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अस्पताल को श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम देने का विरोध, उद्घाटन पीएम के कार्यक्रम से हटाया गया

एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईटी-खड़गपुर के पूर्व छात्रों द्वारा अस्पताल का नाम बदलने को लेकर आपत्ति जताने के बाद ऐसा हुआ. आईआईटी-खड़गपुर में स्थित इस मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल का नाम मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बीसी रॉय के नाम पर था, लेकिन अब इसे जन संघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम दे दिया गया है.

आईआईटी खड़गपुर. (फोटो: पीटीआई)

आईआईटी खड़गपुर. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: आईआईटी-खड़गपुर में मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण के उद्घाटन को प्रधानमंत्री के दीक्षांत समारोह कार्यक्रम से अंतिम मिनट में हटा दिया गया.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी-खड़गपुर के पूर्व छात्रों ने अस्पताल का नाम बदलने पर आपत्ति जताते हुए एक पत्र लिखा था, जिसके बाद ऐसा हुआ.

यह अस्पताल मूल रूप से पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. बीसी रॉय के नाम समर्पित किया गया था, लेकिन बाद में इसे जन संघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी को समर्पित कर दिया गया था.

संस्थान के रजिस्ट्रार तमलनाथ ने कहा, ‘कुछ तकनीकी कारणों से उद्घाटन को स्थगित कर दिया गया.’ हालांकि, तकनीकी कारणों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘फिलहाल मुझे उस बारे में कोई जानकारी नहीं है.’

सूत्रों ने कहा कि पूर्व छात्रों के एक समूह द्वारा विरोध दर्ज कराने वाला पत्र प्राप्त होने के बाद सरकार ने आईआईटी-खड़गपुर से स्पष्टीकरण मांगा था कि क्या वास्तव में अस्पताल का नाम बदला गया था. संस्थान द्वारा नाम में बदलाव की बात स्वीकार किए जाने के बाद उद्घाटन समारोह रोक दिया गया.

डॉ. बीसी रॉय के नाम पर आईआईटी-खड़गपुर की दो चिकित्सा सुविधाएं हैं. एक संस्थान का चिकित्सा केंद्र (जिसे बीसी रॉय प्रौद्योगिकी अस्पताल कहा जाता है) है, जहां कर्मचारियों और छात्रों का इलाज किया जाता है और दूसरा नवनिर्मित मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल है.

करीब डेढ़ दशक तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे रॉय के नाम पर अस्पताल का विचार साल 2006 में रखा गया था. साल 2007 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने उसका शिलान्यास किया था. अस्पताल चलाने के लिए संस्थान ने एक कंपनी का गठन किया है.

संस्थान के एक सूत्र ने कहा, मूल योजना के अंत में अस्पताल के साथ चिकित्सा केंद्र का विलय करना था. हालांकि, यह नहीं हुआ, क्योंकि मेडिकल सेंटर में कार्यरत कर्मचारी किसी कंपनी के लिए काम नहीं करना चाहते थे. चूंकि विलय को खारिज कर दिया गया था, इसलिए यह महसूस किया गया कि मेडिकल सेंटर और अस्पताल के अलग-अलग नाम होने चाहिए. संस्थान ने तब अस्पताल का नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर बदलने का प्रस्ताव रखा था और बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने इसे पिछले साल दिसंबर में मंजूरी दी थी.

रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने निदेशक वीके तिवारी ने फेसबुक पर पोस्ट कर बताया था कि प्रधानमंत्री अपने दीक्षांत संबोधन से पहले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंज एंड रिसर्च का उद्घाटन करने वाले हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, अस्पताल का उद्घाटन समारोह भले ही रोक दिया गया हो मगर उसका नाम पहले ही बदला जा चुका है और इस संबंध में जरूरी प्रक्रियाएं भी पूरी की जा चुकी हैं.