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भाजपा का साथ देना बड़ी भूल थी, सरकार किसानों को बर्बाद करने पर तुली है: नरेश टिकैत

दिल्ली में कृषि क़ानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन की गूंज गुरुवार को पूर्वांचल में भी सुनाई दी, जहां बस्ती ज़िले में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने किसान पंचायत का आयोजन किया और जमकर भाजपा और केंद्र सरकार पर निशाना साधा.

किसान महापंचायत को संबोधित करते नरेश टिकैत. (फोटो साभार: फेसबुक/भाकियू)

किसान महापंचायत को संबोधित करते नरेश टिकैत. (फोटो साभार: फेसबुक/भाकियू)

गोरखपुर: भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने गुरुवार को बस्ती जिले के मुंडेरवा में बड़ी किसान पंचायत का आयोजन कर पूर्वांचल में किसान आंदोलन को गति दे दी.

मुंडेरवा चीनी मिल के पास एक मैदान में आयोजित इस किसान महापंचायत में काफी लोग जुटे. हालांकि किसान महापंचायत के बारे में बहुत प्रचार-प्रसार नहीं हुआ था और पंचायत शुरू होने के बाद प्रशासन-पुलिस द्वारा सभा स्थल पर चार पहिया वाहनों को जाने से रोका जाने लगा फिर भी पूरा मैदान हरी पगड़ी और सफेद-हरी टोपी पहने किसानों से भर गया.

महापंचायत में बड़ी संख्या में युवा व महिलाएं भी देखे गए. चार घंटे से अधिक समय तक चली इस महापंचायत को भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने संबोधित करते हुए कहा, ‘भाजपा सरकार किसानों को बर्बाद करने पर तुली हुई है. हमारे पास से खेती, धरती चली जाएगी तो हमारे पास क्या रह जाएगा? हम हजारों साल से खेती करते आ रही है. हम अपनी धरती किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगे.’

उन्होंने किसानों से भाजपा के विधायक-सांसद से किसी तरह का संबंध न रखने और उन्हें किसी भी आयोजन में न बुलाने का आह्वान भी किया. उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का समर्थन करना उनकी सबसे बड़ी भूल थी.

मुंडेरवा किसान आंदोलन की पुरानी जमीन है, जहां भारतीय किसान यूनियन का मजबूत आधार रहा है. इसी क्षेत्र के दीवान चंद्र चौधरी भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे थे, जिनका मार्च 2020 में निधन हो गया था.

उनके नेतृत्व में 2002 में बकाया गन्ना मूल्य को लेकर बड़ा आंदोलन चला था जिसमें पुलिस फायरिंग में तीन किसान मारे गए थे.

गुरुवार को नरेश टिकैत से लेकर सभी किसान नेताओं ने चौधरी व वर्ष 2002 के किसान आंदोलन में शहीद हुए बद्री प्रसाद, जुगनी और तिलकराज को याद किया.

टिकैत ने दीवान चंद्र चौधरी को पूर्वांचल में किसान यूनियन का दाहिना बाजू बताते हुए कहा कि हाल के वर्षों में यूनियन ने पूर्वांचल के कई बड़े किसान नेताओं- मुकेश चौधरी, बेनीमाधव तिवारी, पटेश्वरी चौधरी को खोया है. अब  युवाओं पर जिम्मेदारी है कि वे आंदोलन में ढील न आने दें.

(फोटो: मनोज सिंह)

(फोटो: मनोज सिंह)

टिकैत ने कहा कि किसान मेहनती और समझदार है. वह इस आंदोलन को पूरब से पश्चिम तक निभायेगा. अनुशासन से आंदोलन चलाएगा. हमारी किसी से व्यक्तिगत बैर नहीं है लेकिन यदि किसी की सोच गलत हो जाए तो उसकी सोच को हम गलत जरूर कहेंगे.

उन्होंने आगे कहा, ‘नरेंद्र मोदी ने 2014 में जादूगर वाली चाल चली. सब उसी बहाव में बह गए. पांच साल बाद नरेंद्र मोदी ने कहा कि बहुत बिगड़ा महौल था, उसी को सुधारने में पांच वर्ष लग गए. यह यहकर उन्होंने 2019 में दुबारा अपना काम बना लिया. आप बताओ कि क्या सुधार दिख रहा? उन्होंने दुबारा सत्ता में आने के बाद किसानों का ही काम लगा दिया. उन्होंने हसीन सपने दिखाए. उन्होंने 2014 में कहा कि हमारी सरकार बनेगी तो गन्ने का दाम 450 रुपये क्विंटल कर देंगे. आज उनके कहे सात वर्ष हो गए लेकिन वादा पूरा नहीं हुआ.’

