश लगाकर सरकार द्वारा इन आवाजों को दबाने के लिए दमनकारी रणनीतियों को तेज करने से भारत का लोकतंत्र कमजोर होगा.’

उन्होंने कहा, ‘हमें ऐसा समाज बनाने का प्रयास करना चाहिए, जिसमें लोग विशेष रूप से युवा सवाल पूछने से नहीं डरे और उनके पास लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और स्वतंत्रता हो.’

बयान में कहा गया, ‘हमारी मांग है कि दिशा रवि, नवदीप कौर और अन्य जिन्हें किसान आंदोलन का समर्थन करने और सरकार का विरोध करने के लिए गिरफ्तार किया गया है, उन्हें रिहा किया जाए और उनके ऊपर से सभी आरोप हटाए जाएं. हमारी मांग है कि इसी तरह के आरोप अन्य कार्यकर्ताओं के ऊपर से भी हटाए जाएं.’

बयान में कहा गया, ‘हमारी मांग है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां नागरिकों को आंतकित करने के लिए आतंक रोधी कानूनों का इस्तेमाल करना बंद कर दें और राजद्रोह कानूनों को रद्द कर दें, जिनका उपयोग लगातार शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के लिए किया जाता है. हम भारत के प्रत्येक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक और दुनियाभर के नागरिकों से आग्रह करते हैं कि वे सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछें.’

(इस पूरे बयान को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)