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सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों का निजीकरण देश के लोगों के हित में नहीं: एटक

बीते 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूर्ण रूप से उपयोग नहीं हुआ है या वे बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी 100 परिसंपत्तियों का मौद्रिकरण कर 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे. उन्होंने कहा था कि उपक्रमों और कंपनियों को समर्थन देना सरकार का कर्तव्य है. लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि सरकार इनका स्वामित्व अपने पास रखे.

(फोटो साभार: फेसबुक)

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नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) या सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों का निजीकरण देश के लोगों के हित में नहीं है. ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) ने बृहस्पतिवार को यह राय व्यक्त की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) द्वारा निजीकरण पर आयोजित एक वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार का काम व्यवसाय करना नहीं है. मोदी ने इसके साथ ही कहा था कि उनकी सरकार रणनीतिक क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण करने को प्रतिबद्ध है.

एटक ने बयान में कहा, ‘हम पीएसयू, राष्ट्रीय संपदा को भारतीय कॉरपोरेट्स या विदेशी ब्रांडों को बेचने के खिलाफ हैं. यह देश के लोगों के हित में नहीं है.’

एटक ने अपनी यूनियनों, कामकाजी लोगों और आम जनता से सरकार की इन नीतियों का विरोध करने का आह्वान किया है.

एटक 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों में से एक है.

बीते 24 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सरकार के पास कई ऐसी संपत्तियां हैं, जिसका पूर्ण रूप से उपयोग नहीं हुआ है या वे बेकार पड़ी हुई हैं, ऐसी 100 परिसंपत्तियों का मौद्रिकरण कर 2.5 लाख करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे.

उन्होंने कहा था कि उपक्रमों और कंपनियों को समर्थन देना सरकार का कर्तव्य है. लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि सरकार इनका स्वामित्व अपने पास रखे.

वेबिनार में मोदी ने कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों की कम इस्तेमाल या बिना इस्तेमाल वाली संपत्तियों का मौद्रिकरण किया जाएगा. इनमें तेल एवं गैस और बिजली क्षेत्र की संपत्तियां हैं. इनके मौद्रिकरण से 2.5 लाख करोड़ रुपये के निवेश के अवसर पैदा होंगे.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि सरकार चार रणनीतिक क्षेत्रों- परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष एवं रक्षा, परिवहन एवं दूरसंचार; बिजली, पेट्रोलियम, कोयला और अन्य खनिज; बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों के सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा था कि इनमें सरकार की उपस्थिति को न्यूनतम स्तर पर रखा जाएगा.

सरकार का अगले वित्त वर्ष में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बिक्री से 1.75 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है. इन कंपनियों में बीपीसीएल, एयर इंडिया, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, पवन हंस, आईडीआई बैंक और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं.

इसके अलावा जीवन बीमा निगम (एलआईसी) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी आएगा. साथ ही दो सरकारी बैंकों ओर एक साधारण बीमा कंपनी की बिक्री की जाएगी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)