डीजल-पेट्रोल के बढ़ते दाम पर सवाल उठाते हुए टिकैत ने कहा कि जबसे भाजपा सत्ता में आई है डीजल का दाम 45 रुपये और पेट्रोल का दाम 55 रुपये बढ़ गया लेकिन इस दौरान गन्ने का दाम एक रुपये नहीं बढ़ा. ऐसी हालत में खेती का क्या होगा? यह सरकार किसान को बर्बाद करने पर तुल गई है. डीजल-पेट्रोल का दाम बढ़ते हैं तो सरकार हमे सब्सिडी क्यों नहीं दे रही? सरकार डीजल-पेट्रोल पर 40 रुपये टैक्स ले रही है. क्या केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के लिए 10-10 रुपये टैक्स में कमी नहीं कर सकती है ?

नए कृषि कानूनों की बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘कॉन्ट्रैक्ट खेती का कानून बहुत खतरनाक है. जिसके नाम एक बार जमीन चढ़ गई, जमीन उसी की हो गई. यह पूरी तरह चार सौ बीसी है. हमने विकास के नाम पर अपनी जमीनें दी हैं. हमसे कहा गया कि विकास के ली जाने वाली जमीन का चार गुना अधिक दाम देंगे लेकिन जिन किसानों की जमीन ली गई उनसे धोखेबाजी हुई.’

भाकियू नेता ने आगे यूपी सरकार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में बिजली की समस्या गंभीर हो रही है. हरियाणा में ट्यूबवेल का बिल 250 रुपये है जबकि यूपी में 2000-2200 रुपये तक पहुंच गया है. प्रदेश सरकार कहती है कि वह किसानों को नहर से फ्री में सिंचाई की सुविधा दे रही है. नहर से सिंचाई तो पहले से फ्री है. इसे भाजपा सरकार ने नहीं फ्री किया है. इस तरह से लोगों को बेवकूफ बनाया जा रहा है.’

उन्होंने किसानों पर हिंसा के आरोप को लेकर कहा, ‘यह परीक्षा की घड़ी है. पता नहीं कल क्या हो जाए ? सरकार की नीति बहुत गलत है. किसी के साथ कुछ भी हो सकता है, कुछ भी आरोप लगाया जा सकता है लेकिन हमें शांति बनाए रखते हुए आगे बढ़ना है. हम पर लगाए गए सभी आरोप पीछे छूटते जा रहे हैं. तीन महीने बाद भी किसानों के हौसले बुलंद है और बुलंद होते जा रहे हैं. पूरे भारत का किसान हमारे संगठन की तरफ आस लगा कर देख रहा है.

टिकैत ने यह भी कहा, ‘प्रधानमंत्री द्वारा संसद में किसानों के लिए गलत शब्द का इस्तेमाल किया. उन्होंने किसानों को आंदोलनजीवी, परजीवी कहा. यह कितने शर्म की बात है. उन्होंने किसानों के स्वाभिमान, सम्मान को ठेस पहुंचायी है. आखिर हमारी क्या खता है ? हमने देश को अनाज में आत्मनिर्भर बनाया. हम यही तो मांग रहे हैं कि एमएसपी पर कानून बना दो. उस पर पक्की मुहर लगा दो ताकि कोई भी एमएसपी से कम पर खरीद न कर सके. उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई खेती बचाने, धरती बचाने की लड़ाई है.’

नरेश टिकैत ने भाजपा का समर्थन करने पर पश्चाताप करते हुए कहा कि उन्होंनेकभी किसी दल को वोट देने की अपील नहीं की. हमेशा यही कहा कि हर कोई अपनी मर्जी से वोट दे लेकिन उन्होंने भाजपा का साथ दिया. भाजपा को वोट देने की अपील कीऔर यह उनकी सबसे बड़ी भूल थी.

महापंचायत को भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम सिंह लंबरदार, महेंद्र पाल सिंह चौहान, युवा इकाई के प्रदेश उपाध्यक्ष दिगंबर सिंह, हरनाम वर्मा, सुरेश यादव आदि ने भी संबोधित किया.

(लेखक गोरखपुर न्यूज़लाइन वेबसाइट के संपादक हैं.)