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प्रधानमंत्री ने सरकारी कंपनियों के निजीकरण का समर्थन किया, कहा- व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूर्ण रूप से उपयोग नहीं हुआ है या वे बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी 100 परिसंपत्तियों का मौद्रिकरण कर 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि उपक्रमों और कंपनियों को समर्थन देना सरकार का कर्तव्य है. लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि सरकार इनका स्वामित्व अपने पास रखे.

The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing at the webinar for effective implementation of Union Budget in Health Sector, in New Delhi on February 23, 2021.

नरेंद्र मोदी. (फोटो साभार: पीआईबी)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गैर-रणनीतिक सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का जोरदार तरीके से समर्थन करते हुए बुधवार को कहा कि ‘व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं है’.

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार रणनीतिक क्षेत्रों में कुछ सार्वजनिक उपक्रमों को छोड़कर बाकी क्षेत्रों में सरकारी इकाइयों का निजीकरण करने को प्रतिबद्ध है.

मोदी ने कहा कि घाटे वाले उपक्रमों को करदाताओं के पैसे के जरिये चलाने से संसाधन बेकार होते हैं. इन संसाधनों का इस्तेमाल जन कल्याण योजनाओं पर किया जा सकता है.

प्रधानमंत्री के अनुसार, ‘हमारी सरकार का प्रयास लोगों के जीवन स्तर को सुधारने के साथ ही लोगों के जीवन में सरकार के बेवजह के दखल को भी कम करना है. यानी जीवन में न सरकार का अभाव हो, न सरकार का प्रभाव हो.’

मोदी ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों पर निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम) की ओर से आयोजित वेबिनार में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कम इस्तेमाल या बिना इस्तेमाल वाली संपत्तियों का मौद्रिकरण किया जाएगा. इनमें तेल एवं गैस और बिजली क्षेत्र की संपत्तियां हैं. इनके मौद्रिकरण से 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश के अवसर पैदा होंगे.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘उपक्रमों और कंपनियों को समर्थन देना सरकार का कर्तव्य है. लेकिन यह जरूरी नहीं है कि सरकार इन कंपनियों का स्वामित्व रखे और इन्हें चलाए.’

मोदी ने कहा कि निजी क्षेत्र अपने साथ निवेश, वैश्विक सर्वश्रेष्ठ व्यवहार, बेहतरीन प्रबंधक, प्रबंधन में बदलाव और आधुनिकीकरण लाता है. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी बिक्री से जो पैसा आएगा उसका इस्तेमाल जन कल्याण योजनाओं मसलन जल और साफ-सफाई, शिक्षा और स्वास्थ्य पर किया जाएगा.

प्रधानमंत्री कार्यालय ने मोदी के हवाले से ट्वीट कर कहा है, ‘दुनिया के सबसे बड़े युवा देश की ये अपेक्षाएं सिर्फ सरकार से ही नहीं हैं, बल्कि प्राइवेट सेक्टर से भी उतनी ही हैं. ये अपेक्षाएं व्यवसाय का एक बहुत बड़ा अवसर लेकर आई हैं. आइए, हम सभी इन अवसरों का उपयोग करें.’

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार चार रणनीतिक क्षेत्रों- परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं रक्षा, परिवहन एवं दूरसंचार; बिजली, पेट्रोलियम, कोयला और अन्य खनिज; बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि इनमें सरकार की उपस्थिति को न्यूनतम स्तर पर रखा जाएगा.

उन्होंने कहा व्यवसाय करना सरकार का काम नहीं, सरकार का ध्यान जन कल्याण पर होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आधुनिकीकरण और मौद्रिकरण है.

मोदी ने कहा, ‘सरकार जिस मंत्र को लेकर आगे बढ़ रही है, वो है मौद्रिकरण और आधुनिकीकरण. जब सरकार मौद्रिकरण करती है तो उस स्थान को देश का प्राइवेट सेक्टर भरता है. प्राइवेट सेक्टर अपने साथ निवेश भी लाता है और सर्वश्रेष्ठ वैश्विक अभ्यास भी लाता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘इससे चीजें और आधुनिक होती हैं, पूरे सेक्टर में आधुनिकता आती है, सेक्टर का तेजी से विस्तार होता है और नौकरी के नए अवसर भी पैदा होते हैं. ये पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे, नियमों के तहत रहे, इसके लिए निगरानी करना भी उतना ही आवश्यक है.’

प्रधानमंत्री ने कहा कि विनिवेश की प्रक्रिया को तेज करने के लिए सचिवों का अधिकार प्राप्त समूह निवेशकों के मुद्दों को सुलझाने का काम करेगा.

उन्होंने कहा कि सरकार को विकास पर ध्यान देना है और सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम जब भी कारोबार करते हैं, तो घाटा होता है.

उन्होंने कहा कि कई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम घाटे में हैं, कइयों को करदाताओं के पैसे से मदद दी जा रही है. इस पैसे का इस्तेमाल कल्याण योजनाओं में किया जा सकता है.

सरकार का अगले वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बिक्री से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है. इन कंपनियों में बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, पवन हंस, आईडीआई बैंक और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं.

इसके अलावा जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी आएगा. साथ ही दो सरकारी बैंकों ओर एक साधारण बीमा कंपनी की बिक्री की जाएगी.

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘देश के हर उपक्रम को कुशल बनाने के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही, कानून का शासन, संसदीय निरीक्षण और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति आज स्पष्ट है. इस बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए जिस नई नीति की घोषणा की गई है, उसमें भी हमारा ये इरादा साफ-साफ दिखता है.’

प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा सुधारों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का इस्तेमाल दक्षता से हो सके.

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपक्रम देश की मूल्यवान संपत्तियां हैं और भविष्य में इनके लिए व्यापक संभावना है. उन्होंने कहा कि निजीकरण अभियान के लिए उचित कीमत खोज को सर्वश्रेष्ठ वैश्विक व्यवहार को अपनाया जाएगा.

मोदी ने कहा, ‘कार्यान्वयन भी महत्वपूर्ण है. पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए हमारी प्रक्रियाएं सही होनी चाहिए.’

उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने को मूल्य खोज और अंशधारकों की ‘मैपिंग’ के लिए स्पष्ट रूपरेखा होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘सरकारी कंपनियों को केवल इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए कि वे विरासत में मिली हैं.’ प्रधानमंत्री ने कहा कि रुग्ण (घाटे में चल रहे) सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन देते रहने से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है.

मोदी ने कहा कि बजट 2021-22 में भारत को ऊंची वृद्धि की राह पर ले जाने के लिए स्पष्ट रूपरेखा बनाई गई है. रुग्ण सार्वजनिक उपक्रमों को वित्तीय समर्थन से अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ता है, सरकारी कंपनियों को केवल इसलिए नहीं चलाया जाना चाहिए कि वे विरासत में मिली हैं.

मोदी ने कहा कि उनकी सरकार 111 लाख करोड़ रुपये की नई राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पाइपलाइन (सूची) पर काम कर रही है.

उन्होंने कहा कि सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूर्ण रूप से उपयोग नहीं हुआ है या बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी 100 परिसंपत्तियों का मौद्रिकरण कर 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे.

भारत को निवेश गंतव्य के रूप में पेश करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब एक बाजार, एक कर प्रणाली वाला देश है, कर प्रणाली को सरल बनाया गया है, अनुपालन जटिलताओं में सुधार लाया गया है

उन्होंने कहा, ‘अब भारत की आर्थिक वृद्धि का नया चरण शुरू करने का समय आ गया है.’

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)